भारत की प्रमुख ब्रोकरेज फर्म Zerodha के संस्थापक और CEO Nithin Kamath ने एक चौंकाने वाला ब्लॉग पोस्ट लिखा है, जिसमें उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर रेगुलेटर्स Weekly Options पर बैन लगा देते हैं, तो कंपनी को अपना ब्रोकरेज मॉडल बदलना पड़ सकता है। इसका मतलब यह हो सकता है कि अब तक फ्री रहने वाली Equity Delivery ट्रेड्स पर भी ब्रोकरेज फीस लगाई जाएगी।
यह खबर उन लाखों रिटेल इनवेस्टर्स के लिए बड़ा झटका साबित हो सकती है, जो Zerodha की जीरो ब्रोकरेज पॉलिसी की वजह से बाजार में सक्रिय हैं। F&O सेगमेंट में लगातार सख्ती से कंपनी की रेवेन्यू पहले ही 40% गिर चुकी है, और अब Weekly Options Expiry का अंत ब्रोकरेज इंडस्ट्री को और मुश्किल में डाल सकता है।
F&O Curbs से Zerodha को लगा 40% का झटका
पिछले साल अक्टूबर से शुरू हुए रेगुलेटरी बदलावों ने Zerodha जैसे ब्रोकर्स को बुरी तरह प्रभावित किया है। Nithin Kamath ने अपने ब्लॉग में बताया कि Transaction Charges में कमी, F&O पर Securities Transaction Tax (STT) में बढ़ोतरी, Futures and Options ट्रेडिंग को कठिन बनाने के प्रस्ताव, ASBA for Trading की अनिवार्यता और BSDA लिमिट में वृद्धि जैसे कदमों से कंपनी की रेवेन्यू और प्रॉफिटेबिलिटी पर भारी असर पड़ा है।
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उन्होंने स्पष्ट कहा, “ये सभी रेगुलेटरी ऐक्शन हमारे बिजनेस को पिवट करने के लिए मजबूर कर रहे हैं।” जून 2025 क्वार्टर में Zerodha की ब्रोकरेज रेवेन्यू पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 40% कम होने की उम्मीद है। इसके अलावा, नए अकाउंट ओपनिंग में भी कमी आई है, भले ही कंपनी ने 2024 में अकाउंट ओपनिंग फीस को पूरी तरह खत्म कर दिया हो। बाजार की सुस्ती और रिटेल ट्रेडिंग एक्टिविटी में गिरावट ने स्थिति को और खराब किया है।
Weekly Options Ban: ब्रोकरेज मॉडल के लिए खतरा
Weekly Index Options रिटेल ट्रेडर्स के बीच बेहद लोकप्रिय हैं और ये डेरिवेटिव्स सेगमेंट में ट्रेडिंग वॉल्यूम का बड़ा हिस्सा हैं। Zerodha जैसे ब्रोकर्स इसी हाई वॉल्यूम पर निर्भर रहते हैं, जो उनकी जीरो ब्रोकरेज Equity Delivery मॉडल को सपोर्ट करता है। लेकिन अब रेगुलेटर्स Weekly Options ट्रेडिंग को सीमित करने या पूरी तरह बंद करने पर विचार कर रहे हैं।
Kamath ने चेतावनी दी कि अगर ऐसा हुआ, तो Zerodha के पास Equity Delivery ट्रेड्स पर ब्रोकरेज फीस लगाने के अलावा कोई चारा नहीं बचेगा। उन्होंने कहा, “यह हमारे लिए बिजनेस को पिवट करने का समय है।” सरकार द्वारा STT बढ़ाने, एक्सचेंजों द्वारा फी रिबेट्स हटाने और Intraday F&O नॉर्म्स को सख्त करने से पहले ही दबाव बढ़ चुका है। ये बदलाव सिस्टेमिक रिस्क को कम करने के लिए हैं, लेकिन रिटेल ट्रेडर्स के लिए शॉर्ट-टर्म बेटिंग के अवसर कम हो जाएंगे, जिससे स्पेकुलेटिव टर्नओवर घटेगा और ब्रोकर्स की प्रॉफिटेबिलिटी प्रभावित होगी।
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Zerodha की मजबूत स्थिति, लेकिन चुनौतियां बरकरार
इन सबके बावजूद, Zerodha भारत में रिटेल और HNI एसेट्स का करीब 10% शेयर रखती है। कंपनी ने सिर्फ नौ महीनों में अपना Margin Trading Facility (MTF) बुक Rs 5,000 करोड़ तक पहुंचा लिया है। Kamath ने कहा, “मार्केट साइकल्स बिजनेस डिसीजन से ज्यादा महत्वपूर्ण होते हैं।” कंपनी की लॉन्ग-टर्म फिलॉसफी और कोई एक्सटर्नल इनवेस्टर्स न होने की वजह से यह डाउनटर्न को झेल सकती है। लेकिन अगर Weekly Options Expiry बंद हो गई, तो फर्स्ट-टाइम इनवेस्टर्स को आकर्षित करने वाली फ्री ट्रेडिंग पॉलिसी पर सवालिया निशान लग सकता है।
रिटेल ट्रेडर्स पर क्या असर पड़ेगा?
रिटेल ट्रेडर्स के लिए Weekly Options Ban का मतलब शॉर्ट-टर्म स्पेकुलेशन के मौके कम होना है। जहां एक तरफ यह सिस्टेमिक रिस्क को घटाएगा, वहीं ब्रोकर्स की कमाई घटने से वे फीस बढ़ा सकते हैं। Zerodha की यह चेतावनी पूरे ब्रोकरेज इंडस्ट्री के लिए एक वेक-अप कॉल है। अगर आप Zerodha यूजर हैं या F&O ट्रेडिंग में सक्रिय हैं, तो इन बदलावों पर नजर रखें।
(डिस्क्लेमर: यहां दिए गए विचार और सुझाव विशेषज्ञों के अपने हैं। निवेश से पहले पेशेवर सलाह लें।)
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