भारतीय शेयर बाजार में ब्रोकिंग सेक्टर की प्रमुख कंपनी एंजेल वन लिमिटेड (Angel One Ltd) के शेयर आज 26 फरवरी 2026 को स्टॉक स्प्लिट के एक्स-डेट पर हल्की गिरावट के साथ ट्रेड कर रहे हैं। कंपनी ने 10:1 के अनुपात में स्टॉक स्प्लिट किया है, जिसके तहत प्रत्येक ₹10 के फेस वैल्यू वाले शेयर को 10 शेयरों में विभाजित कर ₹1 का फेस वैल्यू कर दिया गया है। यह कदम शेयर की लिक्विडिटी बढ़ाने और रिटेल निवेशकों के लिए इसे अधिक सुलभ बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है।
शेयर प्राइस में आज क्या हुआ?
आज सुबह 11:20 बजे तक एंजेल वन का शेयर ₹244.70 पर ट्रेड कर रहा था, जो पिछले क्लोज (एडजस्टेड) ₹2,489.90 से ₹4.30 या 1.73% की गिरावट दर्शाता है। स्प्लिट के बाद शेयर की ओपनिंग ₹251.00 पर हुई, दिन का हाई ₹254.90 और लो ₹242.80 रहा। कारोबार में काफी तेजी देखी गई, जहां 43.61 लाख शेयरों का ट्रेड हुआ और कुल ट्रेड वैल्यू ₹108.46 करोड़ रही। खरीदारों का हिस्सा 55.15% रहा, जबकि विक्रेताओं का 44.85%।
कंपनी का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन ₹22,271.85 करोड़ है, जबकि फ्री फ्लोट मार्केट कैप ₹15,758.49 करोड़ है। लंबी अवधि में कंपनी ने अच्छा प्रदर्शन किया है – पिछले 1 साल में 10.43% और 3 साल में 130.76% (एडजस्टेड) का रिटर्न दिया है। 52-सप्ताह का हाई ₹328.50 और लो ₹194.10 रहा है।
स्टॉक स्प्लिट के दिन शेयर में सामान्य उतार-चढ़ाव देखा जाता है, क्योंकि प्राइस एडजस्टमेंट होता है और कुछ निवेशक प्रॉफिट बुकिंग करते हैं। हालांकि, यह कंपनी के फंडामेंटल्स पर कोई असर नहीं डालता – निवेशक की होल्डिंग वैल्यू वही रहती है, बस शेयरों की संख्या बढ़ जाती है।
NCD आवंटन से मजबूत हुआ कंपनी का फाइनेंशियल बेस
स्टॉक स्प्लिट के अलावा, एंजेल वन ने 24 फरवरी 2026 को एक महत्वपूर्ण कदम उठाया। कंपनी की लोन, इन्वेस्टमेंट एंड बॉरोइंग्स कमिटी ने प्राइवेट प्लेसमेंट के आधार पर 5,000 सीनियर, रेटेड, सिक्योर्ड, लिस्टेड, रिडीमेबल नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर्स (NCDs) आवंटित किए। प्रत्येक NCD का फेस वैल्यू ₹1,00,000 है, कुल मिलाकर ₹50 करोड़ का फंड जुटाया गया।
इन NCDs पर 8.75% प्रति वर्ष का कूपन रेट है और अवधि 18 महीने की है, जो 25 अगस्त 2027 को मैच्योर होगी। पहला कूपन 25 अगस्त 2026 को ₹4,363.01 प्रति NCD के हिसाब से दिया जाएगा। ये डिबेंचर्स NSE के होलसेल डेट मार्केट सेगमेंट में लिस्ट होने प्रस्तावित हैं।
यह NCD आवंटन कंपनी के उधार आधार (borrowing base) को मजबूत करेगा, जिससे भविष्य में बिजनेस एक्सपैंशन, क्लाइंट फंडिंग और अन्य ऑपरेशंस के लिए अतिरिक्त पूंजी उपलब्ध होगी। ब्रोकिंग इंडस्ट्री में जहां मार्जिन फंडिंग और लेंडिंग महत्वपूर्ण है, ऐसे फंड रेजिंग से कंपनी की ग्रोथ को सपोर्ट मिलता है।
निवेशकों के लिए क्या मतलब?
स्टॉक स्प्लिट से रिटेल निवेशकों को कम प्राइस पर ज्यादा शेयर मिलते हैं, जिससे ट्रेडिंग आसान होती है और लिक्विडिटी बढ़ती है। वहीं, NCD इश्यू से कंपनी की बैलेंस शीट मजबूत हुई है। एंजेल वन Nifty Smallcap 100 इंडेक्स का हिस्सा है और ब्रोकिंग सेक्टर में मजबूत पोजिशन रखती है।
हालांकि, बाजार की अस्थिरता बनी हुई है, इसलिए निवेश से पहले अपनी रिसर्च और रिस्क प्रोफाइल जरूर देखें। लेटेस्ट अपडेट्स के लिए NSE/BSE या कंपनी की ऑफिशियल वेबसाइट चेक करें।
(नोट: यह लेख उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी पर आधारित है और निवेश सलाह नहीं है।)
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