भारत सेमीकंडक्टर मिशन 2.0: ISM 2.0 रोलआउट, एकल खिड़की पोर्टल 2026 में लॉन्च, लंबे समय तक सरकारी समर्थन

भारत सरकार ने सेमीकंडक्टर क्षेत्र में लंबे समय तक मजबूत समर्थन देने की प्रतिबद्धता जताई है। हाल ही में हुई घोषणाओं के अनुसार, भारत सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) 2.0 जल्द ही रोलआउट होने वाला है, साथ ही विदेशी विक्रेताओं की समस्याओं को दूर करने के लिए एक एकल खिड़की पोर्टल लॉन्च किया जाएगा। यह कदम भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर हब बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है।

ISM 1.0 की सफलता और ISM 2.0 की शुरुआत

भारत सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) की पहली फेज 2021 में शुरू हुई थी, जिसमें सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम विकसित करने के लिए कुल ₹76,000 करोड़ का प्रावधान किया गया था। ISM 1.0 के तहत अब तक कई प्रोजेक्ट्स को मंजूरी मिल चुकी है, जैसे टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य कंपनियों के साथ फैब यूनिट्स। ISM 1.0 के अधिकांश प्रोजेक्ट्स अगले महीने तक पूरा होने वाले हैं।

इसके बाद ISM 2.0 की शुरुआत होगी, जो इक्विपमेंट एंड मटेरियल्स प्रोडक्शन, डिजाइन आईपी, सप्लाई चेन और R&D सेंटर्स पर फोकस करेगी। 2026-27 के यूनियन बजट में ISM 2.0 के लिए ₹1,000 करोड़ का प्रावधान किया गया है। यह फेज इंडस्ट्री-लेड रिसर्च, ट्रेनिंग सेंटर्स और स्किल डेवलपमेंट पर जोर देगा, ताकि भारत में सेमीकंडक्टर की पूरी वैल्यू चेन मजबूत हो सके।

लंबे समय तक सरकारी समर्थन की गारंटी

इलेक्ट्रॉनिक्स एंड आईटी मिनिस्ट्री (MeitY) के अतिरिक्त सचिव और ISM के CEO अमितेश कुमार सिन्हा ने IESA Vision Summit 2026 में कहा, “यह एक लंबी दौड़ है, T20 मैच नहीं। हम कुछ सालों के लिए नहीं, बल्कि 20-25 साल या इससे भी ज्यादा समय तक समर्थन देंगे। दुनिया में जहां एडवांस्ड सेमीकंडक्टर फैसिलिटी हैं, वहां सरकारें दो से पांच दशकों तक सपोर्ट करती रही हैं। भारत भी इसी तरह तैयार है।”

यह लंबी अवधि का कमिटमेंट विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने और घरेलू इंडस्ट्री को स्थिरता प्रदान करने के लिए जरूरी है।

एकल खिड़की पोर्टल: विदेशी विक्रेताओं की समस्याओं का समाधान

सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स के विदेशी सप्लायर्स (जापान, सिंगापुर, मलेशिया, यूरोपीय देशों से) को भारत में ऑपरेशनल चुनौतियां आ रही हैं, जैसे कस्टम्स, क्लियरेंस और पॉलिसी से जुड़े मुद्दे। इन समस्याओं को हल करने के लिए ISM के तहत एक सिंगल-विंडो पोर्टल विकसित किया गया है।

अमितेश सिन्हा ने बताया, “हम एक पोर्टल विकसित कर रहे हैं, जो इन कंपनियों के लिए एकल खिड़की का काम करेगा। पोर्टल तैयार है और जल्द ही इंडस्ट्री एसोसिएशंस और कंपनियों की मौजूदगी में लॉन्च किया जाएगा।” यह पोर्टल ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा देगा और वैश्विक कंपनियों को भारत में आसानी से काम करने में मदद करेगा।

इंडस्ट्री-एकेडमिया सहयोग और टैलेंट डेवलपमेंट

सरकार इंडस्ट्री और एकेडमिया के बीच मजबूत पार्टनरशिप पर फोकस कर रही है। सेमीकंडक्टर से जुड़ा स्पेशलाइज्ड करिकुलम तैयार किया जाएगा, जिसमें डिजाइन, मैन्युफैक्चरिंग, पैकेजिंग, इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरिंग, R&D और मटेरियल्स जैसे क्षेत्र शामिल होंगे। इससे युवाओं को हाई-स्किल जॉब्स मिलेंगी और भारत में कुशल वर्कफोर्स तैयार होगी।

भारत के सेमीकंडक्टर क्षेत्र की वर्तमान स्थिति

  • अब तक 10+ प्रोजेक्ट्स अप्रूव्ड, जिसमें फैब, ATMP/OSAT और कंपाउंड सेमीकंडक्टर शामिल हैं।
  • हाल ही में उत्तर प्रदेश में HCL-Foxconn की सेमीकंडक्टर यूनिट लॉन्च हुई, जो चिप सेल्फ-रिलायंस की दिशा में बड़ा कदम है।
  • ISM 2.0 से भारत वैश्विक सप्लाई चेन में मजबूत भूमिका निभा सकेगा, आयात निर्भरता कम होगी और हाई-टेक जॉब्स बढ़ेंगी।

यह पहल भारत को सेमीकंडक्टर डिजाइन, मैन्युफैक्चरिंग और इनोवेशन का ग्लोबल सेंटर बनाने की ओर ले जा रही है। सरकार का लॉन्ग-टर्म विजन और प्रैक्टिकल स्टेप्स जैसे सिंगल-विंडो पोर्टल से इंडस्ट्री को नई गति मिलेगी। सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भारत का भविष्य उज्ज्वल दिख रहा है!

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