1 अप्रैल 2026 से आयकर फॉर्म में बड़ा बदलाव: फॉर्म 16 और फॉर्म 26AS के नए नाम, जानिए पूरी डिटेल और असर

भारत में आयकर व्यवस्था को और अधिक सरल, डिजिटल और आधुनिक बनाने के लिए सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। आयकर विभाग ने इनकम-टैक्स एक्ट, 2025 को लागू करने के लिए ड्राफ्ट इनकम-टैक्स रूल्स, 2026 जारी किए हैं, जो 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होंगे। इस नए ढांचे के तहत कई पुराने फॉर्म्स के नंबर बदल जाएंगे, लेकिन इनका उद्देश्य, जानकारी और अनुपालन की प्रक्रिया में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा। खास तौर पर वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण फॉर्म 16 और फॉर्म 26एएस के नाम बदलकर नए नंबर दिए जाएंगे।

फॉर्म 16 और फॉर्म 26AS के नए नाम क्या होंगे?

  • फॉर्म 16 (जो नियोक्ता द्वारा वेतन पर TDS प्रमाणपत्र के रूप में जारी किया जाता है) अब फॉर्म 130 के नाम से जाना जाएगा।
  • फॉर्म 26AS (एनुअल टैक्स स्टेटमेंट या टैक्स क्रेडिट स्टेटमेंट, जिसमें TDS, TCS, एडवांस टैक्स आदि की पूरी जानकारी होती है) अब फॉर्म 168 होगा। इसे अब टैक्स पासबुक के रूप में भी संदर्भित किया जाएगा।

ये बदलाव केवल नाम और नंबर के स्तर पर हैं। फॉर्म में मौजूद जानकारी, TDS की गणना, रिपोर्टिंग टाइमलाइन और टैक्सपेयर की जिम्मेदारियां वही रहेंगी।

यह बदलाव क्यों आ रहा है? मुख्य कारण

यह परिवर्तन इनकम-टैक्स एक्ट, 2025 के लागू होने का हिस्सा है, जो पुराने एक्ट को प्रतिस्थापित करेगा। मुख्य उद्देश्य:

  • फॉर्म्स की रेशनलाइजेशन और सरलीकरण।
  • “पिछला वर्ष” (Previous Year) और “आकलन वर्ष” (Assessment Year) के बीच के अंतर को खत्म कर “टैक्स ईयर” की एकीकृत अवधारणा लागू करना।
  • अधिक डिजिटल इंटीग्रेशन सुनिश्चित करना, जैसे कि नियोक्ताओं द्वारा तिमाही फाइलिंग (फॉर्म 139) से डेटा प्री-फिल्ड होकर फॉर्म 130 में आएगा।
  • मल्टीपल एम्प्लॉयर्स के मामले में बेहतर रिपोर्टिंग, जहां प्रत्येक नियोक्ता अपने कार्यकाल के लिए फॉर्म 130 के पार्ट A और पार्ट B जारी करेगा।
  • कुल फॉर्म्स की संख्या 399 से घटाकर 190 करने और नियमों को 511 से 333 तक कम करने की व्यापक योजना का हिस्सा।

टैक्सपेयर्स पर क्या असर पड़ेगा?

  • कोई अतिरिक्त अनुपालन बोझ नहीं बढ़ेगा। वेतन विवरण, TDS क्रेडिट और एनुअल समरी पहले की तरह ही आएंगे।
  • शुरुआती वर्षों में पुराने और नए फॉर्म नंबर साथ-साथ चल सकते हैं, जिससे दस्तावेज़ीकरण, संचार या लीगल मामलों में थोड़ी भ्रम की स्थिति हो सकती है।
  • डिजिटल इंटीग्रेशन बढ़ने से TDS सर्टिफिकेट और एनुअल स्टेटमेंट के बीच मिसमैच कम होंगे।
  • ITR फाइलिंग आसान बनेगी, क्योंकि प्री-फिल्ड डेटा अधिक सटीक होगा।
  • जॉब चेंज करने वालों के लिए रिपोर्टिंग गैप कम होगा।

टैक्स विशेषज्ञों की राय:

  • AKM Global के विकास शर्मा के अनुसार, यह केवल प्रशासनिक बदलाव है, टैक्स पॉलिसी या अनुपालन में कोई बदलाव नहीं।
  • फ्लाई हाई फाइनेंशियल सर्विसेज के ब्रजेश प्रणामी कहते हैं कि सिस्टम अपग्रेड में देरी मुख्य चुनौती हो सकती है, न कि नया बोझ।
  • बॉम्बे चार्टर्ड अकाउंटेंट्स सोसाइटी के सीए मृणाल मेहता के मुताबिक, नए फॉर्म डिजिटल तरीके से ज्यादा जुड़े होंगे और टैक्स ईयर 2026-27 से “टैक्स ईयर” टर्म इस्तेमाल होगा, जो दस्तावेज़ीकरण को सरल बनाएगा।

अन्य महत्वपूर्ण बदलाव

  • कई अन्य फॉर्म भी रिनंबर हो रहे हैं, जैसे TDS रिटर्न फॉर्म 24Q, 26Q, 27Q आदि।
  • टैक्स ऑडिट रिपोर्ट अब एक सिंगल फॉर्म 26 में आएगी (पुराने 3CA/3CB/3CD की जगह)।
  • ये बदलाव 1 अप्रैल 2026 से नए टैक्स ईयर पर लागू होंगे। पुराने वर्षों के पेंडिंग केस पुराने फॉर्म से ही चलेंगे।
  • ड्राफ्ट रूल्स पर स्टेकहोल्डर्स से सुझाव मांगे गए हैं, अंतिम अधिसूचना के बाद कोई छोटा-मोटा बदलाव संभव है।

टैक्सपेयर्स को सलाह: 2026-27 के टैक्स ईयर से पहले अपने CA या HR से नए फॉर्म नंबर की पुष्टि कर लें। इनकम टैक्स ई-फाइलिंग पोर्टल पर अपडेट्स चेक करते रहें। यह बदलाव कुल मिलाकर टैक्स सिस्टम को ज्यादा यूजर-फ्रेंडली और ट्रांसपेरेंट बनाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है।

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