लैब में बना सोना: क्या है लैब-ग्रोन गोल्ड, कैसे बनता है और क्यों है यह भविष्य की क्रांति?

लैब-ग्रोन गोल्ड (प्रयोगशाला में उगाया हुआ सोना) क्या है? यह एक ऐसा विषय है जो हाल के वर्षों में काफी चर्चा में आया है, खासकर जब लैब-ग्रोन डायमंड ने ज्वेलरी मार्केट में तहलका मचा दिया। लेकिन क्या वाकई सोना भी लैब में बनाया जा सकता है? आइए विस्तार से समझते हैं।

लैब-ग्रोन गोल्ड क्या है?

लैब-ग्रोन गोल्ड असली सोना ही होता है, जो रासायनिक और भौतिक रूप से खदानों से निकाले गए प्राकृतिक सोने के बिल्कुल समान होता है। इसका मतलब है कि इसमें वही परमाणु संरचना (79 प्रोटॉन), चमक, घनत्व, चालकता और शुद्धता होती है। यह नकली, प्लेटेड या इमिटेशन गोल्ड नहीं है। मुख्य अंतर सिर्फ उत्पादन की प्रक्रिया में है – इसे जमीन खोदकर नहीं, बल्कि नियंत्रित प्रयोगशाला में बनाया जाता है।

भारत जैसे देश में जहां सोना सिर्फ धातु नहीं, बल्कि संस्कृति, परंपरा और निवेश का प्रतीक है, यह अवधारणा काफी महत्वपूर्ण है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि यह ज्वेलरी इंडस्ट्री में एक नई क्रांति ला सकता है, जैसे लैब-ग्रोन डायमंड ने किया।

लैब-ग्रोन गोल्ड कैसे बनता है?

सोना बनाने की प्रक्रिया काफी जटिल और वैज्ञानिक है, क्योंकि सोना एक स्थिर तत्व (एलिमेंट) है। मुख्य तरीके निम्नलिखित हैं:

  1. परमाणु स्तर पर निर्माण (Atomic-level Creation या Nuclear Transmutation): वैज्ञानिक अन्य तत्वों के परमाणुओं को बदलकर सोना बनाते हैं। उदाहरण के लिए:
    • पारा (मर्करी, 80 प्रोटॉन) से एक प्रोटॉन हटाकर सोना (79 प्रोटॉन) बनाया जा सकता है।
    • प्लैटिनम (78 प्रोटॉन) में एक प्रोटॉन जोड़कर भी सोना प्राप्त किया जा सकता है। यह प्रक्रिया पार्टिकल एक्सेलरेटर, न्यूक्लियर रिएक्टर या न्यूट्रॉन बॉम्बार्डमेंट से होती है। हाल के वर्षों में कुछ स्टार्टअप्स जैसे अमेरिकी कंपनी Marathon Fusion ने फ्यूजन प्रक्रिया में मर्करी-197 से सोना बनाने का दावा किया है, लेकिन इसमें रेडियोएक्टिव इंप्योरिटीज होती हैं जिन्हें ठंडा होने में 14-18 साल लग सकते हैं।
  2. रिसाइक्ल्ड गोल्ड की उच्च शुद्धिकरण प्रक्रिया: कई कंपनियां पुराने ज्वेलरी, इलेक्ट्रॉनिक वेस्ट या स्क्रैप गोल्ड को इकट्ठा करके लैब में अल्ट्रा-हाई प्योरिटी (जैसे 999.9) तक रिफाइन करती हैं। यह पर्यावरण के लिए बेहतर है और इसे “लैब-ग्रोन” या “लैब-क्रिएटेड” के नाम से मार्केट किया जाता है, हालांकि सख्ती से यह रिसाइक्ल्ड है।
  3. अन्य उभरती तकनीकें: कुछ रिसर्च में वाष्प जमाव (vapor deposition), प्लाज्मा इंजीनियरिंग, बायो-मिनरलाइजेशन (बैक्टीरिया से नैनो-गोल्ड पार्टिकल्स) या AI-सहायता से सिंथेसिस की बात हो रही है। लेकिन ये अभी बड़े पैमाने पर व्यावसायिक नहीं हैं और ज्यादातर माइक्रोस्कोपिक मात्रा में ही संभव हैं।

ध्यान दें: लैब में सोना बनाना संभव तो है, लेकिन बड़े पैमाने पर सस्ता उत्पादन अभी नहीं हो पाया है। यह प्रक्रिया बहुत महंगी, ऊर्जा-गहन और कभी-कभी रेडियोएक्टिव होती है।

लैब-ग्रोन गोल्ड क्यों मायने रखता है?

  • पर्यावरणीय फायदे: प्राकृतिक सोने की खदान से निकालने में भारी मात्रा में भूमि खोदाई, साइनाइड-मर्करी का इस्तेमाल, कार्बन उत्सर्जन और पानी की खपत होती है। लैब-ग्रोन गोल्ड इन प्रभावों को काफी कम कर सकता है और सस्टेनेबल विकल्प प्रदान करता है।
  • नैतिकता: खदानों में बाल श्रम, मानवाधिकार उल्लंघन जैसी समस्याएं आम हैं। लैब-ग्रोन गोल्ड ट्रेसेबल और एथिकल होता है।
  • भारत में महत्व: भारत दुनिया का सबसे बड़ा सोना उपभोक्ता है। यहां सोना शादी, त्योहारों और निवेश से जुड़ा है। अगर लैब-ग्रोन गोल्ड सस्ता और उपलब्ध हुआ, तो यह बाजार बदल सकता है, लेकिन परंपरागत सोने की भावनात्मक वैल्यू बनी रहेगी।
  • निवेश और कीमत: अभी यह खनन सोने से सस्ता नहीं है, क्योंकि उत्पादन तकनीक महंगी है। भविष्य में अगर बड़े पैमाने पर उत्पादन हुआ, तो कीमतें प्रभावित हो सकती हैं। रीसेल वैल्यू शुद्धता पर निर्भर करेगी, न कि मूल पर।

क्या यह अभी उपलब्ध है?

वर्तमान में (2026 तक) असली “लैब-ग्रोन” सोना (न्यूक्लियर ट्रांसम्यूटेशन से) व्यावसायिक स्तर पर नहीं बिक रहा। ज्यादातर “लैब-ग्रोन गोल्ड” के नाम से बिकने वाला रिसाइक्ल्ड या रिफाइंड गोल्ड ही है। कुछ स्टार्टअप्स और रिसर्च जारी हैं, लेकिन बड़े पैमाने पर उत्पादन की चुनौतियां बनी हुई हैं।

क्या खरीदें या नहीं?

अगर आप पर्यावरण और नैतिकता को प्राथमिकता देते हैं, तो लैब-ग्रोन (या रिसाइक्ल्ड हाई-प्योर) गोल्ड अच्छा विकल्प हो सकता है। लेकिन भारतीय संस्कृति में प्राकृतिक सोने की भावुक वैल्यू अलग है। निवेश के लिए हमेशा BIS हॉलमार्क चेक करें और प्रमाणित ज्वेलर्स से खरीदें।

भविष्य में लैब-ग्रोन गोल्ड ज्वेलरी इंडस्ट्री को नया आयाम दे सकता है, लेकिन अभी यह विकास के दौर में है। क्या आपने कभी लैब-ग्रोन ज्वेलरी के बारे में सोचा है?

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