सहारा ग्रुप की कंपनी सहारा इंडिया कमर्शियल कॉरपोरेशन लिमिटेड (SICCL) को सिक्योरिटीज अपीलेट ट्रिब्यूनल (SAT) से तगड़ा झटका लगा है। SAT ने सेबी (SEBI) के 2018 के आदेश को पूरी तरह बरकरार रखा है, जिसमें कंपनी को लगभग ₹14,106 करोड़ की राशि निवेशकों को वापस लौटाने का निर्देश दिया गया था। यह राशि कंपनी ने ऑप्शनली फुली कन्वर्टिबल डिबेंचर्स (OFCDs) के जरिए जुटाई थी।
मुख्य फैसले की जानकारी:
- SAT का आदेश: 9 मार्च 2026 को जारी तीन सदस्यीय बेंच के फैसले में SICCL और उसके निदेशकों की अपील खारिज कर दी गई। ट्रिब्यूनल ने कहा कि 1998 से 2008 के बीच कंपनी ने लगभग 1.98 करोड़ (19.8 मिलियन) निवेशकों से यह रकम जुटाई थी, जो पब्लिक इश्यू (सार्वजनिक निर्गम) की श्रेणी में आता है। यह प्राइवेट प्लेसमेंट नहीं था, इसलिए सेबी की मंजूरी के बिना यह गैरकानूनी था।
- सेबी का 2018 आदेश: अक्टूबर 2018 में सेबी ने कंपनी को यह राशि निवेशकों को लौटाने, अपनी इन्वेंटरी का विवरण देने और कुछ अधिकारियों को सिक्योरिटीज मार्केट से दूर रखने का निर्देश दिया था। SAT ने इस आदेश को सही ठहराया।
- सहारा की दलीलें खारिज: सहारा ने दावा किया था कि ज्यादातर पैसा पहले ही लौटा दिया गया है और केवल ₹17 करोड़ बाकी हैं। साथ ही कई डिबेंचर्स को इक्विटी शेयरों में बदल दिया गया। कंपनी ने यह भी कहा कि सेबी ने कार्रवाई में बहुत देरी की। लेकिन SAT ने इन दलीलों को खारिज कर दिया। ट्रिब्यूनल ने कहा कि केस की जटिलता और पैमाने को देखते हुए देरी उचित थी। साथ ही रिफंड के दावे पर भरोसा नहीं किया जा सकता, क्योंकि सबूत पर्याप्त नहीं थे।
क्या हुआ था OFCD केस में?
सहारा ग्रुप ने OFCDs के नाम पर बड़ी संख्या में लोगों से पैसा जुटाया था, लेकिन इसे प्राइवेट प्लेसमेंट बताकर सेबी के नियमों से बचने की कोशिश की। सुप्रीम कोर्ट और सेबी पहले भी इस मामले में सक्रिय रहे थे, लेकिन यह नया फैसला SAT से आया है, जो सेबी के खिलाफ अपील सुनता है।
यह फैसला उन लाखों निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण है जो सालों से अपना पैसा वापस मांग रहे थे। अब सहारा ग्रुप को इस राशि को लौटाना होगा, जिसमें ब्याज भी शामिल हो सकता है (आदेश के अनुसार)। हालांकि, कंपनी आगे सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सकती है।
यह घटना भारतीय सिक्योरिटीज मार्केट में निवेशकों की सुरक्षा और नियमों के पालन की याद दिलाती है। अधिक जानकारी के लिए सेबी की आधिकारिक वेबसाइट या SAT के आदेश को देखें।
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