एसबीआई म्यूचुअल फंड ने आज SBI Nifty Midcap150 Momentum 50 ETF लॉन्च किया है, जो मिडकैप सेगमेंट में मोमेंटम फैक्टर पर आधारित एक नया पैसिव एक्सचेंज ट्रेडेड फंड है। यह निवेशकों को उन मिडकैप कंपनियों में एक्सपोजर देता है जो मजबूत मूल्य गति (मोमेंटम) दिखा रही हैं।
क्या है यह ETF और इसका उद्देश्य?
SBI Nifty Midcap150 Momentum 50 ETF एक ओपन-एंडेड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड है, जिसका मुख्य उद्देश्य Nifty Midcap 150 Momentum 50 Index के कुल रिटर्न को यथासंभव निकटता से ट्रैक करना है (ट्रैकिंग एरर के अधीन)। यह पैसिव फंड है, यानी इसमें कोई एक्टिव मैनेजमेंट नहीं होता—फंड इंडेक्स के स्टॉक्स को उसी अनुपात में खरीदता है।
यह फंड मिडकैप सेगमेंट में ट्रेंड-ड्रिवन निवेश का लाभ उठाने का मौका देता है, जहां मजबूत प्रदर्शन वाली कंपनियां आगे भी बेहतर रिटर्न दे सकती हैं।
Nifty Midcap 150 Momentum 50 Index कैसे काम करता है?
यह इंडेक्स Nifty Midcap 150 यूनिवर्स से टॉप 50 कंपनियों को चुनता है, जो सबसे ज्यादा नॉर्मलाइज्ड मोमेंटम स्कोर पर आधारित होती हैं।
- मोमेंटम स्कोर की गणना: स्टॉक के 6-महीने और 12-महीने के प्राइस रिटर्न को वोलेटिलिटी (उतार-चढ़ाव) के लिए एडजस्ट करके किया जाता है।
- वेटेज : स्टॉक का वेटेज उसके नॉर्मलाइज्ड मोमेंटम स्कोर और फ्री-फ्लोट मार्केट कैपिटलाइजेशन के कॉम्बिनेशन से तय होता है। सिंगल स्टॉक पर कैप (जैसे 5%) लग सकता है ताकि ज्यादा कंसंट्रेशन न हो।
- रिबैलेंसिंग: इंडेक्स सेमी-एनुअल (जून और दिसंबर) में रिबैलेंस होता है, जिससे पुराने मोमेंटम खोने वाले स्टॉक्स बाहर हो जाते हैं और नए मजबूत स्टॉक्स शामिल होते हैं।
यह इंडेक्स मिडकैप + मोमेंटम फैक्टर का कॉम्बिनेशन है, जो लॉन्ग टर्म में Nifty Midcap 150 से बेहतर रिटर्न दे सकता है (पिछले डेटा के अनुसार, हायर CAGR लेकिन समान वोलेटिलिटी के साथ)। हालांकि, मोमेंटम स्ट्रैटेजी में मार्केट रिवर्सल पर ज्यादा वोलेटिलिटी आ सकती है।
NFO डिटेल्स और निवेश कैसे करें?
- NFO ओपन डेट: 17 फरवरी 2026
- NFO क्लोज डेट: 24 फरवरी 2026
- मिनिमम निवेश (NFO में): ₹5,000 और उसके बाद ₹1 के मल्टीपल में
- एडिशनल/सब्सिक्वेंट निवेश: मिनिमम ₹1,000 और ₹1 के मल्टीपल में
- SIP ऑप्शन: डेली, वीकली, मंथली, क्वार्टरली, सेमी-एनुअल और एनुअल फ्रीक्वेंसी उपलब्ध
- फंड मैनेजर: विरल छड़वा (Viral Chhadva), जो SBI MF में पैसिव प्रोडक्ट्स संभालते हैं
- रिस्क लेवल: वेरी हाई रिस्क (मिडकैप और मोमेंटम की वजह से)
- एसेट अलोकेशन: 95-100% इंडेक्स स्टॉक्स में, बाकी 0-5% गवर्नमेंट सिक्योरिटीज, लिक्विड फंड्स आदि में
NFO पीरियड के बाद यह ETF स्टॉक एक्सचेंज (NSE/BSE) पर ट्रेड होगा, जहां आप ब्रोकर के जरिए यूनिट्स खरीद-बेच सकते हैं।
निवेशकों के लिए फायदे
- पैसिव और लो-कॉस्ट: एक्टिव फंड्स से कम एक्सपेंस रेशियो की उम्मीद (हालांकि स्पेसिफिक फिगर अभी नहीं घोषित)
- मिडकैप ग्रोथ + मोमेंटम: भारत की ग्रोइंग इकोनॉमी में मिडकैप कंपनियां तेज ग्रोथ दिखाती हैं, और मोमेंटम फैक्टर इसे और बूस्ट दे सकता है।
- डाइवर्सिफिकेशन: 50 स्टॉक्स से बनी पोर्टफोलियो, विभिन्न सेक्टर्स (फाइनेंशियल, हेल्थकेयर, केमिकल्स, कैपिटल गुड्स आदि) में एक्सपोजर।
- लिक्विडिटी: ETF होने से आसानी से ट्रेडिंग, रियल-टाइम प्राइसिंग।
ध्यान देने योग्य जोखिम
- उच्च वोलेटिलिटी: मोमेंटम स्ट्रैटेजी में मार्केट डाउनटर्न पर तेज गिरावट आ सकती है।
- ट्रैकिंग एरर: इंडेक्स से थोड़ा अंतर रह सकता है।
- मिडकैप रिस्क: लिक्विडिटी कम, इकोनॉमिक स्लोडाउन में ज्यादा प्रभावित।
- नो गारंटी: पास्ट परफॉर्मेंस फ्यूचर रिटर्न की गारंटी नहीं।
यह फंड उन निवेशकों के लिए उपयुक्त है जो लॉन्ग टर्म (5+ साल) में हाई ग्रोथ की तलाश में हैं और मार्केट के उतार-चढ़ाव सहन कर सकते हैं। अगर आप मिडकैप मोमेंटम में इंटरेस्टेड हैं, तो NFO पीरियड में या बाद में SBI MF की वेबसाइट, एप या किसी रजिस्टर्ड ब्रोकर/एडवाइजर के जरिए निवेश कर सकते हैं। निवेश से पहले अपनी रिस्क प्रोफाइल और फाइनेंशियल गोल्स जरूर जांचें।
अधिक जानकारी के लिए SBI म्यूचुअल फंड की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाएं या SEBI रजिस्टर्ड एडवाइजर से सलाह लें।
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