भारत की सबसे बड़ी पब्लिक सेक्टर बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के शेयर पिछले कुछ समय से निवेशकों का ध्यान खींच रहे हैं। बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद, एसबीआई के शेयरों ने शानदार प्रदर्शन किया है। हालिया आंकड़ों के मुताबिक, एसबीआई के शेयर पिछले 6 महीनों में 49% तक चढ़ चुके हैं। पिछले 1 महीने में 14% से ज्यादा, 2026 में अब तक (YTD) 22% से अधिक और पिछले 12 महीनों में 71% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह प्रदर्शन निफ्टी बैंक, निफ्टी PSU बैंक और निफ्टी 50 जैसे बेंचमार्क इंडेक्स से काफी बेहतर रहा है।
दिसंबर तिमाही में रिकॉर्ड प्रॉफिट
एसबीआई ने दिसंबर 2025 तिमाही (FY26 की Q3) में स्टैंडअलोन आधार पर ₹21,028 करोड़ का ऑल-टाइम हाई प्रॉफिट दर्ज किया। कंसोलिडेटेड आधार पर प्रॉफिट 13.06% बढ़कर ₹21,317 करोड़ रहा। कोर नेट इंटरेस्ट इनकम 9.04% बढ़कर ₹45,190 करोड़ हो गई, जबकि लोन ग्रोथ 15.14% रही। घरेलू NIM थोड़ा कम होकर 3.12% पर आया, लेकिन नॉन-इंटरेस्ट इनकम 15.65% बढ़कर ₹8,404 करोड़ पहुंच गई।
एसेट क्वालिटी में भी सुधार दिखा – ग्रॉस NPA रेशियो 1.73% से घटकर 1.57% हो गया। डिपॉजिट ग्रोथ 9.02% रही और कैपिटल एडिक्वेसी रेशियो मजबूत 14.04% पर है। बैंक के CEO सी.एस. सेट्टी ने बताया कि SBI म्यूचुअल फंड से स्पेशल डिविडेंड, फी इनकम में बढ़ोतरी, रिकवरी और नेट इंटरेस्ट इनकम ने प्रॉफिट को बढ़ावा दिया।
CLSA की रिपोर्ट: लॉन्ग टर्म में मजबूत कंपाउंडर
ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म CLSA ने एसबीआई पर पॉजिटिव नजरिया बनाए रखा है। CLSA के एनालिस्ट्स का मानना है कि भारत का सबसे बड़ा लेंडर होने के बावजूद एसबीआई ने पिछले 5 सालों में इंडस्ट्री से तेज ग्रोथ दिखाई है। कोविड के बाद बैंक ने अपनी ब्रांच नेटवर्क का बेहतर इस्तेमाल करके रिटेल लेंडिंग को तेजी से बढ़ाया है।
लायबिलिटी साइड पर, एसबीआई ने FY22 से FY25 के दौरान Axis Bank और Kotak Mahindra Bank जैसे प्राइवेट बैंकों के साथ डिपॉजिट कॉस्ट का गैप कम किया है। हाई लिक्विडिटी कवरेज रेशियो (LCR) की वजह से बैंक डिपॉजिट से तेजी से लोन बढ़ा सकता है, जिससे मार्जिन को फायदा मिलता है।
CLSA ने ‘Outperform’ रेटिंग बरकरार रखी है और टारगेट प्राइस ₹1,275 प्रति शेयर रखा है (हालिया क्लोजिंग से करीब 6% अपसाइड)। हालांकि, एनालिस्ट्स का कहना है कि हालिया रैली के बाद शॉर्ट टर्म में शेयर रेंज-बाउंड रह सकता है, लेकिन लॉन्ग टर्म में यह एक मजबूत कंपाउंडर बना हुआ है।
“देश के सबसे बड़े लेंडर होने के बावजूद, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने पिछले पांच सालों में इंडस्ट्री ग्रोथ को पीछे छोड़ दिया है। कोविड पीरियड से बैंक ने अपनी अनयूज्ड ब्रांच नेटवर्क का फायदा उठाकर रिटेल लेंडिंग को स्केल किया है। लायबिलिटी साइड पर कॉस्ट ऑफ डिपॉजिट में सुधार और हाई LCR ने मार्जिन को मजबूत बनाया है।” – CLSA रिपोर्ट
निवेशकों के लिए क्या मतलब?
एसबीआई के शेयरों का यह प्रदर्शन PSU बैंक सेक्टर में मजबूती और रिटेल लेंडिंग पर फोकस को दर्शाता है। हालांकि बाजार में वैल्यूएशन हाई होने से शॉर्ट टर्म में सावधानी बरतनी चाहिए, लेकिन फंडामेंटल्स मजबूत हैं – बेहतर एसेट क्वालिटी, हाई प्रॉफिटेबिलिटी और ग्रोथ मोमेंटम।
अगर आप लॉन्ग टर्म निवेशक हैं, तो एसबीआई जैसे बड़े और स्थिर बैंक में मौका तलाश सकते हैं। लेकिन निवेश से पहले अपनी रिसर्च करें और फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह लें।
(नोट: शेयर मार्केट में निवेश जोखिम भरा है। यह लेख केवल सूचना के लिए है, निवेश सलाह नहीं है।)
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