भारतीय शेयर बाजार में आज भारी गिरावट देखने को मिली, जहां सेंसेक्स 961 अंक टूटकर 81,287.19 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 318 अंक लुढ़ककर 25,178.65 के स्तर पर आ गया। इस तीव्र बिकवाली के कारण निवेशकों की संपत्ति में 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक की कमी आई, और बीएसई पर सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण घटकर लगभग 463 लाख करोड़ रुपये रह गया।
यह गिरावट वैश्विक अनिश्चितताओं, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और घरेलू स्तर पर लाभ बुकिंग के मिश्रण से हुई। आइए जानते हैं कि शेयर बाजार क्यों गिर रहा है – यहां 5 प्रमुख कारणों की विस्तृत व्याख्या दी गई है:
1. भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं (Geopolitical Uncertainties)
वैश्विक बाजारों में अमेरिका-ईरान के बीच परमाणु वार्ता बिना किसी समझौते के समाप्त हो गई, जिससे तनाव बढ़ गया। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने ईरान को “बहुत गंभीर खतरा” बताया, जबकि राष्ट्रपति ट्रंप ने सैन्य कार्रवाई का संकेत दिया। ऐसी अनिश्चितताएं निवेशकों के बीच जोखिम से बचने की भावना पैदा करती हैं, जिससे शेयर बाजार पर दबाव बढ़ता है। घरेलू स्तर पर कोई नया सकारात्मक ट्रिगर न होने से यह प्रभाव और गहरा हो गया।
2. कच्चे तेल की कीमतें 71 डॉलर से ऊपर (Crude Oil Above $71)
ब्रेंट क्रूड ऑयल में 1% से अधिक की तेजी आई और यह 71 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना रहा। मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने से आपूर्ति बाधित होने का डर है। भारत जैसे बड़े आयातक देश के लिए महंगा कच्चा तेल रुपये पर दबाव डालता है, विदेशी पूंजी के बहिर्गमन को बढ़ावा देता है और राजकोषीय घाटे को प्रभावित करता है। इससे बाजार में नकारात्मक माहौल बनता है।
3. विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की अनियमित गतिविधियां
FII ने फरवरी में नकद सेगमेंट में खरीदारी शुरू की थी, लेकिन मुनाफा वसूली जारी है। 26 फरवरी को FII ने 3,466 करोड़ रुपये की बिकवाली की। हालांकि महीने में कुल मिलाकर 896 करोड़ रुपये की खरीदारी हुई, लेकिन ऊंचे मूल्यांकन और रुपये के 91 के आसपास रहने से सतर्कता बनी हुई है। FII की बिकवाली बाजार को नीचे खींचने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
4. बैंकिंग, ऑटो और मेटल सेक्टर में तेज मुनाफा वसूली
हालिया तेजी के बाद बैंकिंग, मेटल, ऑटो और FMCG जैसे प्रमुख सेक्टरों में भारी लाभ बुकिंग देखी गई। बाजार अब स्टॉक-स्पेसिफिक कार्रवाई में है, जहां इंडेक्स स्तर पर तीन महीने से कंसोलिडेशन चल रहा है। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के मुख्य निवेश रणनीतिकार वीके विजयकुमार के अनुसार, पिछले एक साल में निफ्टी ने 13% रिटर्न दिया, लेकिन कुछ स्टॉक 50% से अधिक चढ़े, जबकि कुछ में 20% से ज्यादा गिरावट आई। यह स्टॉक पिकर्स का बाजार बन गया है।
5. Q3 GDP आंकड़ों पर नजर (Focus on Q3 GDP Data)
27 फरवरी को जारी होने वाले तीसरी तिमाही के GDP आंकड़ों की वजह से भी बाजार सतर्क था। SBI के अनुमान के अनुसार, दिसंबर तिमाही में विकास दर 8.0-8.1% रह सकती है, जबकि मिंट के पोल में 7.4% का अनुमान था। हालांकि विकास मजबूत रहने की उम्मीद है, लेकिन नाममात्र GDP की कमजोरी निवेशकों को चिंतित कर रही है।
बाजार का समग्र विश्लेषण
यह गिरावट एक दिन की घटना नहीं, बल्कि वैश्विक जोखिम, कमोडिटी दबाव, विदेशी फ्लो और सेक्टोरल शिफ्ट का संयोजन है। इंडिया VIX में 4.9% की बढ़ोतरी से अस्थिरता बढ़ी है। विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार में कंसोलिडेशन जारी रह सकता है, और निवेशकों को स्टॉक चयन पर फोकस करना चाहिए।
नोट: शेयर बाजार में निवेश जोखिम भरा होता है। कोई भी निर्णय लेने से पहले प्रमाणित विशेषज्ञ से सलाह लें। यह लेख केवल सूचनात्मक उद्देश्य से है।
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