संघ बजट 2026: म्यूचुअल फंड निवेशकों के लिए STT बढ़ोतरी का प्रभाव, SIP पर क्या असर? विशेषज्ञ विश्लेषण

1 फरवरी 2026 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संघ बजट 2026 पेश किया। इस बजट में म्यूचुअल फंड निवेशकों के लिए कोई बड़ा टैक्स बदलाव नहीं हुआ, जैसे कैपिटल गेन टैक्स (LTCG/STCG), इंडेक्सेशन या डेट फंड्स पर पुरानी व्यवस्था की वापसी। हालांकि, डेरिवेटिव्स पर सिक्योरिटीज ट्रांजेक्शन टैक्स (STT) में भारी बढ़ोतरी की गई, जिसका असर बाजार और निवेशकों पर पड़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम सट्टेबाजी कम करने और लंबी अवधि के निवेश (जैसे SIP) को बढ़ावा देने वाला है।

बजट के प्रमुख ऐलान जो म्यूचुअल फंड निवेशकों से जुड़े

  • STT में बढ़ोतरी — फ्यूचर्स पर STT 0.02% से बढ़ाकर 0.05% किया गया। ऑप्शंस प्रीमियम पर 0.1% से 0.15% और एक्सरसाइज पर 0.125% से 0.15% कर दिया गया। यह 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा।
  • कोई बदलाव नहीं — इक्विटी म्यूचुअल फंड्स पर LTCG टैक्स 12.5% (1.25 लाख तक छूट), STCG 20% ही रहेगा। डेट फंड्स पर इंडेक्सेशन नहीं लौटा। डेट फंड्स अब भी स्लैब रेट पर टैक्स लगेगा।
  • कैपिटल एक्सपेंडिचर — 12.2 लाख करोड़ का बड़ा आउटले। बायोफार्मा SHAKTI मिशन जैसे सेक्टोरल फोकस से इक्विटी फंड्स को फायदा।
  • अन्य — कोई नई म्यूचुअल फंड स्कीम या निवेशकों के लिए विशेष इंसेंटिव नहीं।

यह बजट शॉर्ट-टर्म ट्रेडिंग पर लगाम लगाता है, जबकि लॉन्ग-टर्म SIP और डिसिप्लाइंड निवेश को मजबूत बनाता है।

विशेषज्ञों का विश्लेषण

विशेषज्ञों ने बजट को म्यूचुअल फंड निवेशकों के लिए “स्टे इन्वेस्टेड” वाली रणनीति के रूप में देखा है।

  • राजेश मिनोचा (CFP, फाउंडर – फाइनेंशियल रेडियंस) — बाजार हाई वैल्यूएशन, ग्लोबल अनिश्चितता और FII आउटफ्लो से प्रभावित है, लेकिन SIP से घरेलू निवेश मजबूत है। निवेशकों को मॉडरेट रिटर्न की उम्मीद रखनी चाहिए। लॉन्ग-टर्म वेल्थ क्रिएशन के लिए डायवर्सिफिकेशन, मार्केट डिसिप्लिन और अनुभव पर फोकस करें।
  • फिरोज अजीज (जॉइंट CEO, आनंद राठी वेल्थ) — STT बढ़ोतरी से डेरिवेटिव ट्रेडिंग कॉस्ट बढ़ेगी, वॉल्यूम घट सकता है और शॉर्ट-टर्म वोलेटिलिटी आएगी। ब्रोकरेज और हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडर्स पर असर, लेकिन सरकार को रेवेन्यू बढ़ेगा।
  • विकास सतिजा (MD & CEO, श्रीराम वेल्थ) — रिटर्न एसेट एलोकेशन, अर्निंग्स ग्रोथ और टाइम इन मार्केट से आएंगे, टैक्स आर्बिट्रेज से नहीं। क्वालिटी एसेट्स पर फोकस रखें और लॉन्ग-टर्म गोल्स के साथ पोर्टफोलियो बनाएं। बजट कंपाउंडिंग के लिए मजबूत बेस देता है।
  • राजीव राधाकृष्णन (CIO – फिक्स्ड इनकम, SBI म्यूचुअल फंड) — बॉन्ड मार्केट में ग्रॉस/नेट बॉरोइंग से यील्ड्स पर दबाव रहेगा। फिस्कल कंसॉलिडेशन अच्छा है, लेकिन शॉर्ट-टर्म में यील्ड्स ऊंचे रह सकते हैं।
  • अभिषेक भिलवरिया (AMFI रजिस्टर्ड MFD) — STT हाइक सट्टेबाजी रोकने का संकेत है, SIP जैसे लॉन्ग-टर्म कैपिटल फॉर्मेशन को बढ़ावा। कैपेक्स और बायोफार्मा मिशन से इक्विटी फंड्स को थीमेटिक टेलविंड। “स्टे इन्वेस्टेड” रणनीति अपनाएं।
  • अतुल शिंगल (फाउंडर & CEO, स्क्रिपबॉक्स) — फ्रिक्शनल कॉस्ट बढ़ने से शॉर्ट-टर्म स्पेकुलेशन घटेगा, नए ट्रेडर्स लॉन्ग-टर्म इक्विटी और म्यूचुअल फंड्स की ओर आएंगे। आर्बिट्रेज फंड्स के रिटर्न 0.20-0.40% सालाना कम हो सकते हैं।

म्यूचुअल फंड निवेशकों के लिए सलाह

  • इक्विटी फंड्स — शॉर्ट-टर्म वोलेटिलिटी संभव, लेकिन कैपेक्स और सेक्टोरल मिशन से पॉजिटिव। SIP जारी रखें।
  • डेट फंड्स — यील्ड्स ऊंचे रह सकते हैं, इंडेक्सेशन नहीं लौटा तो स्लैब रेट टैक्स ही।
  • हाइब्रिड/अन्य — क्वालिटी एसेट्स और रिस्क प्रोफाइल के अनुसार अलोकेशन।
  • कुल मिलाकर — स्पेकुलेशन कम करें, लॉन्ग-टर्म होल्ड और डायवर्सिफिकेशन पर जोर। मॉडरेट रिटर्न की उम्मीद रखें, लेकिन कंपाउंडिंग से वेल्थ बढ़ेगी।

यह बजट भारत की ग्रोथ स्टोरी को मजबूत करता है। निवेश से पहले फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह लें और अपनी रिस्क क्षमता देखें। लंबी अवधि में डिसिप्लाइंड निवेश सबसे अच्छा रास्ता है।

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