आईटीसी शेयर में 14% की भारी गिरावट: 2 दिनों में LIC के डूबे ₹11,460 करोड़!

लाइफ इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (LIC) को नए साल की शुरुआत में बड़ा झटका लगा है। आईटीसी लिमिटेड के शेयरों में महज दो दिनों में 14% की भारी गिरावट आई, जिससे LIC के निवेश में ₹11,460 करोड़ का नुकसान हुआ। यह गिरावट सरकार द्वारा सिगरेट और तंबाकू उत्पादों पर एक्साइज ड्यूटी बढ़ाने की घोषणा के बाद आई है। आईटीसी के सभी निवेशकों को कुल ₹72,300 करोड़ का नुकसान हुआ है।

टैक्स बढ़ोतरी क्यों आई? क्या है असर?

सरकार ने 1 फरवरी 2026 से सिगरेट पर नई टैक्स संरचना लागू करने की अधिसूचना जारी की है:

  • 1000 सिगरेट पर एक्साइज ड्यूटी ₹2,050 से बढ़ाकर ₹8,500 तक कर दी गई (सिगरेट की लंबाई के आधार पर)।
  • जीएसटी दर को 28% से बढ़ाकर 40% कर दिया गया।
  • पुरानी कम्पेंसेशन सेस की जगह नई बेसिक एक्साइज ड्यूटी लागू होगी।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस टैक्स बढ़ोतरी से सिगरेट की कीमत ₹2 से ₹5 प्रति सिगरेट तक बढ़ सकती है। इससे डिमांड घट सकती है और अवैध सिगरेट का बाजार बढ़ सकता है। आईटीसी के लिए यह बड़ा झटका है, क्योंकि कंपनी का सिगरेट सेगमेंट कुल रेवेन्यू का 48% से ज्यादा योगदान देता है।

ITC शेयर का हाल: 2 दिन में 14% गिरावट

  • 1 जनवरी 2026 (पहला ट्रेडिंग दिन): शेयर 10% गिरकर ₹363.85 पर बंद हुआ।
  • 2 जनवरी 2026: और 5% की गिरावट, इंट्राडे लो ₹345.25 पर पहुंचा (3 साल का सबसे निचला स्तर)।
  • कुल गिरावट: 14%
  • मार्केट कैप में नुकसान: ₹72,300 करोड़ (कुल मार्केट कैप अब करीब ₹4.38 लाख करोड़)।

शेयर पिछले 52 हफ्तों का नया लो बना चुका है। ब्रोकरेज फर्म्स जैसे नुवामा, मोतिलाल ओसवाल, जेफरीज ने रेटिंग डाउनग्रेड की और टारगेट प्राइस घटाया।

LIC की हिस्सेदारी और नुकसान

  • सितंबर 2025 तिमाही तक LIC के पास ITC में 15.86% हिस्सेदारी थी (करीब 19.86 करोड़ शेयर)।
  • गिरावट से LIC के निवेश मूल्य में ₹11,460 करोड़ का नॉशनल लॉस हुआ।
  • LIC का ITC में निवेश लंबे समय से स्थिर है (2017 से 15-16% के आसपास)।

ITC के अन्य निवेशक भी प्रभावित

  • जनरल इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (GIC): ₹1,254 करोड़ का नुकसान।
  • न्यू इंडिया एश्योरेंस: ₹1,018 करोड़ का नुकसान।
  • कुल सरकारी इंश्योरेंस कंपनियों का नुकसान: ₹13,740 करोड़

निवेशकों के लिए क्या मतलब?

नए साल की शुरुआत ITC शेयरहोल्डर्स के लिए अच्छी नहीं रही। टैक्स बढ़ोतरी से कंपनी की मार्जिन और वॉल्यूम पर दबाव आ सकता है। हालांकि, ITC ने पिछले सालों में डायवर्सिफिकेशन (FMCG, होटल, पेपरबोर्ड) किया है, जो लंबे समय में मदद कर सकता है।

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(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है। यह लेख सूचना के उद्देश्य से है। कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले विशेषज्ञ सलाह और अपनी रिसर्च जरूर करें।)

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