15 जनवरी 2026 को महाराष्ट्र में बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) समेत कई नगर निगम चुनावों के चलते भारतीय शेयर बाजार पूरी तरह बंद रहा। BSE और NSE दोनों एक्सचेंजों पर इक्विटी, डेरिवेटिव्स, करेंसी और अन्य सेगमेंट में कोई ट्रेडिंग नहीं हुई। सामान्य कारोबार 16 जनवरी से फिर शुरू होने की उम्मीद है।
यह छुट्टी आम तौर पर सरकारी घोषणा के तहत आती है, लेकिन इस बार इसने शेयर बाजार के बड़े नामों के बीच तीखी बहस छेड़ दी है। जीरोधा के संस्थापक और सीईओ नितिन कामत ने इस फैसले की खुलकर आलोचना की, जबकि हेलियोस कैपिटल के फाउंडर समीर अरोड़ा ने उनका मजबूती से जवाब दिया।
नितिन कामत ने कहा – “यह खराब योजना और ग्लोबल इमेज को नुकसान”
नितिन कामत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी प्रतिक्रिया में लिखा कि मुंबई जैसे बड़े शहर के स्थानीय चुनाव के लिए पूरे शेयर बाजार को बंद करना बेहद खराब प्लानिंग है। उन्होंने कहा कि भारतीय एक्सचेंज आज ग्लोबल मार्केट से पूरी तरह जुड़े हुए हैं, ऐसे में लोकल इलेक्शन जैसी वजह से ट्रेडिंग रोकना भारत के शेयर बाजार की विश्वसनीयता पर सवाल उठाता है।
उन्होंने दिवंगत दिग्गज निवेशक चार्ली मंगर का प्रसिद्ध कथन याद दिलाया – “मुझे इंसेंटिव दिखाओ, मैं तुम्हें रिजल्ट दिखाऊंगा।” कामत का कहना था कि यह छुट्टी इसलिए बनी हुई है क्योंकि जिन्हें इससे फर्क पड़ता है, उनके पास इसे चुनौती देने का कोई मजबूत प्रोत्साहन नहीं है। इस तरह के फैसले अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के बीच भारत को गंभीरता से लेने में अभी कितनी दूर जाना बाकी है, यह साफ दिखाते हैं।
समीर अरोड़ा का पलटवार – “तो फिर 1 जनवरी और बजट वाले रविवार पर क्या?”
समीर अरोड़ा ने नितिन कामत की पोस्ट पर तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए सवाल उठाया – अगर ऐसी छुट्टियां वाकई इतनी बड़ी समस्या हैं, तो असल में इससे सबसे ज्यादा नुकसान किसे होता है?
उन्होंने आगे कहा कि यही तर्क तब भी लागू होना चाहिए जब भारतीय बाजार ऐसे दिनों पर खुला रहता है, जब दुनिया के ज्यादातर बाजार बंद होते हैं। जैसे 1 जनवरी को भारत में ट्रेडिंग होती है, जबकि कई देशों में नया साल का अवकाश होता है।
अरोड़ा ने यहां तक कहा कि अगर अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन इतना महत्वपूर्ण है, तो 1 फरवरी 2026 (संघ बजट वाले रविवार) को बाजार खोलने पर भी यही सवाल क्यों नहीं उठता? क्योंकि उस दिन विदेशी निवेशक छुट्टी पर होंगे और भारतीय बाजार में उनकी भागीदारी सीमित रहेगी। इससे भी ग्लोबल निवेशकों के साथ असमानता पैदा होती है।
क्यों छिड़ी यह बहस? निवेशकों के लिए क्या मायने?
यह विवाद सिर्फ एक दिन की छुट्टी तक सीमित नहीं है। यह भारतीय शेयर बाजार की ग्लोबल छवि, स्थानीय परंपराओं और आधुनिक वित्तीय व्यवस्था के बीच संतुलन की बड़ी बहस को दर्शाता है। एक तरफ जहां नितिन कामत मानते हैं कि ऐसे फैसले भारत को “दूसरे दर्जे” का बाजार दिखाते हैं, वहीं समीर अरोड़ा का तर्क है कि बाजार की छुट्टियां हमेशा स्थानीय कैलेंडर पर आधारित होती हैं और इसमें कोई बड़ा अन्याय नहीं है।
कई निवेशकों का मानना है कि छोटे-मोटे कारणों से बाजार बंद करने से ट्रेडिंग में निरंतरता प्रभावित होती है, खासकर तब जब FII और DII दोनों सक्रिय रहते हैं। वहीं कुछ लोग इसे लोकतंत्र और स्थानीय अधिकारियों की प्राथमिकता मानते हैं।
निष्कर्ष
चाहे आप नितिन कामत की बात से सहमत हों या समीर अरोड़ा के तर्क को सही मानें, यह बहस साफ करती है कि भारतीय शेयर बाजार अब सिर्फ घरेलू नहीं रहा – यह पूरी दुनिया की नजरों में है। आने वाले समय में ऐसी छुट्टियों और छूट के नियमों पर और ज्यादा चर्चा होने वाली है।
क्या आपको लगता है कि स्थानीय चुनावों के लिए बाजार पूरी तरह बंद होना चाहिए या आधा दिन चलना बेहतर होगा? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं!
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