HDFC सिक्योरिटीज 9M FY26 रिजल्ट्स: कब रुकेगा कैपिटल मार्केट कमाई का तेज कंपाउंडिंग? (2020-2024 जैसा)

भारतीय कैपिटल मार्केट में 2020 से 2024 तक का दौर किसी पार्टी जैसा था। डीमैट अकाउंट्स की बाढ़ आई, ट्रेडिंग वॉल्यूम आसमान छूने लगे, IPO का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा था और डेरिवेटिव्स में रिटेल निवेशकों का जोश देखते ही बनता था। ब्रोकिंग कंपनियों की कमाई लगभग लीनियर तरीके से बढ़ती दिख रही थी – हर साल कंपाउंडिंग का कमाल!

लेकिन अब तस्वीर बदल रही है। HDFC सिक्योरिटीज के ताजा 9 महीने (9M FY26, यानी 31 दिसंबर 2025 तक) के नतीजे बताते हैं कि ये साइकिल बिजनेस है और अब नॉर्मलाइजेशन फेज शुरू हो चुका है। जहां पहले ग्रोथ आसान लगती थी, अब कमाई को कमाना पड़ रहा है।

9M FY26 में क्या हुआ? मुख्य आंकड़े एक नजर में

HDFC सिक्योरिटीज ने 9 महीने (अप्रैल-दिसंबर 2025) में ये परफॉर्मेंस दी:

  • ऑपरेशंस से रेवेन्यू: ₹2,257 करोड़ (पिछले साल की समान अवधि से ~10.5% कम, जो ₹2,521 करोड़ था)
  • प्रॉफिट बिफोर टैक्स (PBT): ₹884 करोड़ (करीब 24.1% की गिरावट)
  • प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT): ₹661 करोड़ (लगभग 24.3% डाउन)

सबसे ज्यादा असर पड़ा फीस एंड कमीशन इनकम पर, जो मार्केट से सबसे ज्यादा जुड़ा हुआ है:

  • फीस और कमीशन: ₹1,095 करोड़ (19.3% की भारी गिरावट)

इंटरेस्ट इनकम स्थिर रहा (करीब 2% कम), लेकिन ये कमी को भर नहीं पाया। साथ ही कर्मचारी खर्च बढ़ गए (30% ऊपर), जिसमें न्यू लेबर कोड से जुड़ी ₹29 करोड़ की एक बार की ग्रेच्युटी प्रोविजन भी शामिल है।

इसके चलते मार्जिन पर दबाव पड़ा:

  • ऑपरेटिंग मार्जिन: 46% से घटकर 39%
  • नेट प्रॉफिट मार्जिन: 35% से घटकर 29%

ये नंबर्स दिखाते हैं कि रेवेन्यू कम होने पर कॉस्ट कंट्रोल नहीं हुआ और ऑपरेटिंग लिवरेज उल्टा चल पड़ा।

2020-2024 का ‘पार्टी फेज’ और अब ‘हैंगओवर फेज’ क्यों?

2020-2024 में कई चीजें साथ आईं:

  • नए निवेशकों की भारी एंट्री
  • ट्रेडिंग वॉल्यूम और लीवरेज में उछाल
  • लगातार IPO फीवर
  • रिटेल का डेरिवेटिव्स में जोरदार रुझान

इन सबने ब्रोकिंग कंपनियों को हाई ग्रोथ कंपाउंडर बना दिया। लेकिन अब मार्केट मैच्योर हो रहा है:

  • वॉल्यूम ग्रोथ रेट धीमी पड़ रही है (हालांकि कुल लेवल अभी भी हाई है)
  • ब्रोकिंग में प्राइसिंग प्रेशर बढ़ा
  • टेक्नोलॉजी और कंप्लायंस कॉस्ट ऊपर
  • निवेशक अब सिर्फ ग्रोथ नहीं, ग्रोथ के साथ मार्जिन भी चाहते हैं

SEBI के F&O नियमों जैसे रेगुलेटरी चेंजेस ने भी ट्रेडिंग एक्टिविटी पर असर डाला है। नतीजा? फीस एंड कमीशन में गिरावट और प्रॉफिट में तेज कटौती।

HDFC सिक्योरिटीज की अनलिस्टेड वैल्यूएशन कैसी है?

अभी HDFC सिक्योरिटीज की अनलिस्टेड वैल्यूएशन करीब ₹16,800 करोड़ है। अगर FY26 में PAT ~₹900 करोड़ रहता है, तो फॉरवर्ड P/E लगभग 18.7x बनता है।

तुलना में लिस्टेड ब्रोकर Angel One का P/E करीब 29x चल रहा है। अनलिस्टेड होने की वजह से डिस्काउंट मिलता है – लिक्विडिटी कम, प्राइस डिस्कवरी मुश्किल और एग्जिट में समय लगता है। साथ ही ग्रोथ विजिबिलिटी अभी सॉफ्ट है, इसलिए मार्केट इसे हाई-ग्रोथ मोमेंटम ब्रोकर की तरह प्राइस नहीं कर रहा।

आगे क्या देखना चाहिए?

कैपिटल मार्केट बिजनेस अभी भी मजबूत फ्रैंचाइजी है, लेकिन अब ये ‘गारंटीड हाई ग्रोथ कंपाउंडर’ नहीं रहा। निवेशकों को इन बातों पर नजर रखनी चाहिए:

  • फीस एंड कमीशन में स्टेबलाइजेशन
  • कॉस्ट कंट्रोल और वन-ऑफ खर्चों का नॉर्मलाइजेशन
  • मार्जिन रिकवरी (क्या प्रॉफिट रेवेन्यू से तेज बाउंस करता है?)
  • मार्केट साइकिल से नए टेलविंड्स

अगर साइकिल वापस ऊपर घूमती है, तो मजबूत फ्रैंचाइजी वाली कंपनियां फिर चमक सकती हैं। लेकिन FY26 अभी ‘हैंगओवर फेज’ जैसा लग रहा है – जहां ग्रोथ को अब मेहनत से कमाना होगा, पहले की तरह ऑटोमैटिक नहीं मिलेगी।

कुल मिलाकर, HDFC सिक्योरिटीज एक सॉलिड प्ले है, लेकिन मार्केट इसे सही तरीके से डिस्काउंट कर रहा है। क्या ये स्लोअर ग्रोथ वाली स्ट्रॉन्ग कंपनी है जो साइकिल टर्न होने पर री-रेटिंग पाएगी? समय बताएगा।

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