नमस्ते दोस्तों! अगर आप पिछले कुछ महीनों से कमोडिटी मार्केट पर नजर रख रहे हैं, तो आपको पता होगा कि चांदी ने सबको हैरान कर दिया है। आज 19 जनवरी 2026 को MCX पर चांदी के फ्यूचर्स ने 3 लाख रुपये प्रति किलो का ऐतिहासिक स्तर पार कर लिया है। घरेलू बाजार में चांदी की कीमत ₹3,02,000 से ₹3,05,000 प्रति किलो के आसपास चल रही है, यानी प्रति ग्राम ₹302-305 के करीब। यह तेजी सिर्फ एक दिन की नहीं, बल्कि पूरी साल की शानदार परफॉर्मेंस का नतीजा है।
2026 में चांदी ETFs ने दिया शानदार रिटर्न
इस साल चांदी से जुड़े ETFs ने निवेशकों को खुश कर दिया है। ज्यादातर सिल्वर ETFs ने साल-दर-साल लगभग 30% तक का रिटर्न दिया है, जबकि 2025 में तो ये 100-160% तक के जबरदस्त रिटर्न दे चुके थे। इसका मतलब है कि जो लोग लंबे समय से चांदी में निवेश किए हुए थे, उनके लिए यह साल स्वर्ण से भी ज्यादा कमाई वाला साबित हुआ।
लेकिन सवाल यह है – क्या यह रैली अभी और चलेगी? या अब मुनाफा वसूलने का सही समय आ गया है?
चांदी की कीमत क्यों इतनी तेजी से बढ़ रही है?
इस रैली के पीछे कई मजबूत वजहें हैं:
- इंडस्ट्रियल डिमांड का धमाका – सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV), AI डेटा सेंटर्स और इलेक्ट्रॉनिक्स में चांदी की भारी खपत हो रही है। एक EV में पारंपरिक कार से ज्यादा चांदी लगती है।
- सप्लाई की कमी – ग्लोबल लेवल पर 2026 में 230 मिलियन औंस का डेफिसिट अनुमानित है। चीन की एक्सपोर्ट लाइसेंसिंग और माइनिंग में रुकावट ने स्टॉक को काफी कम कर दिया है।
- जियोपॉलिटिकल टेंशन – अमेरिका-यूरोप ट्रेड वॉर की आशंका, ट्रंप की ग्रीनलैंड वाली पॉलिसी और ईरान-वेनेजुएला जैसे इलाकों में तनाव ने चांदी को सेफ-हेवन एसेट बना दिया है।
- गोल्ड-सिल्वर रेशियो – अभी यह ऐतिहासिक औसत 50:1 के करीब है, यानी चांदी गोल्ड से ज्यादा तेजी दिखा रही है।
- डॉलर कमजोर होना और ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद ने भी कमाई को सपोर्ट किया है।
एक्सपर्ट्स क्या कह रहे हैं – बेचें या होल्ड करें?
एक्सपर्ट्स की राय बंटी हुई है:
- प्रॉफिट बुकिंग की सलाह – चॉइस ब्रोकिंग के आमिर मकड़ा कहते हैं कि डेली चार्ट पर RSI में बेयरिश डाइवर्जेंस दिख रहा है, जो मोमेंटम कमजोर होने का संकेत है। ऐसे में ऊपर के स्तर पर मुनाफा वसूलना स्मार्ट कदम होगा।
- लॉन्ग-टर्म बुलिश – कोटक म्यूचुअल फंड के सतीश डोंडापति का मानना है कि इंडस्ट्रियल मेटल के तौर पर चांदी का भविष्य बहुत मजबूत है। कुछ एनालिस्ट्स का टारगेट ₹3,62,000 (लगभग 20% ऊपर) तक है।
- शॉर्ट-टर्म रिस्क – HDFC सिक्योरिटीज का कहना है कि अगर यूनियन बजट में प्रेशियस मेटल्स पर ड्यूटी कम हुई, तो घरेलू कीमतों पर थोड़ा दबाव आ सकता है। सपोर्ट लेवल ₹2,55,000 (20-डे EMA) के आसपास है।
निवेशकों के लिए सलाह – क्या करें अभी?
अगर आप पहले से चांदी में निवेशित हैं और अच्छा मुनाफा हुआ है, तो आंशिक प्रॉफिट बुकिंग कर लें। लॉन्ग-टर्म के लिए चांदी का आउटलुक बहुत पॉजिटिव है, क्योंकि इंडस्ट्रियल और इन्वेस्टमेंट दोनों डिमांड मजबूत बनी रहेगी।
- नए निवेशक → अभी पूरे जोश में न कूदें, स्टैगर्ड तरीके से (SIP जैसा) एंट्री लें।
- ETFs के जरिए → फिजिकल चांदी के बजाय सिल्वर ETFs चुनें – ये सुरक्षित, आसान और लिक्विड हैं।
- रिस्क मैनेजमेंट → स्टॉप-लॉस जरूर रखें, क्योंकि कमोडिटी में उतार-चढ़ाव तेज होता है।
कुल मिलाकर, चांदी अब सिर्फ ज्वेलरी का मेटल नहीं रहा – यह एक स्ट्रॉन्ग इंडस्ट्रियल + इन्वेस्टमेंट एसेट बन चुका है। लेकिन हर रैली में सावधानी बरतना जरूरी है।
आपकी क्या राय है? क्या आप चांदी बेच रहे हैं या और ऊपर का इंतजार कर रहे हैं? कमेंट में जरूर बताएं!
(नोट: यह जानकारी केवल शैक्षिक उद्देश्य से है। निवेश से पहले अपने फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह जरूर लें।)
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