1 फरवरी 2026 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने यूनियन बजट 2026-27 पेश किया। इसमें डेरिवेटिव्स (F&O) सेगमेंट पर सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) में काफी बढ़ोतरी का ऐलान किया गया है। यह बदलाव 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा। इससे फ्यूचर्स और ऑप्शंस ट्रेडिंग महंगी हो जाएगी, जबकि इक्विटी डिलीवरी और म्यूचुअल फंड पर STT दरें पहले जैसी ही रहेंगी।
सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) क्या है?
STT एक प्रकार का लेन-देन आधारित कर है, जो स्टॉक एक्सचेंज पर ट्रेड होने वाली निर्दिष्ट सिक्योरिटीज (शेयर, डेरिवेटिव्स आदि) की खरीद-बिक्री पर लगता है। यह लाभ पर नहीं, बल्कि ट्रांजैक्शन वैल्यू पर लगाया जाता है। ब्रोकर या एक्सचेंज खुद ही यह टैक्स काटकर सरकार को जमा कर देते हैं। STT का मुख्य उद्देश्य बाजार में पारदर्शिता लाना और राजस्व जुटाना है।
बजट 2026 में STT की नई दरें (1 अप्रैल 2026 से)
सरकार ने केवल डेरिवेटिव्स पर STT बढ़ाया है। पुरानी और नई दरों की तुलना इस प्रकार है:
- फ्यूचर्स (Futures) की बिक्री: पुरानी दर 0.02% → नई दर 0.05% (150% की बढ़ोतरी)
- ऑप्शंस (Options) का प्रीमियम: पुरानी दर 0.1% → नई दर 0.15% (50% की बढ़ोतरी)
- ऑप्शंस एक्सरसाइज (जब ऑप्शन एक्सरसाइज होता है): पुरानी दर 0.125% → नई दर 0.15% (20% की बढ़ोतरी)
अन्य सेगमेंट में कोई बदलाव नहीं:
- इक्विटी डिलीवरी (खरीद/बिक्री): 0.1%
- इंट्राडे (नॉन-डिलीवरी): 0.025% (बिक्री पर)
- इक्विटी म्यूचुअल फंड यूनिट्स: 0.001%
F&O ट्रेडर्स और निवेशकों पर क्या असर पड़ेगा?
- ट्रेडिंग लागत बढ़ेगी: हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडर्स और रिटेल F&O प्लेयर्स पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा। हर ट्रेड पर ज्यादा टैक्स कटेगा, जिससे नेट प्रॉफिट कम हो सकता है।
- स्पेकुलेटिव ट्रेडिंग कम होगी: सरकार का कहना है कि F&O सेगमेंट में ट्रांजैक्शन वॉल्यूम भारतीय GDP से 500 गुना ज्यादा है। यह बढ़ोतरी स्पेकुलेशन को रोकने और सिस्टेमिक रिस्क कम करने के लिए है। रेवेन्यू सेक्रेटरी ने कहा कि इसका मकसद छोटे निवेशकों को नुकसान से बचाना है।
- लॉन्ग-टर्म निवेशकों को राहत: इक्विटी डिलीवरी या होल्ड करने वाले निवेशकों पर कोई असर नहीं। BSE CEO ने कहा कि इससे लोग लॉन्ग-टर्म इक्विटी निवेश की ओर बढ़ेंगे और बाजार में स्थिरता आएगी।
- मार्केट रिएक्शन: बजट के बाद सेंसेक्स और निफ्टी में भारी गिरावट आई (सेंसेक्स 1800+ पॉइंट्स गिरा), क्योंकि ट्रेडर्स ने इसे नेगेटिव माना।
सरकार की मंशा क्या है?
वित्त मंत्रालय का मानना है कि अत्यधिक स्पेकुलेशन से रिटेल निवेशकों को नुकसान होता है और बाजार में रिस्क बढ़ता है। यह कदम राजस्व बढ़ाने से ज्यादा स्पेकुलेटिव एक्टिविटी कंट्रोल करने के लिए है। इससे रिटेल कैपिटल प्रोडक्टिव इन्वेस्टमेंट (जैसे मैन्युफैक्चरिंग, इक्विटी होल्डिंग) की ओर जा सकता है।
निष्कर्ष
बजट 2026 में STT हाइक से F&O ट्रेडिंग महंगी हो गई है, लेकिन यह लॉन्ग-टर्म निवेशकों के लिए न्यूट्रल है। अगर आप फ्रीक्वेंट F&O ट्रेडर हैं, तो अब ट्रेडिंग स्ट्रैटेजी रिव्यू करें – कम ट्रेड्स, बेहतर रिस्क मैनेजमेंट पर फोकस करें। वहीं, डिलीवरी बेस्ड निवेशक बेफिक्र रह सकते हैं। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि यह बदलाव बाजार को ज्यादा स्थिर और हेल्दी बनाने की दिशा में एक कदम है।
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