बजट 2026: आयकर स्लैब में कोई बदलाव नहीं! नई vs पुरानी टैक्स रिजीम के स्लैब, 80C छूट और बड़े अपडेट्स

बजट 2026 में आयकर स्लैब पर कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आयकर दरों और स्लैब को जस का तस रखा है, जिससे मध्यम वर्ग के करदाताओं को स्लैब में कोई अतिरिक्त राहत नहीं मिली। हालांकि, नए आयकर अधिनियम 2025 को 1 अप्रैल 2026 से लागू करने का ऐतिहासिक फैसला लिया गया है, जो टैक्स सिस्टम को सरल और पारदर्शी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

यहां हम नई टैक्स रिजीम और पुरानी टैक्स रिजीम के वर्तमान स्लैब, प्रमुख बदलाव, सेक्शन 80C जैसी छूट और अन्य महत्वपूर्ण अपडेट्स की विस्तार से जानकारी दे रहे हैं। यह जानकारी बजट 2026 की घोषणाओं पर आधारित है।

नई टैक्स रिजीम (डिफॉल्ट विकल्प) – FY 2026-27 के लिए स्लैब

नई रिजीम अब ज्यादातर करदाताओं के लिए डिफॉल्ट है, क्योंकि इसमें कम दरें और सरलता है। बजट में इसमें कोई फेरबदल नहीं किया गया।

  • ₹0 से ₹4 लाख तक: 0% (कोई टैक्स नहीं)
  • ₹4 लाख से ₹8 लाख तक: 5%
  • ₹8 लाख से ₹12 लाख तक: 10%
  • ₹12 लाख से ₹16 लाख तक: 15%
  • ₹16 लाख से ₹20 लाख तक: 20%
  • ₹20 लाख से ₹24 लाख तक: 25%
  • ₹24 लाख से अधिक: 30%

खास बात: धारा 87A के रिबेट के कारण ₹12 लाख तक की आय पर प्रभावी रूप से कोई टैक्स नहीं लगता। वेतनभोगी लोगों के लिए ₹75,000 का स्टैंडर्ड डिडक्शन मिलने से यह सीमा ₹12.75 लाख तक पहुंच जाती है। यानी सैलरीड क्लास के लिए यह काफी फायदेमंद बना हुआ है।

पुरानी टैक्स रिजीम – अभी भी उपलब्ध (ऑप्ट इन करके)

पुरानी रिजीम में कोई बदलाव नहीं हुआ। यहां विभिन्न डिडक्शन और छूट मिलती हैं, जैसे:

  • ₹0 से ₹2.5 लाख तक: 0%
  • ₹2.5 लाख से ₹5 लाख तक: 5%
  • ₹5 लाख से ₹10 लाख तक: 20%
  • ₹10 लाख से अधिक: 30%

लाभ: सेक्शन 80C (₹1.5 लाख तक – PPF, ELSS, PF आदि), 80D (हेल्थ इंश्योरेंस), होम लोन ब्याज (सेक्शन 24b – ₹2 लाख तक), HRA, LTA जैसी छूट मिलती हैं। लेकिन ज्यादातर लोग अब नई रिजीम चुन रहे हैं, क्योंकि छूट लेने पर भी टैक्स ज्यादा पड़ता है।

बजट 2026 में आयकर से जुड़े प्रमुख अपडेट्स

  • नया आयकर अधिनियम 2025: 1 अप्रैल 2026 से लागू। पुराने कानून की जगह लेगा, धाराओं की संख्या 819 से घटाकर 536 की गई। टैक्स प्रक्रिया सरल बनी।
  • सेक्शन 80C की लिमिट: अभी भी ₹1.5 लाख पर स्थिर। कोई बढ़ोतरी नहीं हुई।
  • स्टैंडर्ड डिडक्शन: नई रिजीम में ₹75,000, पुरानी में ₹50,000 – कोई बदलाव नहीं।
  • TCS में राहत: विदेश यात्रा, पढ़ाई और इलाज के लिए TCS दर 5-20% से घटाकर 2% कर दी गई। इससे विदेश जाने वाले छात्रों और परिवारों को फायदा।
  • शेयर बायबैक: अब कैपिटल गेन के रूप में टैक्स लगेगा (LTCG 12.5%, STCG 20%)।
  • F&O ट्रेडिंग: STT बढ़ाई गई – फ्यूचर्स पर 0.02% से 0.05%, ऑप्शंस पर 0.1% से 0.15%।
  • रिवाइज्ड ITR की समय सीमा: 31 मार्च तक बढ़ाई गई।
  • विदेशी संपत्ति योजना: छोटे करदाताओं के लिए विशेष स्कीम, ₹1 करोड़ तक पर 30% टैक्स देकर माफी का प्रावधान।

नई vs पुरानी रिजीम – कौन सी बेहतर?

अगर आपकी आय ₹12 लाख तक है और ज्यादा निवेश/छूट नहीं लेते, तो नई रिजीम चुनना फायदेमंद है। ज्यादा डिडक्शन (80C, होम लोन आदि) वाले लोग पुरानी रिजीम चुन सकते हैं। लेकिन आंकड़ों के मुताबिक अब 70-90% करदाता नई रिजीम में शिफ्ट हो चुके हैं।

बजट 2026 में स्लैब बढ़ोतरी की उम्मीदें अधूरी रहीं, लेकिन TCS कटौती और नए कानून से कुल मिलाकर टैक्स सिस्टम सरल और कुछ हद तक राहत देने वाला बना। अगर आपकी सैलरी या बिजनेस इनकम है, तो कैलकुलेटर से दोनों रिजीम में टैक्स कंपेयर जरूर करें।

संघ बजट 2026: म्यूचुअल फंड निवेशकों के लिए STT बढ़ोतरी का प्रभाव, SIP पर क्या असर? विशेषज्ञ विश्लेषण

बजट 2026 के बाद STT में बढ़ोतरी: सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स क्या है और F&O ट्रेडर्स-निवेशकों पर क्या असर पड़ेगा?

बजट 2026 में शेयर बायबैक पर बड़ा बदलाव: अब कैपिटल गेन के रूप में टैक्स, प्रमोटर्स पर 22% और 30% प्रभावी दर

Leave a Comment