1 फरवरी 2026 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश यूनियन बजट 2026 के बाद शेयर बाजार में विशेष रविवार सत्र में सरकारी बैंकों (PSU Banks) के शेयरों में भारी बिकवाली देखी गई। निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्स 5.6% तक टूट गया, जबकि कई प्रमुख बैंक शेयर 9% तक गिर गए। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI), केनरा बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, इंडियन बैंक और बैंक ऑफ इंडिया जैसे बड़े नामों ने सबसे ज्यादा नुकसान झेला। आइए समझते हैं इस गिरावट के पीछे की मुख्य वजहें क्या थीं।
मुख्य कारण: रिकॉर्ड सरकारी उधार और बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी का डर
बजट में सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए बाजार से 17.2 लाख करोड़ रुपये का रिकॉर्ड उधार (Borrowing) लेने की घोषणा की। यह पिछले वर्षों से काफी ज्यादा है। इतनी बड़ी मात्रा में सरकारी बॉन्ड जारी होने से बॉन्ड यील्ड (ब्याज दरें) में उछाल आने का अनुमान लगाया गया।
पीएसयू बैंकों के पास अपने ट्रेजरी पोर्टफोलियो में बड़ी संख्या में सरकारी बॉन्ड होते हैं। जब यील्ड बढ़ती है, तो पुराने बॉन्ड की कीमत गिरती है, जिससे बैंकों को मार्क-टू-मार्केट (MTM) लॉस होता है। यह सीधे उनकी बैलेंस शीट और मुनाफे पर असर डालता है।
बजट दिवस पर बॉन्ड और करेंसी मार्केट बंद थे, लेकिन इक्विटी मार्केट खुला था। इसलिए निवेशकों ने इस ट्रेजरी रिस्क को पहले से ही प्राइस इन कर लिया और पीएसयू बैंक शेयरों में आक्रामक बिकवाली की। सोमवार को बॉन्ड मार्केट खुलने पर यील्ड की असली तस्वीर सामने आएगी, लेकिन शुरुआती रिएक्शन में गिरावट तेज रही।
प्रमुख पीएसयू बैंक शेयरों का प्रदर्शन
- बैंक ऑफ इंडिया: लगभग 9% गिरकर 150 रुपये के स्तर पर बंद
- इंडियन बैंक: 8% की गिरावट
- बैंक ऑफ बड़ौदा और बैंक ऑफ महाराष्ट्र: 6.9% और 6.5% नीचे
- यूनियन बैंक ऑफ इंडिया: 6.3% की कमी
- एसबीआई और केनरा बैंक: दोनों में 5% के आसपास गिरावट
- पंजाब नेशनल बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन ओवरसीज बैंक: 3% के आसपास नुकसान
- यूको बैंक: सबसे कम 2.5% की गिरावट
यह गिरावट पूरे सेक्टर में फैली हुई थी, जिससे निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्स सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ।
अन्य फैक्टर जो बाजार पर असर डाल रहे थे
बजट में कैपिटल एक्सपेंडिचर को 12.2 लाख करोड़ रुपये तक बढ़ाया गया, जो इंफ्रास्ट्रक्चर ग्रोथ के लिए सकारात्मक है। फिस्कल डेफिसिट 4.4% पर रखा गया, जो फिस्कल कंसॉलिडेशन दिखाता है। लेकिन पीएसयू बैंकों के लिए कोई सीधी राहत जैसे रीकैपिटलाइजेशन, प्रायोरिटी सेक्टर लेंडिंग में बदलाव या स्पेशल प्रोविजन नहीं आए।
कुछ एनालिस्ट्स का मानना है कि हाई गवर्नमेंट बॉरोइंग से लिक्विडिटी पर दबाव पड़ सकता है, जो लंबे समय में बैंकिंग सेक्टर के लिए चैलेंज बन सकता है। हालांकि, इंफ्रा स्पेंडिंग से इकोनॉमी में ग्रोथ बढ़ेगी, जो अप्रत्यक्ष रूप से क्रेडिट डिमांड बढ़ा सकती है।
आगे क्या?
यह गिरावट मुख्य रूप से शॉर्ट-टर्म रिएक्शन थी। बॉन्ड यील्ड की मूवमेंट और RBI की पॉलिसी पर नजर रखनी होगी। अगर यील्ड कंट्रोल में रहती हैं, तो पीएसयू बैंक शेयर रिकवर कर सकते हैं। लॉन्ग-टर्म में सरकारी बैंकों के मजबूत फंडामेंटल्स और इकोनॉमिक ग्रोथ से फायदा मिल सकता है।
निवेशकों को सलाह है कि बाजार की वोलेटिलिटी को ध्यान में रखते हुए रिसर्च के आधार पर फैसला लें। बजट के बाद का यह रिएक्शन अक्सर ओवर-रिएक्ट होता है, लेकिन असली असर आने वाले दिनों में साफ होगा।
(नोट: यह जानकारी सार्वजनिक स्रोतों और बाजार विश्लेषण पर आधारित है। निवेश से पहले विशेषज्ञ सलाह लें।)
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