ARBITRAGE FUND के रिटर्न में अगले साल लगभग 0.5% की गिरावट आएगी: बढ़ी हुई STT के कारण – दीपक शेनॉय

यूनियन बजट 2026 में फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण द्वारा सिक्योरिटीज ट्रांजेक्शन टैक्स (STT) में की गई बढ़ोतरी ने मार्केट में हलचल मचा दी है। खासकर आर्बिट्राज म्यूचुअल फंड्स के निवेशकों के लिए यह खबर चिंता का विषय बन गई है। कैपिटलमाइंड एसेट मैनेजमेंट के सीईओ दीपक शेनॉय ने अनुमान लगाया है कि इस STT बढ़ोतरी के चलते आर्बिट्राज फंड्स के रिटर्न में अगले साल करीब 0.5% की कमी आ सकती है।

STT में क्या बदलाव हुआ?

बजट 2026 में डेरिवेटिव्स (F&O) सेगमेंट पर STT को काफी बढ़ाया गया है। मुख्य बदलाव इस प्रकार हैं:

  • फ्यूचर्स पर STT: पहले 0.02% था, अब बढ़कर 0.05% हो गया (150% की बढ़ोतरी)।
  • ऑप्शंस प्रीमियम पर STT: 0.10% से बढ़ाकर 0.15%
  • ऑप्शंस एक्सरसाइज पर STT: 0.125% से बढ़ाकर 0.15%

ये बदलाव 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगे। सरकार का मकसद F&O में अत्यधिक स्पेकुलेटिव ट्रेडिंग को कंट्रोल करना और रेवेन्यू बढ़ाना है। कैश इक्विटी ट्रेड्स पर STT में कोई बदलाव नहीं किया गया।

आर्बिट्राज फंड्स पर असर क्यों पड़ रहा है?

आर्बिट्राज फंड्स स्टॉक मार्केट में कैश (स्पॉट) और फ्यूचर्स मार्केट के बीच की कीमत के अंतर का फायदा उठाकर रिटर्न कमाते हैं। ये फंड्स लो-रिस्क माने जाते हैं और शॉर्ट-टर्म मनी पार्किंग के लिए पॉपुलर हैं। इनकी स्ट्रैटेजी में फ्यूचर्स मार्केट में भारी ट्रेडिंग होती है।

दीपक शेनॉय के अनुसार:

  • फ्यूचर्स मार्केट में सबसे बड़े प्लेयर आर्बिट्राज फंड्स ही हैं।
  • STT बढ़ने से ट्रांजेक्शन कॉस्ट बढ़ जाती है, जो इन फंड्स की पतली मार्जिन पर सीधा असर डालती है।
  • नतीजा: निवेशकों को मिलने वाले नेट रिटर्न में लगभग 0.5% की सालाना गिरावट आ सकती है।

वे आगे कहते हैं कि रिटेल निवेशकों पर इसका ज्यादा असर नहीं पड़ेगा, लेकिन आर्बिट्राज फंड्स और कुछ FPIs (फॉरेन पोर्टफोलियो इनवेस्टर्स) पर बोझ बढ़ेगा। FPIs के लिए फ्यूचर्स से स्टॉक कन्वर्ट करने की कॉस्ट में करीब 4 बेसिस पॉइंट्स (0.04%) का इजाफा होगा।

अन्य एक्सपर्ट्स की राय

  • स्क्रिपबॉक्स के फाउंडर अतुल शिंगल के मुताबिक, आर्बिट्राज ऑपर्च्युनिटी कम होने से फंड्स के रिटर्न में 0.20% से 0.40% तक की सालाना कमी आ सकती है।
  • कई एक्सपर्ट्स मानते हैं कि यह बदलाव F&O वॉल्यूम को कम कर सकता है, जिससे ब्रोकरेज और एक्सचेंज कंपनियों पर भी असर पड़ेगा। हालांकि, लॉन्ग-टर्म इक्विटी इनवेस्टमेंट को बढ़ावा मिल सकता है।

निवेशकों के लिए क्या मतलब?

  • अगर आप आर्बिट्राज फंड्स में निवेश करते हैं तो अगले साल से रिटर्न थोड़े कम हो सकते हैं, लेकिन ये फंड्स अभी भी टैक्स-एफिशिएंट और लो-रिस्क बने रहेंगे।
  • रिटेल निवेशकों के लिए डायरेक्ट असर न के बराबर है।
  • शॉर्ट-टर्म फंड्स की तुलना में FD या अन्य ऑप्शंस पर विचार करें अगर रिटर्न में बड़ा फर्क लगे।
  • लॉन्ग-टर्म इनवेस्टर्स के लिए यह बदलाव ज्यादा प्रॉब्लेम नहीं बनेगा।

यह STT बढ़ोतरी मार्केट में बैलेंस लाने की कोशिश है, लेकिन आर्बिट्राज फंड्स जैसे लो-रिस्क प्रोडक्ट्स पर इसका सीधा प्रभाव दिख रहा है। निवेश से पहले लेटेस्ट NAV और एक्सपर्ट एडवाइस जरूर लें।

(नोट: मार्केट रिस्क सब्जेक्ट टू है। निवेश से पहले फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह लें।)

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