पिछले कुछ समय में सोना और चांदी की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखा गया है। भारत में निवेशक इन कीमती धातुओं में एक्सपोजर पाने के लिए गोल्ड ETF, सिल्वर ETF और उनके आधार पर बने फंड ऑफ फंड्स (FOF) की ओर रुख कर रहे हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या ये FOF वाकई अपने अंडरलाइंग ETF और असली सोने-चांदी की कीमतों को परफेक्टली ट्रैक करते हैं? हालिया डेटा और एनालिसिस बताते हैं कि परफेक्ट मिररिंग नहीं होती, बल्कि रिटर्न में काफी अंतर आ सकता है।
FOF क्या हैं और क्यों लोकप्रिय हुए?
गोल्ड और सिल्वर FOF ऐसे म्यूचुअल फंड हैं जो सीधे गोल्ड या सिल्वर ETF में निवेश करते हैं। ये रिटेल निवेशकों के लिए बहुत सुविधाजनक हैं क्योंकि:
- डीमैट अकाउंट की जरूरत नहीं पड़ती।
- SIP के जरिए आसानी से निवेश कर सकते हैं।
- फिजिकल गोल्ड/सिल्वर की तरह स्टोरेज, सिक्योरिटी या मेकिंग चार्ज की टेंशन नहीं।
थ्योरी में FOF को अपने ETF के रिटर्न को क्लोजली फॉलो करना चाहिए, और ETF घरेलू सोने-चांदी की कीमतों को ट्रैक करते हैं। लेकिन प्रैक्टिस में ऐसा नहीं होता।
रिटर्न में कितना अंतर आया? (फरवरी 2026 तक के आंकड़े)
हाल के एक साल (फरवरी 2025 से फरवरी 2026 तक) में:
- घरेलू सोने की कीमतें करीब 77.5% बढ़ीं। गोल्ड ETF ने भी लगभग यही रिटर्न दिया।
- लेकिन गोल्ड FOF के रिटर्न 72% से 78% के बीच रहे। यानी कुछ FOF में 5-6% तक का गैप।
- चांदी की कीमतें 155% तक उछलीं, सिल्वर ETF ने इसे अच्छे से कैप्चर किया।
- सिल्वर FOF के रिटर्न 147% से 157% रहे। यहां गैप 8% तक पहुंचा।
पिछले दो सालों के रोलिंग वन-ईयर रिटर्न एनालिसिस से पता चलता है कि औसतन FOF ETF से 1.4% कम रिटर्न देते हैं। तेज रैली के दौरान यह अंतर और बढ़ जाता है।
रिटर्न में अंतर आने के मुख्य कारण
- ट्रैकिंग एरर और प्राइसिंग इनएफिशिएंसी FOF ETF यूनिट्स को मार्केट क्लोज के आसपास (3:10 से 3:30 PM) खरीदते हैं, जहां प्रीमियम/डिस्काउंट हो सकता है। ETF का NAV क्लोजिंग प्राइस पर आधारित होता है, लेकिन बड़े ट्रेड्स से टेम्पररी डिस्टॉर्शन आ जाता है।
- टाइमिंग इश्यू FOF में 3 PM कट-ऑफ होता है, ट्रांजेक्शन मार्केट क्लोज के बाद होता है। छोटे ETF में लिक्विडिटी कम होने से प्राइस में टेम्पररी गैप आता है।
- डबल एक्सपेंस रेशियो ETF का TER आमतौर पर 0.3-0.8% (गोल्ड) और 0.33-0.58% (सिल्वर) होता है। FOF में अतिरिक्त 0.35-1% चार्ज लगता है। ये डबल लेयर कॉस्ट रिटर्न खा जाता है।
- कैश ड्रैग और रिवर्स कंपाउंडिंग कैश होल्डिंग कम (0.2-0.8%) है, लेकिन प्रीमियम पर खरीदने से कम यूनिट्स मिलती हैं। तेज बुल रन में कंपाउंडिंग का नुकसान ज्यादा होता है। उदाहरण: 2% प्रीमियम पर खरीदने से रिटर्न में बड़ा फर्क पड़ सकता है।
ETF vs FOF: कौन बेहतर?
- ETF चुनें अगर: आपके पास डीमैट अकाउंट है, कम कॉस्ट और बेहतर ट्रैकिंग चाहिए। लिक्विड, बड़े कॉर्पस वाले ETF (कम ट्रैकिंग एरर, कम एक्सपेंस) चुनें।
- FOF चुनें अगर: आसान SIP, कोई डीमैट नहीं, रिटेल निवेशक हैं। लेकिन अंडरलाइंग ETF लिक्विड हो, ट्रैकिंग डिफरेंस चेक करें।
कुछ अच्छे गोल्ड FOF: निप्पॉन इंडिया गोल्ड सेविंग्स, SBI गोल्ड फंड, HDFC गोल्ड ETF FOF। सिल्वर FOF: निप्पॉन इंडिया सिल्वर ETF FOF, HDFC सिल्वर FOF, UTI सिल्वर ETF FOF
निवेशकों के लिए सलाह
कीमती धातुओं में निवेश पोर्टफोलियो डाइवर्सिफिकेशन और हेज के लिए अच्छा है, लेकिन FOF में ETF से थोड़ा कम रिटर्न मिल सकता है। हमेशा फंड चुनते समय लिक्विडिटी, एक्सपेंस रेशियो, ट्रैकिंग एरर और पिछले 1-2 साल के ETF vs FOF डिफरेंस देखें। तेज रैली में FOF का गैप ज्यादा होता है, इसलिए लॉन्ग-टर्म और अनुशासित निवेश बेहतर।
अगर आप सोना-चांदी में निवेश कर रहे हैं, तो अपनी जरूरत के हिसाब से ETF या FOF चुनें और नियमित रूप से पोर्टफोलियो रिव्यू करें। इससे आप ज्यादा बेहतर रिटर्न हासिल कर सकते हैं!
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