मिराए एसेट म्यूचुअल फंड ने हाल ही में मिराए एसेट निफ्टी मेटल ETF फंड ऑफ फंड (FOF) लॉन्च किया है। यह एक नया फंड ऑफर (NFO) है, जो निवेशकों को भारत के मेटल और माइनिंग सेक्टर में पैसिव तरीके से निवेश का मौका देता है। यह स्कीम विशेष रूप से उन निवेशकों के लिए उपयोगी है जो मेटल सेक्टर की ग्रोथ से फायदा उठाना चाहते हैं, लेकिन डायरेक्ट स्टॉक चुनने की बजाय डाइवर्सिफाइड एक्सपोजर चाहते हैं।
स्कीम का उद्देश्य और विशेषताएं
यह ओपन-एंडेड फंड ऑफ फंड स्कीम है, जो मुख्य रूप से मिराए एसेट निफ्टी मेटल ETF के यूनिट्स में निवेश करती है। इसका लक्ष्य लॉन्ग टर्म कैपिटल एप्रिसिएशन प्रदान करना है, जो निफ्टी मेटल टोटल रिटर्न इंडेक्स के प्रदर्शन के अनुरूप हो।
निफ्टी मेटल इंडेक्स में भारत की प्रमुख मेटल कंपनियां शामिल हैं, जैसे स्टील, एल्युमिनियम, कॉपर, जिंक और माइनिंग से जुड़ी फर्में। यह इंडेक्स फ्री-फ्लोट मार्केट कैपिटलाइजेशन वेटेड है और इसमें 15 कंपनियां शामिल हैं, जो फेरस (लोहा-स्टील) और नॉन-फेरस (एल्युमिनियम, कॉपर आदि) दोनों सेगमेंट को कवर करती हैं। प्रमुख कंपनियां जैसे JSW Steel, Tata Steel, Hindalco, Vedanta आदि इसमें शामिल हो सकती हैं।
यह पैसिव फंड है, इसलिए ट्रैकिंग एरर के अधीन निफ्टी मेटल इंडेक्स को फॉलो करता है। फंड मैनेजर Ekta Gala और Akshay Udeshi हैं।
NFO की डिटेल्स
- NFO ओपन डेट: 10 फरवरी 2026
- NFO क्लोज डेट: 23 फरवरी 2026
- कंटीन्यूअस सब्सक्रिप्शन/रिडेम्पशन: 27 फरवरी 2026 से शुरू
- मिनिमम निवेश (NFO में): ₹5,000 (और उसके बाद ₹1 के मल्टीपल में)
- ऑफर प्राइस: ₹10 प्रति यूनिट
- रिस्क लेवल: बहुत उच्च (Very High) – क्योंकि मेटल सेक्टर साइक्लिकल है
- बेंचमार्क: Nifty Metal Total Return Index
मेटल सेक्टर की मौजूदा स्थिति और संभावनाएं
2025 में निफ्टी मेटल इंडेक्स ने शानदार प्रदर्शन किया, लगभग 27% की बढ़ोतरी के साथ रिकॉर्ड हाई छुआ। मजबूत कमाई की उम्मीदें, फर्म मेटल प्राइसेज, इंफ्रास्ट्रक्चर स्पेंडिंग और एनर्जी ट्रांजिशन (जैसे इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, रिन्यूएबल एनर्जी) से जुड़ी डिमांड ने इसे बूस्ट दिया।
हालांकि, 2026 की शुरुआत में कुछ गिरावट देखी गई है (ग्लोबल टैरिफ, प्रॉफिट बुकिंग और बेस मेटल प्राइसेज में कमजोरी के कारण), लेकिन लॉन्ग टर्म में भारत की इंफ्रास्ट्रक्चर ग्रोथ, मैन्युफैक्चरिंग पुश (मेक इन इंडिया) और ग्लोबल कमोडिटी सुपर-साइकल की संभावना सेक्टर को सपोर्ट कर सकती है।
मेटल सेक्टर सेंसिटिव होता है – कमोडिटी प्राइस स्विंग्स, ग्लोबल ट्रेड पॉलिसी, सप्लाई चेन इश्यूज और डोमेस्टिक इंडस्ट्रियल डिमांड से प्रभावित होता है। इसलिए, यह हाई रिस्क-हाई रिटर्न कैटेगरी है।
निवेश क्यों करें?
- डाइवर्सिफिकेशन: मेटल सेक्टर में एक्सपोजर के लिए आसान तरीका, खासकर अगर आपका पोर्टफोलियो इक्विटी में बैलेंस्ड है।
- पैसिव इन्वेस्टिंग: कम एक्सपेंस रेशियो (अंडरलाइंग ETF का ~0.30-0.32%) के साथ इंडेक्स ट्रैकिंग।
- ग्रोथ पोटेंशियल: भारत की इकोनॉमी में इंफ्रा, ऑटो, पावर और EV सेक्टर की वजह से मेटल्स की डिमांड बढ़ रही है।
- म्यूचुअल फंड फॉर्मेट: ETF में डायरेक्ट ट्रेडिंग की बजाय SIP/लंपसम के जरिए आसानी से निवेश संभव।
ध्यान देने योग्य बातें और रिस्क
- डबल एक्सपेंस: FOF होने से अंडरलाइंग ETF के साथ अतिरिक्त एक्सपेंस रेशियो लग सकता है।
- वोलेटिलिटी: सेक्टर साइक्लिकल है, ग्लोबल इकोनॉमिक स्लोडाउन या कमोडिटी क्रैश से नुकसान हो सकता है।
- कोई एग्जिट लोड या स्पेसिफिक एक्सपेंस रेशियो NFO डिटेल्स में स्पष्ट नहीं, SID चेक करें।
- टैक्सेशन: इक्विटी फंड की तरह (लॉन्ग टर्म >1 साल: 12.5% LTCG ₹1.25 लाख से ऊपर)।
अगर आप लॉन्ग टर्म (5+ साल) के लिए हाई ग्रोथ सेक्टर में एक्सपोजर चाहते हैं, तो यह NFO विचार करने लायक है। लेकिन निवेश से पहले अपनी रिस्क टॉलरेंस, फाइनेंशियल गोल्स और पोर्टफोलियो बैलेंस चेक करें। अधिक जानकारी के लिए मिराए एसेट की ऑफिशियल वेबसाइट या फाइनेंशियल एडवाइजर से संपर्क करें।
नोट: म्यूचुअल फंड निवेश बाजार जोखिम के अधीन हैं। पढ़ें स्कीम इंफॉर्मेशन डॉक्यूमेंट सावधानी से।
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