शंघाई फ्यूचर्स एक्सचेंज पर चांदी के स्टॉक गिरकर करीब 10 साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए हैं। यह खबर वैश्विक चांदी बाजार में सप्लाई की किल्लत को और साफ दिखा रही है। क्या इससे चांदी की कीमतों में तेजी आएगी? आइए विस्तार से समझते हैं।
हालिया आंकड़ों के मुताबिक, शंघाई फ्यूचर्स एक्सचेंज (SHFE) पर डिलीवरी के लिए उपलब्ध चांदी का स्टॉक घटकर लगभग 350 टन के आसपास पहुंच गया है। CEIC डेटा के अनुसार, 9 फरवरी 2026 को यह मात्रा 318.546 टन थी, जो 6 फरवरी के 349.900 टन से भी कम है। यह स्तर 2015 के बाद का सबसे निचला है। तुलना करें तो जनवरी 2021 में यह स्टॉक अपने पीक पर 3,091 टन तक पहुंचा था—यानी अब करीब 88% की भारी गिरावट आई है।
इस कमी के पीछे मुख्य वजह 2025 में चीन से लंदन की तरफ भारी मात्रा में चांदी का निर्यात है। इससे वैश्विक स्तर पर फिजिकल चांदी का दबाव कुछ कम हुआ, लेकिन चीन के लोकल स्टॉक स्क्वीज हो गए। साथ ही, नए माल के वेयरहाउस में आने का सिलसिला रुका हुआ है। SHFE पर चांदी की कीमत COMEX (अमेरिकी एक्सचेंज) से काफी ज्यादा प्रीमियम पर चल रही है, जिससे आयात करना मुश्किल हो गया है।
चीन दुनिया का बड़ा चांदी उपभोक्ता है, खासकर सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक वाहन (EV), इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य इंडस्ट्रियल सेक्टर में। इन क्षेत्रों की मांग तेजी से बढ़ रही है, जबकि खदानों से उत्पादन में ज्यादा इजाफा नहीं हो रहा है। रिसाइक्लिंग भी कीमतों की अस्थिरता और लॉजिस्टिक्स की वजह से सीमित है। ऐसे में सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ता जा रहा है।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह स्थिति चांदी की कीमतों के लिए मध्यम अवधि में सकारात्मक संकेत है। इंडस्ट्रियल डिमांड मजबूत बनी हुई है, और कम स्टॉक की वजह से फिजिकल मार्केट टाइट हो रहा है। SHFE ने वोलेटिलिटी कंट्रोल करने के लिए मार्जिन रिक्वायरमेंट बढ़ा दी, जिससे कुछ स्पेकुलेटिव पोजीशन कम हुईं, लेकिन कीमतें फिर भी मजबूत टिकी हुई हैं।
ग्लोबल स्तर पर कॉमेक्स सिल्वर अब $78-83 प्रति औंस के आसपास ट्रेड कर रहा है—पहले यह $121 से ऊपर गया था। शॉर्ट टर्म में $90 के आसपास रेजिस्टेंस दिख रहा है, लेकिन अगर $65-70 का सपोर्ट बना रहा तो $95-105 तक जाने की गुंजाइश है।
भारत में भी असर दिख रहा है। MCX पर मार्च फ्यूचर्स में चांदी ₹3,20,000 प्रति किलो तक पहुंच सकती है अगले महीने में। घरेलू डिमांड और ग्लोबल सप्लाई की कमी इसे सपोर्ट कर रही है। हालांकि, हाल में कीमतों में कुछ सुधार आया है, लेकिन लंबे समय में बुलिश सेंटिमेंट बना हुआ है।
इंडसइंड सिक्योरिटीज के जिगर त्रिवेदी कहते हैं कि चीन का यह स्टॉक गिरना फिजिकल सप्लाई चेन की मुश्किलें दिखाता है। ग्लोबल डिमांड बढ़ रही है, जबकि प्रोडक्शन और रिसाइक्लिंग पीछे हैं—यह लंबे समय के लिए अच्छा संकेत है।
केडिया एडवाइजरी के अजय केडिया का मानना है कि मार्जिन हाइक वोलेटिलिटी कंट्रोल करती है, लेकिन सप्लाई की कमी बनी रहेगी। सोलर और EV सेक्टर की मांग मजबूत है।
एनरिच मनी के सीईओ पॉनमुडी आर कहते हैं कि इंडस्ट्रियल डिमांड और सप्लाई इश्यूज की वजह से लॉन्ग टर्म बुलिश स्ट्रक्चर बरकरार है। शॉर्ट टर्म में कुछ प्रेशर हो सकता है, लेकिन सपोर्ट लेवल पर मजबूती दिखी तो तेजी फिर शुरू हो सकती है।
कुल मिलाकर, SHFE पर चांदी के स्टॉक का यह रिकॉर्ड लो स्तर मार्केट में सप्लाई की गंभीर कमी का संकेत दे रहा है। अगर इंडस्ट्रियल यूज बढ़ता रहा और नए सोर्स नहीं आए, तो कीमतों में और उछाल आ सकता है। निवेशकों के लिए यह समय सतर्कता और रिसर्च के साथ फैसले लेने का है—क्योंकि वोलेटिलिटी बनी रहेगी।
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