भारतीय स्टॉक मार्केट में डिस्काउंट ब्रोकिंग सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है। यहां एंजेल वन और ग्रो दो प्रमुख प्लेयर्स हैं, जो निवेशकों को कम लागत पर ट्रेडिंग सुविधा देते हैं। हाल ही में Q3 (अक्टूबर-दिसंबर 2025, यानी Q3 FY26) के नतीजों ने इन दोनों की तुलना को और रोचक बना दिया है।
ट्रेड ब्रेंस की रिपोर्ट के अनुसार, दोनों ब्रोकर्स ने अलग-अलग क्षेत्रों में मजबूती दिखाई। आइए विस्तार से देखें कि Q3 में कौन आगे रहा और क्यों।
क्लाइंट बेस और एक्टिव यूजर्स
एंजेल वन का क्लाइंट बेस काफी बड़ा है। दिसंबर 2025 तक इसके पास 45 मिलियन एक्टिव NSE क्लाइंट्स थे, जो भारत की कुल आबादी का लगभग 3.1% है। यह स्केल की ताकत दिखाता है।
दूसरी ओर, ग्रो ने 20.4 मिलियन कुल ट्रांजैक्टिंग यूजर्स रिपोर्ट किए, जिनमें से 16 मिलियन एक्टिव यूजर्स थे। ग्रो की एक्टिव यूजर्स में QoQ 7% और YoY 25% की मजबूत ग्रोथ रही।
एंजेल वन स्केल में आगे है, जबकि ग्रो ग्रोथ रेट में बेहतर प्रदर्शन कर रहा है।
रेवेन्यू (आय)
रेवेन्यू में एंजेल वन ने बढ़त बनाई। कंपनी ने Q3 में 1,335 करोड़ रुपये की ग्रॉस रेवेन्यू रिपोर्ट की।
ग्रो की कुल इनकम 1,216 करोड़ रुपये रही।
एंजेल वन की विविध प्रोडक्ट्स (21 फिनटेक प्रोडक्ट्स) और बड़ा क्लाइंट बेस इसे रेवेन्यू स्केल में मजबूत बनाता है।
प्रॉफिटेबिलिटी और EBITDA
प्रॉफिट मार्जिन में ग्रो ने बाजी मारी। ग्रो का एडजस्टेड EBITDA 756 करोड़ रुपये रहा, मार्जिन 63.7% के साथ।
एंजेल वन का EBITDA 434 करोड़ रुपये था, मार्जिन 43%।
ग्रो की हाई मार्जिन MTF, कमोडिटीज और क्रेडिट जैसे हाई-मार्जिन वर्टिकल्स पर फोकस से आई है। कम प्रोडक्ट्स लेकिन बेहतर मोनेटाइजेशन ने ऑपरेटिंग एफिशिएंसी बढ़ाई।
कस्टमर एसेट्स
एसेट एग्रीगेशन में ग्रो ने दोगुना से ज्यादा परफॉर्म किया। ग्रो के पास 3.0 ट्रिलियन रुपये के कस्टमर एसेट्स थे, जबकि एंजेल वन के पास 1.5 ट्रिलियन रुपये।
यह ग्रो की यूजर बेस को बेहतर तरीके से मोनेटाइज करने की क्षमता दिखाता है।
स्केल vs एफिशिएंसी: कौन बेहतर?
Q3 ने क्लियरली दो अलग मॉडल दिखाए:
- एंजेल वन: बड़ा स्केल, ज्यादा रेवेन्यू, विविध प्रोडक्ट्स लेकिन कम मार्जिन।
- ग्रो: बेहतर प्रॉफिट मार्जिन, हाई एफिशिएंसी, तेज एसेट ग्रोथ लेकिन रेवेन्यू में थोड़ा पीछे।
ओवरऑल, ग्रो ने ऑपरेटिंग एफिशिएंसी, प्रॉफिटेबिलिटी और एसेट एग्रीगेशन में बढ़त ली, जबकि एंजेल वन रेवेन्यू स्केल और क्लाइंट नंबर्स में आगे रहा।
यह तुलना दिखाती है कि स्टॉकब्रो킹 इंडस्ट्री में स्केल और प्रॉफिट मार्जिन दोनों महत्वपूर्ण हैं। रिटेल निवेशकों की भागीदारी बढ़ने के साथ दोनों कंपनियां भविष्य में और मजबूत हो सकती हैं।
निवेश से पहले अपनी रिसर्च करें और फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह लें, क्योंकि मार्केट रिस्क शामिल है।
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