अमेरिकी AI कंपनी Anthropic ने अपने Claude AI प्लेटफॉर्म के लिए नए टूल और प्लग-इन्स लॉन्च किए हैं, जिसने वैश्विक स्तर पर सॉफ्टवेयर और IT सेक्टर में हड़कंप मचा दिया। इस घोषणा के बाद भारतीय IT दिग्गजों जैसे TCS, Infosys, Wipro, HCLTech और Tech Mahindra के शेयरों में भारी गिरावट देखी गई। बुधवार को भारतीय बाजार में Nifty IT इंडेक्स में 6% तक की गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों में AI से जुड़ी चिंताएं बढ़ गई हैं।
Anthropic ने क्या नया लॉन्च किया?
Anthropic ने Claude Cowork एजेंट के लिए 11 नए प्लग-इन्स जारी किए, जो कॉर्पोरेट टीमों के लिए काम को ऑटोमेट करने में सक्षम हैं। ये टूल विशेष रूप से लीगल, सेल्स, मार्केटिंग, डेटा एनालिसिस और कोडिंग जैसे क्षेत्रों में रूटीन टास्क को हैंडल कर सकते हैं। उदाहरण के लिए:
- कॉन्ट्रैक्ट चेक करना
- NDA रिव्यू करना
- लीगल समरी तैयार करना
- स्टैंडर्ड डॉक्यूमेंट ड्राफ्टिंग
ये टूल GitHub पर उपलब्ध हैं और कंपनी ने स्पष्ट किया है कि ये लीगल एडवाइस नहीं देते, बल्कि लॉयर्स को अंतिम रिव्यू करना पड़ता है। हालांकि, निवेशकों को डर है कि ऐसे एडवांस्ड AI एजेंट पारंपरिक सॉफ्टवेयर और मैनपावर-बेस्ड सर्विसेज की जगह ले सकते हैं।
भारतीय IT स्टॉक्स पर असर क्यों पड़ा?
भारतीय IT सेक्टर मुख्य रूप से स्टाफिंग-इंटेंसिव मॉडल पर चलता है, जहां बड़ी संख्या में कर्मचारी क्लाइंट प्रोजेक्ट्स के लिए डिप्लॉय किए जाते हैं। Anthropic के इन टूल्स से:
- रूटीन डेवलपमेंट, टेस्टिंग और एनालिसिस टास्क ऑटोमेट हो सकते हैं
- क्लाइंट्स की बड़ी टीमों की जरूरत कम हो सकती है
- बिलेबल आवर्स और मार्जिन पर दबाव पड़ सकता है
इस वजह से Infosys के शेयर 7-8% तक गिरे, TCS 6% से ज्यादा नीचे आए, जबकि Wipro, HCLTech और अन्य में भी 5-6% की गिरावट देखी गई। Nifty IT इंडेक्स से करीब 2 लाख करोड़ रुपये का मार्केट वैल्यू लुप्त हो गया।
वैश्विक स्तर पर भी सॉफ्टवेयर कंपनियां प्रभावित हुईं। यूएस में Thomson Reuters, LegalZoom जैसी कंपनियां 12% तक गिरीं, जबकि यूरोप में RELX और Wolters Kluwer 10% से ज्यादा नीचे आईं। कुल मिलाकर सॉफ्टवेयर और फाइनेंशियल डेटा से जुड़े इंडेक्स में 300 बिलियन डॉलर (लगभग $285-300 अरब) की वैल्यू घटी।
विशेषज्ञों की राय क्या है?
मार्केट एक्सपर्ट Art Hogan (B Riley Wealth Management) ने कहा, “OpenAI और Anthropic जैसी कंपनियों से AI इतनी तेजी से आगे बढ़ रहा है कि यह समस्या बन सकता है। निवेशक अब उन सभी कंपनियों पर नजर रख रहे हैं जो डिसरप्ट हो सकती हैं।”
भारतीय एनालिस्ट्स का मानना है कि AI एंट्री-लेवल जॉब्स और रूटीन टास्क को प्रभावित करेगा, लेकिन भारतीय IT कंपनियां क्लाउड, ऑटोमेशन और AI-लेड सर्विसेज में भारी निवेश कर रही हैं। ये कंपनियां मजबूत टैलेंट, स्केल और क्लाइंट रिलेशनशिप के साथ प्रतिस्पर्धी बनी रहेंगी। हालांकि, शॉर्ट टर्म में AI की तेज प्रगति से सेंटिमेंट कमजोर है।
आगे क्या होगा IT सेक्टर के लिए?
यह घटना “SaaSpocalypse” के नाम से चर्चित हो रही है, जहां निवेशक अब AI को मददगार के बजाय रिप्लेसमेंट के रूप में देख रहे हैं। भारतीय IT इंडस्ट्री $283 बिलियन की है और ग्लोबल लीडर बनी हुई है। कंपनियां AI को अपनाकर खुद को अपग्रेड कर रही हैं, लेकिन निवेशकों को अब प्रूफ चाहिए कि वे AI युग में तेजी से एडाप्ट कर पाएंगी।
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