भारत में Battery Energy Storage Systems (BESS) सेक्टर 2026 में जबरदस्त उछाल मारने वाला है। India Energy Storage Alliance (IESA) की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में जहां सिर्फ़ 507 MWh की नई BESS क्षमता जुड़ी, वहीं 2026 में यह लगभग 10 गुना बढ़कर करीब 5 GWh तक पहुंच सकती है। यानी साल भर में क्षमता में 1,000% का उछाल!
2025 तक कुल commissioned BESS क्षमता सिर्फ़ 708 MWh थी, लेकिन अब टेंडर से एक्जीक्यूशन की तरफ़ शिफ्ट हो रहा है। 2025 में 224 GWh के टेंडर हुए थे, और अब 60 GWh प्रोजेक्ट्स लागू होने वाले हैं।
कुछ बड़े माइलस्टोन:
- मार्च 2026 में Adani का गुजरात में 1,126 MW / 3,530 MWh वाला BESS प्रोजेक्ट कमीशन होगा – ये दुनिया के सबसे बड़े सिंगल-लोकेशन BESS में से एक होगा।
- जनवरी 2026 में राजस्थान का Pugal Solar Park में सबसे बड़ा सोलर-प्लस-BESS टेंडर आने वाला है।
- कमर्शियल सेगमेंट में भी ग्रोथ दिख रही है, जैसे Juniper Green Energy का 60 MWh मर्चेंट BESS प्रोजेक्ट।
यह ग्रोथ सिर्फ़ बैटरी नहीं, बल्कि इसके ऊपर वाली सामग्री जैसे इलेक्ट्रोलाइट, LiPF6 सॉल्ट, PVDF बाइंडर, LFP कैथोड और एडवांस्ड एनोड की डिमांड बढ़ाएगी। भारत चीन पर निर्भरता कम करने की कोशिश में है, तो लोकल केमिकल कंपनियां बड़े फायदे में रहेंगी।
यहां तीन ऐसी केमिकल स्टॉक्स हैं, जिन्हें आपको अपनी रडार पर रखना चाहिए:
1. Gujarat Fluorochemicals Limited (GFL)
गुजरात फ्लोरोकेमिकल्स भारत की सबसे इंटीग्रेटेड कंपनियों में से एक है, जो फ्लोरोपॉलिमर और बैटरी-ग्रेड मटेरियल में मजबूत है।
कंपनी बना रही है:
- LiPF6 इलेक्ट्रोलाइट सॉल्ट (ग्लोबल प्राइस बढ़ने से जल्द सेल्स शुरू होने वाली हैं – $10/kg से $17/kg तक उछाल!)
- LFP कैथोड एक्टिव मटेरियल (फैसिलिटी कमीशन हो चुकी, अप्रूवल के बाद कमर्शियल सेल्स)
- PVDF और PTFE बाइंडर (2026 की पहली छमाही में डिलीवरी के लिए क्वालिफिकेशन चल रहा)
- EV और BESS के लिए कस्टम इलेक्ट्रोलाइट फॉर्मूलेशन
GFCL EV Products सब्सिडियरी के तहत ₹6,000 करोड़ का निवेश प्लान है। कैप्टिव फ्लोरस्पार माइन और ग्लोबल प्रेजेंस से कॉस्ट में फायदा।
कोर फ्लोरोकेमिकल बिजनेस (रेफ्रिजरेंट्स, बेसिक केमिकल्स) स्टेबिलिटी देता है, जबकि बैटरी सेगमेंट लॉन्ग-टर्म ग्रोथ देगा।
2. Neogen Chemicals Limited
नीजेन केमिकल्स लिथियम-बेस्ड स्पेशलिटी केमिकल्स में अर्ली मूवर है, जो बैटरी इंडस्ट्री के लिए परफेक्ट है।
Neogen Ionics सब्सिडियरी के जरिए:
- लिथियम-आयन बैटरी इलेक्ट्रोलाइट्स
- इलेक्ट्रोलाइट सॉल्ट्स और एडिटिव्स
जापान की Morita Chemicals के साथ JV में सॉलिड LiPF6 प्रोडक्शन। 2024 में इलेक्ट्रोलाइट प्रोडक्शन शुरू हुआ, 2026-27 में बड़ी कैपेसिटी एडिशन।
गुजरात के दहेज में 65 एकड़ लैंड लिया, ब्रोमीन और लिथियम केमिस्ट्री में लंबा अनुभव। इंडियन गिगाफैक्ट्री और इंटरनेशनल क्लाइंट्स से वैलिडेशन हो चुका।
हाई-मार्जिन प्रोडक्ट्स से रेवेन्यू में तेज ग्रोथ की उम्मीद, जैसे ही घरेलू डिमांड बढ़ेगी।
3. Himadri Speciality Chemical Limited
हिमाद्री एडवांस्ड कार्बन मटेरियल्स में एक्सपर्ट है, जो लिथियम-आयन बैटरी के एनोड के लिए बहुत जरूरी है।
कंपनी का टारगेट:
- 200,000 TPA तक LFP कैथोड एक्टिव मटेरियल (लगभग 100 GWh बैटरी सपोर्ट करेगा)
- नैचुरल, सिंथेटिक, हाइब्रिड और सिलिकॉन-बेस्ड एनोड मटेरियल डेवलपमेंट
Sicona Battery Technologies (सिलिकॉन-कार्बन एनोड) में स्टेक, और अन्य एनर्जी स्टोरेज वेंचर्स। कोल टार पिच में बैकवर्ड इंटीग्रेशन, जीरो-लिक्विड डिस्चार्ज प्लांट्स और स्ट्रॉन्ग R&D।
50+ देशों में एक्सपोर्ट, सस्टेनेबल प्रोसेस – घरेलू BESS ग्रोथ और ग्लोबल डिमांड दोनों से फायदा।
अंत में…
2026 में BESS क्षमता का यह 10 गुना उछाल भारत के केमिकल सेक्टर के लिए स्ट्रक्चरल ऑपर्च्युनिटी है। Gujarat Fluorochemicals, Neogen Chemicals और Himadri Speciality Chemical तीनों कंपनियां रियल इन्वेस्टमेंट, टेक्नोलॉजी पार्टनरशिप और प्रोडक्ट पाइपलाइन के साथ तैयार हैं।
हालांकि एक्जीक्यूशन रिस्क (फाइनेंसिंग, लो टैरिफ प्रोजेक्ट्स, सप्लाई चेन) हैं, लेकिन क्लीन एनर्जी ट्रांजिशन का मोमेंटम बहुत मजबूत दिख रहा है।
नोट: यह जानकारी सिर्फ पढ़ने के लिए है, निवेश सलाह नहीं। शेयर मार्केट में रिस्क होता है – अपना रिसर्च करें या फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह लें।
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