यूनियन बजट 2026 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शेयर बायबैक (शेयरों की पुनर्खरीद) की टैक्स व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव की घोषणा की है। यह बदलाव मुख्य रूप से टैक्स चोरी (टैक्स आर्बिट्रेज) को रोकने, माइनॉरिटी शेयरधारकों (सामान्य निवेशकों) के हितों की रक्षा करने और कंपनियों में बेहतर कॉर्पोरेट गवर्नेंस को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया गया है।
पहले क्या था नियम?
- बजट 2024 में 1 अक्टूबर 2024 से लागू नियम के अनुसार, कंपनी द्वारा बायबैक किए गए शेयरों से मिलने वाली राशि को डिविडेंड माना जाता था।
- इस पर शेयरधारक की इनकम टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स लगता था, जो अधिकतम 30% या उससे ज्यादा हो सकता था (सरचार्ज और सेस सहित)।
- कंपनी TDS काटती थी (रेजिडेंट के लिए 10%, नॉन-रेजिडेंट के लिए 20%)।
- शेयर की खरीद लागत को कैपिटल लॉस के रूप में क्लेम किया जा सकता था, जिसे अन्य कैपिटल गेन से एडजस्ट या 8 साल तक कैरी फॉरवर्ड किया जा सकता था।
यह व्यवस्था प्रमोटर्स के लिए फायदेमंद थी क्योंकि वे डिविडेंड की बजाय बायबैक के जरिए कम टैक्स में फंड निकाल सकते थे, जिससे टैक्स आर्बिट्रेज की समस्या पैदा हो रही थी।
बजट 2026 में नया क्या है?
वित्त मंत्री ने घोषणा की कि अब सभी शेयरधारकों के लिए बायबैक से प्राप्त राशि को कैपिटल गेन माना जाएगा, न कि डिविडेंड।
- सामान्य शेयरधारकों (नॉन-प्रमोटर/माइनॉरिटी निवेशकों) के लिए:
- लाभ पर स्टैंडर्ड कैपिटल गेन टैक्स लागू होगा।
- लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन (LTCG, 1 साल से ज्यादा होल्डिंग) पर 12.5% टैक्स (इंडेक्सेशन के साथ)।
- शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन (STCG) पर 20% टैक्स।
- शेयर की मूल खरीद लागत को घटाकर केवल वास्तविक लाभ पर टैक्स लगेगा, जिससे टैक्स बोझ काफी कम हो जाता है।
यह बदलाव माइनॉरिटी निवेशकों के लिए बड़ी राहत है, क्योंकि पहले डिविडेंड टैक्स ज्यादा था। इससे बायबैक की आकर्षकता बढ़ सकती है और कंपनियां ज्यादा बायबैक कर सकती हैं।
- प्रमोटर्स के लिए विशेष प्रावधान:
- प्रमोटर्स पर अतिरिक्त बायबैक टैक्स लगेगा ताकि टैक्स आर्बिट्रेज रोका जा सके।
- कॉरपोरेट प्रमोटर्स (डोमेस्टिक कंपनियां): प्रभावी टैक्स दर 22% (नई टैक्स रिजीम के तहत कंपनी टैक्स रेट के बराबर)।
- नॉन-कॉर्पोरेट प्रमोटर्स (व्यक्ति, HUF, फर्म, LLP आदि): प्रभावी टैक्स दर 30% (उच्चतम स्लैब रेट के बराबर)।
- यह अतिरिक्त टैक्स प्रमोटर्स द्वारा बायबैक के दुरुपयोग को रोकने के लिए है, जबकि सामान्य निवेशक इससे प्रभावित नहीं होंगे।
ये बदलाव 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगे और वित्त वर्ष 2026-27 तथा उसके बाद के वर्षों पर लागू होंगे।
इस बदलाव का असर क्या होगा?
- सकारात्मक प्रभाव:
- माइनॉरिटी शेयरधारकों को कम टैक्स (12.5% LTCG) का फायदा मिलेगा, जिससे वे ज्यादा बायबैक में भाग ले सकेंगे।
- कंपनियां कैश को डिविडेंड या बायबैक के बजाय बिजनेस ग्रोथ में इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित होंगी।
- बेहतर कॉर्पोरेट गवर्नेंस और पारदर्शिता बढ़ेगी।
- बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव लिस्टेड कंपनियों में बायबैक एक्टिविटी को फिर से बढ़ावा दे सकता है, खासकर IT सेक्टर में (जैसा कि बजट के बाद IT इंडेक्स में रिकवरी देखी गई)।
- नकारात्मक प्रभाव:
- प्रमोटर्स के लिए टैक्स बोझ बढ़ेगा, जिससे वे बायबैक कम कर सकते हैं।
- कुल मिलाकर शेयर बाजार में शुरुआती प्रतिक्रिया मिक्स्ड रही, क्योंकि अन्य फैसलों (जैसे STT बढ़ोतरी) से बाजार में गिरावट आई, लेकिन बायबैक नियम से कुछ सेक्टरों में रिकवरी हुई।
निवेशकों के लिए सलाह
यदि आप लिस्टेड कंपनी के शेयरधारक हैं और कंपनी बायबैक ऑफर करती है, तो अब केवल लाभ पर टैक्स देना होगा। होल्डिंग पीरियड चेक करें – लॉन्ग-टर्म होल्डिंग ज्यादा फायदेमंद रहेगी। प्रमोटर ग्रुप में आने वाले निवेशकों को अतिरिक्त टैक्स का ध्यान रखना चाहिए।
यह बदलाव भारत के टैक्स सिस्टम को और ज्यादा न्यायसंगत बनाने की दिशा में एक कदम है, जो सामान्य निवेशकों के हित में है। बजट 2026 के इस प्रस्ताव से निवेश का माहौल और मजबूत होने की उम्मीद है।
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