सोना हमेशा से ही वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक महत्वपूर्ण संपत्ति रहा है। पिछले कुछ वर्षों में सोने की कीमतों में भारी उछाल आया है, जो 2020 से 2025 तक 265% तक बढ़ गई। इस दौरान कई देशों के केंद्रीय बैंकों ने अपने सोने के भंडार को बढ़ाया या घटाया है। यह बदलाव मुद्रा स्थिरता, मुद्रास्फीति से बचाव और भू-राजनीतिक जोखिमों से निपटने के लिए किए जाते हैं। इस लेख में हम उन देशों पर चर्चा करेंगे जिन्होंने 2020-2025 के बीच सोने के भंडार में सबसे बड़ा बदलाव किया है।
सोने के भंडार बढ़ाने वाले शीर्ष देश (2020-2025)
कई देशों ने आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच सोने को एक सुरक्षित निवेश के रूप में देखा। यहां उन देशों की सूची है जिन्होंने सबसे अधिक सोना खरीदा:
- चीन: +357.1 टन। चीन ने अपने विदेशी मुद्रा भंडार को विविधता देने के लिए सोने पर जोर दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि वास्तविक खरीदारी इससे अधिक हो सकती है, क्योंकि कुछ लेन-देन गुप्त रूप से किए जाते हैं।
- पोलैंड: +314.6 टन। पोलैंड ने मौद्रिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सोने का भंडार बढ़ाया।
- तुर्की: +251.8 टन। मुद्रास्फीति और मुद्रा अस्थिरता से बचने के लिए तुर्की ने सोने को प्राथमिकता दी।
- भारत: +245.3 टन। भारत ने वैश्विक आर्थिक जोखिमों से बचाव के लिए सोने की खरीदारी बढ़ाई, जो देश की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है।
- ब्राजील: +105.1 टन। उभरती अर्थव्यवस्थाओं में सोने को स्थिरता का प्रतीक माना गया।
- अजरबैजान: +83.6 टन।
- जापान: +80.8 टन।
- थाईलैंड: +80.6 टन।
- हंगरी: +78.5 टन।
- सिंगापुर: +77.3 टन।
ये बदलाव दिखाते हैं कि एशियाई और पूर्वी यूरोपीय देश सोने को डॉलर पर निर्भरता कम करने के लिए उपयोग कर रहे हैं।
सोने के भंडार घटाने वाले शीर्ष देश (2020-2025)
कुछ देशों ने आर्थिक संकट या अन्य जरूरतों के कारण सोने की बिक्री की:
- फिलीपींस: -65.2 टन।
- कजाकिस्तान: -52.4 टन।
- श्रीलंका: -19.1 टन। आर्थिक संकट के दौरान सोने की बिक्री की गई।
- जर्मनी: -16.3 टन।
- मंगोलिया: -15.9 टन।
- ताजिकिस्तान: -11.9 टन।
- यूरो क्षेत्र: -10.8 टन।
- कोलंबिया: -9.2 टन।
- फिनलैंड: -5.4 टन।
ये बिक्री मुख्य रूप से आर्थिक दबाव या रिजर्व को संतुलित करने के लिए की गईं।
2026 में सोने के भंडार की नवीनतम स्थिति और अतिरिक्त जानकारी
2026 की शुरुआत में, सोने के भंडार में बदलाव जारी हैं। विश्व स्वर्ण परिषद के अनुसार, 2025 की चौथी तिमाही में पोलैंड (+34.87 टन), उज्बेकिस्तान (+28.93 टन) और ब्राजील (+27.30 टन) ने सबसे अधिक वृद्धि दर्ज की, जबकि घाना (-18.46 टन) और सिंगापुर (-11.16 टन) में कमी आई।
2025-2026 के बीच कुछ प्रमुख बदलाव:
- चीन: +185 टन।
- भारत: +73 टन।
- रूस: +112 टन।
ये अपडेट दिखाते हैं कि एशियाई देश सोने की खरीदारी में सक्रिय हैं।
विश्व के शीर्ष 10 देशों के कुल सोने के भंडार (2026 अनुमान)
| रैंक | देश | कुल भंडार (टन) | वैश्विक हिस्सा (%) |
|---|---|---|---|
| 1 | संयुक्त राज्य अमेरिका | 8,133 | 25.1 |
| 2 | जर्मनी | 3,352 | 10.4 |
| 3 | इटली | 2,452 | 7.8 |
| 4 | फ्रांस | 2,437 | – |
| 5 | रूस | 2,333 | – |
| 6 | चीन | 2,280 | 4 |
| 7 | स्विट्जरलैंड | 1,040 | 7 |
| 8 | भारत | 876 | 9 |
| 9 | जापान | 846 | – |
| 10 | नीदरलैंड | 612 | – |
(स्रोत: विभिन्न रिपोर्ट्स से संकलित)
क्यों बढ़ा रहे हैं देश सोने का भंडार?
सोना मुद्रास्फीति से बचाव, भू-राजनीतिक तनाव (जैसे रूस-यूक्रेन युद्ध) और अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करने के लिए उपयोगी है। 2026 में सोने की कीमतें $6,000-$6,300 प्रति औंस तक पहुंच सकती हैं। भारत जैसे देशों में सोना सांस्कृतिक और आर्थिक महत्व रखता है, जहां रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने हाल ही में 100 टन सोना घरेलू वॉल्ट में स्थानांतरित किया।
निष्कर्ष
पिछले 5 सालों में सोने के भंडार में बदलाव वैश्विक अर्थव्यवस्था की गतिशीलता को दर्शाते हैं। चीन और भारत जैसे देश आगे बढ़ रहे हैं, जबकि कुछ देश बिक्री कर रहे हैं। 2026 में यह ट्रेंड जारी रह सकता है। यदि आप सोने में निवेश करने की सोच रहे हैं, तो बाजार के रुझानों पर नजर रखें। अधिक जानकारी के लिए विश्व स्वर्ण परिषद की रिपोर्ट्स देखें।
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