शेयर बाजार में कुछ कहानियां ऐसी होती हैं जो सुनकर ही दिल खुश कर देती हैं। ऐसी ही एक कमाल की कहानी है Gravita India लिमिटेड की, जिसने पिछले 5 सालों में निवेशकों को मालामाल कर दिया। जनवरी 2021 में जहां कंपनी का शेयर महज 82.5 रुपये के आसपास ट्रेड कर रहा था, वहीं अब यह 1689 रुपये के स्तर पर पहुंच चुका है।
यानी अगर आपने 5 साल पहले सिर्फ 1 लाख रुपये का निवेश किया होता, तो आज आपकी वो रकम बढ़कर लगभग 20.38 लाख रुपये हो गई होती। कुल मिलाकर करीब 1938% का शानदार रिटर्न! ये कोई जादू नहीं, बल्कि कंपनी की मजबूत बिजनेस मॉडल, स्मार्ट एक्सपैंशन और पर्यावरण के प्रति बढ़ती जागरूकता का नतीजा है।
Gravita India कौन है? क्या करती है कंपनी?
ग्रेविटा इंडिया नॉन-फेरस मेटल्स (जैसे लेड, एल्युमिनियम और प्लास्टिक) की रीसाइक्लिंग और मैन्युफैक्चरिंग में भारत की सबसे बड़ी कंपनियों में से एक है। खास तौर पर लेड रीसाइक्लिंग इसकी फ्लैगशिप बिजनेस है।
कंपनी का काम सिर्फ पुरानी बैटरी या स्क्रैप को इकट्ठा करके पिघलाना नहीं है, बल्कि वो पूरी वैल्यू चेन कवर करती है – कलेक्शन → रीसाइक्लिंग → रिफाइनिंग → मैन्युफैक्चरिंग और यहां तक कि टर्नकी प्रोजेक्ट्स भी देती है।
आज ग्रेविटा:
- 70+ देशों में एक्सपोर्ट करती है
- भारत के अलावा अफ्रीका, यूरोप और एशिया में भी प्लांट्स चलाती है
- 12 से ज्यादा रीसाइक्लिंग प्लांट्स और 1900+ ग्लोबल टच पॉइंट्स हैं
- प्रोडक्शन कैपेसिटी 3.40 लाख मीट्रिक टन प्रति वर्ष है (और जल्द ही 7 लाख टन तक बढ़ाने का प्लान)
कंपनी पर्यावरण और सर्कुलर इकोनॉमी पर फोकस कर रही है। यही वजह है कि लिथियम-आयन बैटरी, पेपर, स्टील और रबर जैसे नए वर्टिकल्स में भी एंट्री कर रही है।
पिछले 5 साल में क्या-क्या हुआ जो स्टॉक इतना उछला?
शेयर की इस तेजी के पीछे कई मजबूत वजहें हैं:
बढ़ती रेवेन्यू और प्रॉफिट – हाल के क्वार्टर (Q2 FY26) में रेवेन्यू 11.75% बढ़कर 1036 करोड़ रुपये हो गई। वहीं नेट प्रॉफिट 33% उछलकर 96 करोड़ रुपये पहुंचा।
शानदार फाइनेंशियल हेल्थ – ROCE 21.5% और ROE 21.2% – मतलब कंपनी अपना कैपिटल बहुत एफिशिएंट तरीके से इस्तेमाल कर रही है।
एक्सपैंशन मोड ऑन – कंपनी 2028 तक कैपेसिटी को दोगुना से ज्यादा करने जा रही है। नए प्लांट्स, लिथियम पायलट यूनिट और मालाबार में रबर फैसिलिटी जल्द शुरू होगी।
ग्लोबल ऑर्डर बुक मजबूत – 60,000+ MT का हेल्दी ऑर्डर बुक और 63% कैपेसिटी यूटिलाइजेशन।
पर्यावरण नीतियां और EV ट्रेंड – लेड और बैटरी रीसाइक्लिंग की डिमांड बढ़ रही है, क्योंकि दुनिया सस्टेनेबल तरीकों की ओर जा रही है।
निवेशकों के लिए क्या मतलब?
यह स्टॉक दिखाता है कि अगर कोई कंपनी मजबूत फंडामेंटल्स के साथ बढ़ते सेक्टर (रीसाइक्लिंग, ग्रीन इकोनॉमी) में काम कर रही हो, तो लॉन्ग टर्म में शानदार रिटर्न दे सकती है। लेकिन याद रखें – शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव तो चलते ही रहते हैं। ग्रेविटा का P/E भी 34.6x है, जो इंडस्ट्री एवरेज से थोड़ा ऊपर है।
अगर आप भी ऐसे कंपनियों में लॉन्ग टर्म निवेश करना चाहते हैं जो पर्यावरण के साथ-साथ शेयरहोल्डर्स की जेब भी भरें, तो ग्रेविटा इंडिया जैसी कंपनियां एक अच्छा उदाहरण हैं।
नोट: यह लेख सिर्फ जानकारी के लिए है। शेयर बाजार में निवेश से पहले अपनी रिसर्च जरूर करें या किसी फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह लें। बाजार में जोखिम हमेशा रहता है!
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