भारत सरकार ने हाल ही में यूनियन बजट 2026-27 में इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) 2.0 की शुरुआत की घोषणा की है। इस मिशन के तहत कुल 40,000 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है, जो देश के सेमीकंडक्टर सेक्टर को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। खास तौर पर गुजरात इस पहल से सबसे ज्यादा फायदा उठाने वाला राज्य बनने जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम गुजरात को सेमीकंडक्टर का पावरहाउस बना देगा और हजारों-लाखों रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा।
ISM 2.0 क्या है और क्यों महत्वपूर्ण?
ISM 1.0 की सफलता के बाद अब ISM 2.0 लॉन्च किया गया है। पहला मिशन सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन पर फोकस था, जबकि दूसरा चरण अब पूरे वैल्यू चेन को मजबूत करने पर केंद्रित है। इसमें शामिल हैं:
- सेमीकंडक्टर उपकरण और सामग्री का घरेलू उत्पादन
- फुल स्टैक भारतीय आईपी (इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी) का डिजाइन
- सप्लाई चेन को मजबूत बनाना
- इंडस्ट्री-लेड रिसर्च और ट्रेनिंग सेंटर्स की स्थापना
वित्त मंत्री ने इस मिशन के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 में 1,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। साथ ही इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ECMS) के बजट को बढ़ाकर 40,000 करोड़ रुपये कर दिया गया है, जो पहले 22,919 करोड़ था।
गुजरात में सेमीकंडक्टर क्रांति: धोलेरा बनेगा ‘सेमिकॉन सिटी’
गुजरात भारत का पहला प्लान्ड सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर धोलेरा में बना रहा है, जिसे इंडिया की पहली सेमिकॉन सिटी कहा जा रहा है। राज्य में पहले से ही 1.25 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के निवेश हो चुके हैं। ISM 2.0 के जरिए अब सप्लायर कंपनियां गुजरात में अपनी यूनिट्स लगाने के लिए आकर्षित होंगी।
कुछ प्रमुख प्रोजेक्ट्स:
- टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और ताइवान की PSMC की साझेदारी में धोलेरा में सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन प्लांट – निवेश 90,000 करोड़ रुपये से ज्यादा।
- माइक्रॉन टेक्नोलॉजी का सानंद में OSAT (आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर असेंबली एंड टेस्टिंग) प्रोजेक्ट – निवेश 22,500 करोड़ रुपये के करीब।
- अन्य कंपनियां जैसे CG Power, Renesas, Stars आदि भी गुजरात में OSAT और संबंधित सुविधाएं स्थापित कर रही हैं।
गुजरात की मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर, विश्वसनीय बिजली, लॉजिस्टिक्स और सिंगल-विंडो क्लीयरेंस जैसी सुविधाएं इसे निवेशकों के लिए आकर्षक बनाती हैं।
रोजगार सृजन और आर्थिक प्रभाव
एक सेमीकंडक्टर फैब आमतौर पर 5 से 7 एंसेलरी यूनिट्स (केमिकल्स, गैसेज, प्रिसिजन इंजीनियरिंग, लॉजिस्टिक्स आदि) को जन्म देती है। इससे हजारों डायरेक्ट और इंडायरेक्ट जॉब्स पैदा होते हैं। ISM 2.0 के साथ गुजरात में आने वाली एलाइड इंडस्ट्रीज न केवल सप्लाई चेन को मजबूत करेंगी, बल्कि नए रोजगार के द्वार भी खोलेंगी।
IESA (इंडिया इलेक्ट्रॉनिक एंड सेमीकंडक्टर एसोसिएशन) के वेस्ट जोन चेयरमैन सुधीर नाइक ने कहा, “यह बजट प्रस्ताव नीति से बड़े पैमाने पर क्रियान्वयन की ओर मजबूत कदम है। इससे सेमीकंडक्टर सप्लायर कंपनियां गुजरात में और निवेश करेंगी। एलाइड इंडस्ट्रीज का आना इंडस्ट्री की ग्रोथ के लिए जरूरी है, क्योंकि इससे प्रमुख कंपोनेंट्स की विश्वसनीय सप्लाई सुनिश्चित होगी और यहां नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे।”
भविष्य की संभावनाएं
अगले दशक में ऑटोमोटिव, इलेक्ट्रॉनिक्स, डिफेंस और रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में सेमीकंडक्टर की मांग तेजी से बढ़ेगी। गुजरात इस वैल्यू चेन का बड़ा हिस्सा संभाल सकता है। इससे भारत आत्मनिर्भर बनेगा और ग्लोबल सप्लाई चेन में मजबूत पोजीशन हासिल करेगा।
ISM 2.0 और 40,000 करोड़ के बूस्ट से गुजरात न सिर्फ सेमीकंडक्टर हब बनेगा, बल्कि देश की इकोनॉमी को नई दिशा देगा। यह ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में एक बड़ा कदम है।
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