आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स की दुनिया में सेमीकंडक्टर को “आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स का दिमाग” कहा जाता है। स्मार्टफोन, लैपटॉप, इलेक्ट्रिक वाहन (EV), 5G नेटवर्क, AI, डिफेंस और मेडिकल उपकरणों से लेकर रोजमर्रा की हर डिवाइस में ये छोटे-छोटे चिप्स काम करते हैं। लेकिन भारत अभी तक इन चिप्स के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर रहा है। इसी निर्भरता को खत्म करने और देश को वैश्विक सेमीकंडक्टर हब बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) 2.0 लॉन्च किया है।
इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 क्या है?
केंद्रीय बजट 2026-27 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी 2026 को ISM 2.0 की घोषणा की। यह ISM 1.0 (2021 में शुरू, ₹76,000 करोड़ के आउटले के साथ) की सफलता पर आधारित दूसरा चरण है।
ISM 1.0 ने मुख्य रूप से फैब्रिकेशन प्लांट्स, OSAT (आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर असेंबली एंड टेस्टिंग), कंपाउंड सेमीकंडक्टर और एडवांस पैकेजिंग पर फोकस किया था। अब तक 10 प्रोजेक्ट्स को मंजूरी मिल चुकी है, जिनमें कुल निवेश ₹1.6 लाख करोड़ से ज्यादा है। विभिन्न राज्यों में ये प्रोजेक्ट्स चल रहे हैं।
ISM 2.0 अब आगे की ओर बढ़ते हुए पूरे इकोसिस्टम को मजबूत करने पर केंद्रित है। इसका मुख्य उद्देश्य केवल चिप असेंबली नहीं, बल्कि पूरी वैल्यू चेन में आत्मनिर्भरता लाना है।
ISM 2.0 के प्रमुख फोकस एरिया
- उपकरण (Equipment) और सामग्री (Materials) का घरेलू उत्पादन
- फुल-स्टैक भारतीय सेमीकंडक्टर IP (Intellectual Property) का विकास – यानी डिजाइन से लेकर पूरा सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर इंडियन हो
- सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन को मजबूत और सुरक्षित बनाना
- इंडस्ट्री के नेतृत्व में R&D सेंटर्स और ट्रेनिंग सेंटर्स स्थापित करना, ताकि कुशल मैनपावर तैयार हो
वित्त वर्ष 2026-27 के लिए इस मिशन पर ₹1,000 करोड़ का प्रावधान किया गया है। साथ ही इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ECMS) का आउटले बढ़ाकर ₹40,000 करोड़ कर दिया गया है, जो पहले से लगभग दोगुना है। इससे इलेक्ट्रॉनिक्स पार्ट्स के आयात पर निर्भरता कम होगी।
ISM 2.0 क्यों जरूरी है? भारत के लिए फायदे
भारत में सेमीकंडक्टर मार्केट 2030 तक $100-110 बिलियन तक पहुंचने की उम्मीद है।
- आत्मनिर्भरता – चीन+1 स्ट्रैटेजी के तहत कंपनियां भारत की ओर रुख कर रही हैं।
- नौकरियां – हजारों हाई-स्किल जॉब्स, खासकर इंजीनियरिंग और R&D में।
- डोमेस्टिक डिमांड – EV, 5G, AI, डिफेंस और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स में बढ़ती जरूरत।
- ग्लोबल सप्लाई चेन में भारत की मजबूत हिस्सेदारी – ताइवान, साउथ कोरिया, चीन के मुकाबले वैकल्पिक हब।
- चुनौतियां दूर करना – हाई कैपिटल कॉस्ट, टेक्नोलॉजी गैप, स्किल्ड वर्कफोर्स की कमी और रॉ मटेरियल आयात पर निर्भरता।
ISM 2.0 इन चुनौतियों का सीधा समाधान दे रहा है। 2025 में कुछ प्लांट्स में पायलट प्रोडक्शन शुरू हो चुका है, और 2026 में कमर्शियल चिप मैन्युफैक्चरिंग की उम्मीद है।
आगे की राह और निष्कर्ष
मिनिस्ट्री ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (MeitY) के तहत चल रहे इस मिशन में Semiconductor Fabs Scheme, Display Fabs Scheme, Design Linked Incentive (DLI) और Semicon India प्लेटफॉर्म जैसे कार्यक्रम शामिल हैं।
ISM 2.0 भारत को सिर्फ असेंबली हब नहीं, बल्कि डिजाइन, इनोवेशन और हाई-वैल्यू मैन्युफैक्चरिंग का ग्लोबल लीडर बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। यह विकसित भारत@2047 के विजन से जुड़ा है, जहां तकनीक और आत्मनिर्भरता से देश की अर्थव्यवस्था नई बुलंदियों पर पहुंचेगी।
सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 के साथ भारत अब डिजिटल इंडिपेंडेंस की नई यात्रा पर निकल पड़ा है – जहां “मेड इन इंडिया” चिप्स दुनिया भर में पहुंचेंगी और हमारी अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
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