सेमीकंडक्टर आज की डिजिटल दुनिया की रीढ़ हैं। ये छोटे-छोटे चिप्स मोबाइल फोन, कंप्यूटर, कार, टेलीकॉम, डिफेंस सिस्टम और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी तकनीकों को चलाते हैं। भारत अब इस महत्वपूर्ण क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की मजबूत दिशा में आगे बढ़ रहा है। यूनियन बजट 2026-27 में इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 (ISM 2.0) की घोषणा ने देश की तकनीकी महत्वाकांक्षाओं को नया बल दिया है।
ISM 2.0 क्या है और इसका मुख्य उद्देश्य क्या है?
भारत सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 ISM 1.0 की सफलता पर आधारित अगला चरण है। ISM 1.0 दिसंबर 2021 में शुरू हुआ था, जिसमें ₹76,000 करोड़ के प्रोत्साहन पैकेज के साथ फैब्रिकेशन, असेंबली, टेस्टिंग और डिजाइन को बढ़ावा दिया गया। अब ISM 2.0 फोकस बदल रहा है – क्षमता निर्माण से आगे बढ़कर तकनीकी गहराई, स्वदेशी इनोवेशन और ग्लोबल सप्लाई चेन में मजबूती पर।
इसके प्रमुख लक्ष्य हैं:
- भारत में सेमीकंडक्टर उपकरण और सामग्री का उत्पादन शुरू करना।
- पूर्ण स्टैक भारतीय सेमीकंडक्टर इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (IP) का डिजाइन विकसित करना।
- घरेलू और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत बनाना।
- उन्नत विनिर्माण पर जोर, जैसे 3-नैनोमीटर और 2-नैनोमीटर टेक्नोलॉजी नोड्स तक पहुंचना।
सरकार का लक्ष्य है कि 2035 तक भारत दुनिया के शीर्ष सेमीकंडक्टर देशों में शामिल हो जाए। 2029 तक घरेलू जरूरतों के 70-75% चिप्स डिजाइन और मैन्युफैक्चर करने की क्षमता हासिल कर ली जाएगी।
बजट में मिला बड़ा प्रावधान
वित्त वर्ष 2026-27 के लिए ISM 2.0 को ₹1,000 करोड़ का प्रावधान किया गया है। साथ ही, सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम के विकास के लिए संशोधित कार्यक्रम में कुल ₹8,000 करोड़ का आउटले रखा गया है। इससे कैपिटल निवेश तेज होगा, रोजगार बढ़ेगा और घरेलू क्षमताएं विस्तारित होंगी।
ISM 1.0 की उपलब्धियां – मजबूत नींव
ISM 1.0 के तहत दिसंबर 2025 तक 6 राज्यों में 10 प्रोजेक्ट्स को मंजूरी मिली, जिनकी कुल लागत ₹1.60 लाख करोड़ है। इनमें सिलिकॉन फैब यूनिट्स, सिलिकॉन कार्बाइड फैब्स, एडवांस्ड पैकेजिंग और स्पेशलाइज्ड असेंबली-टेस्टिंग सुविधाएं शामिल हैं।
भारतीय सेमीकंडक्टर मार्केट 2023 में लगभग $38 बिलियन था, जो 2024-25 में $45-50 बिलियन पहुंच गया। 2030 तक यह $100-110 बिलियन तक पहुंचने की उम्मीद है। यह Make in India और Make for the World विजन से जुड़ा है।
डिजाइन, टैलेंट और इनोवेशन पर नया फोकस
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार, ISM 2.0 में सबसे ऊपर प्राथमिकता चिप डिजाइन को दी जाएगी। डिजाइन कंपनियां और स्टार्टअप्स को प्रोत्साहन मिलेगा ताकि भारत से अगला Qualcomm जैसा ग्लोबल प्लेयर निकले। इसके बाद उपकरण, सामग्री और टैलेंट डेवलपमेंट पर जोर है।
पिछले वर्षों में 67,000 से ज्यादा सेमीकंडक्टर इंजीनियर्स को ट्रेनिंग दी जा चुकी है। Chips to Startup प्रोग्राम, AICTE के कोर्स, SMART Lab, Lam Research के साथ पार्टनरशिप और FutureSkills PRIME जैसे प्रयास जारी हैं।
स्वदेशी माइक्रोप्रोसेसर जैसे DHRUV64 (C-DAC द्वारा), SHAKTI, AJIT, VIKRAM और THEJAS विकसित हो रहे हैं, जो 5G, ऑटोमोटिव, IoT और इंडस्ट्रियल एप्लिकेशंस में इस्तेमाल होंगे।
क्यों जरूरी है ISM 2.0?
ग्लोबल सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री में ताइवान, साउथ कोरिया, जापान, चीन और अमेरिका का दबदबा है। COVID-19 जैसी घटनाओं से सप्लाई चेन बाधित हुईं। भारत अब इंपोर्टर से इनोवेटर बनने की राह पर है। ISM 2.0 से इकोनॉमिक रेजिलिएंस, टेक्नोलॉजिकल सोवरेन्टी और ग्लोबल सप्लाई चेन में मजबूत भूमिका सुनिश्चित होगी।
यह कदम इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, डिफेंस, टेलीकॉम और पावर इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टरों की बढ़ती मांग को घरेलू उत्पादन से पूरा करेगा।
निष्कर्ष
भारत सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 देश को सेल्फ-रिलायंट और ग्लोबल टेक्नोलॉजी लीडर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है। ₹1,000 करोड़ का आवंटन और फोकस्ड रणनीति से भारत न सिर्फ अपनी जरूरतें पूरी करेगा, बल्कि दुनिया को उन्नत चिप्स सप्लाई करने वाला हब बनेगा। यह आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने वाला बड़ा कदम है।
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