भारतीय निवेशकों के लिए आज का समय बहुत खास है। दुनिया के बड़े-बड़े बाजारों में ढेर सारे मौके मौजूद हैं, लेकिन ज्यादातर लोग इन्हें नजरअंदाज कर रहे हैं। PPFAS म्यूचुअल फंड के चेयरमैन और सीईओ नील परिख ने हाल ही में कहा है कि ग्लोबल मार्केट्स में करीब 96% अवसर अभी भी बाकी हैं। उनका मानना है कि भारतीय निवेशक अब सिर्फ देश के अंदर ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में फैले बेहतरीन कंपनियों में निवेश करके अपना पोर्टफोलियो मजबूत कर सकते हैं।
नील परिख कौन हैं?
नील परिख PPFAS (पराग परिख फाइनेंशियल एडवाइजरी सर्विसेज) के प्रमुख हैं, जो भारत के सबसे भरोसेमंद और अलग सोच वाले फंड हाउस में से एक है। उनके पिता पराग परिख ने इसकी नींव रखी थी। नील पिछले 20 साल से ज्यादा समय से फाइनेंशियल मार्केट में काम कर रहे हैं। उन्होंने अमेरिका से इकोनॉमिक्स में ग्रेजुएशन किया और स्पेन के नामी IESE बिजनेस स्कूल से MBA भी पूरा किया है।
PPFAS का सबसे पॉपुलर फंड पराग परिख फ्लेक्सी कैप फंड है, जो भारत के साथ-साथ अमेरिका और अन्य विकसित देशों की टॉप कंपनियों में निवेश करता है। इस फंड ने लंबे समय में निवेशकों को शानदार रिटर्न दिए हैं, क्योंकि ये सिर्फ एक देश पर निर्भर नहीं रहता।
क्यों कहते हैं नील परिख कि 96% अवसर बाकी हैं?
नील परिख का कहना है कि दुनिया की कुल इक्विटी मार्केट का बहुत बड़ा हिस्सा अमेरिका, यूरोप, जापान जैसे विकसित देशों में है। भारत का मार्केट वैश्विक स्तर पर अभी भी छोटा है। इसका मतलब है कि दुनिया के 96% से ज्यादा अच्छे निवेश के मौके भारतीय निवेशकों के लिए अभी अनदेखे पड़े हुए हैं।
कुछ मुख्य पॉइंट्स जो नील परिख बार-बार जोर देते हैं:
- डायवर्सिफिकेशन बहुत जरूरी है अगर आपका सारा पैसा सिर्फ भारत में लगा है, तो एक देश की अर्थव्यवस्था में कोई दिक्कत आई तो नुकसान हो सकता है। ग्लोबल निवेश से रिस्क फैल जाता है। अलग-अलग देशों में अलग-अलग समय पर बाजार अच्छा चलता है।
- भारत से बाहर भी शानदार कंपनियां हैं Apple, Microsoft, Amazon, Google जैसी कंपनियां पूरी दुनिया में कारोबार करती हैं। ये कंपनियां लंबे समय में बहुत मजबूत ग्रोथ दिखाती हैं।
- भारतीय निवेशकों के लिए आसान रास्ता PPFAS ने GIFT सिटी के जरिए नए ग्लोबल फंड्स लॉन्च करने की योजना बनाई है। जल्द ही S&P 500, NASDAQ जैसे इंडेक्स पर पैसिव फंड्स और एक एक्टिव ग्लोबल फ्लेक्सी कैप फंड भी आएंगे। ये फंड टैक्स के मामले में भी ज्यादा फायदेमंद होंगे।
भारतीय निवेशकों के लिए क्या मतलब?
अगर आप लंबे समय (5-10 साल या उससे ज्यादा) के लिए निवेश करना चाहते हैं, तो ग्लोबल मार्केट्स में एक्सपोजर लेना समझदारी होगी। नील परिख का मानना है कि:
- रुपए की वैल्यू में उतार-चढ़ाव से बचाव मिलता है
- ज्यादा सेक्टर और टेक्नोलॉजी में एक्सेस मिलता है
- घरेलू बाजार के जोखिम को कम करता है
- कुल मिलाकर बेहतर रिस्क-एडजस्टेड रिटर्न दे सकता है
सावधानी जरूरी है!
हर निवेश में जोखिम होता है। ग्लोबल मार्केट में करेंसी रिस्क, भू-राजनीतिक स्थिति और वैल्यूएशन का ध्यान रखना चाहिए। इसलिए हमेशा अपनी रिस्क क्षमता के अनुसार और अच्छे फाइनेंशियल एडवाइजर की सलाह लेकर ही निवेश करें।
नील परिख का संदेश साफ है – दुनिया बहुत बड़ी है और मौके अनगिनत हैं। बस नजरें थोड़ी चौड़ी करनी होंगी। अगर आप अपने पोर्टफोलियो को अगले लेवल पर ले जाना चाहते हैं, तो ग्लोबल इन्वेस्टिंग को नजरअंदाज न करें!
नोट: म्यूचुअल फंड में निवेश बाजार जोखिम के अधीन है। सभी स्कीम से जुड़े दस्तावेज ध्यान से पढ़ें।
क्या आप भी ग्लोबल इन्वेस्टिंग शुरू करने की सोच रहे हैं? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं!
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