भारत ने हाल ही में विश्व आर्थिक मंच (दावोस) में सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण और भविष्योन्मुखी नया रोडमैप पेश किया है। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसकी रूपरेखा साझा की, जो देश को चिप डिज़ाइन से आगे बढ़ाकर उन्नत निर्माण तक ले जाने का स्पष्ट विजन रखती है। यह कदम भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर हब बनाने की दिशा में बड़ा बदलाव ला सकता है, खासकर जब दुनिया AI, 5G, इलेक्ट्रिक वाहनों और डिफेंस जैसी तकनीकों पर निर्भर हो रही है।
सेमीकंडक्टर क्यों इतना अहम है?
सेमीकंडक्टर चिप्स आज की हर आधुनिक डिवाइस की जान हैं – स्मार्टफोन, लैपटॉप, कारें, ड्रोन, सैटेलाइट और यहां तक कि मेडिकल उपकरण भी इनके बिना अधूरे हैं। भारत अभी ज्यादातर चिप्स आयात करता है, लेकिन यह नया रोडमैप आत्मनिर्भरता की ओर मजबूत कदम है। इससे न केवल आयात पर निर्भरता कम होगी, बल्कि लाखों हाई-स्किल जॉब्स भी पैदा होंगे।
नया रोडमैप: मुख्य लक्ष्य और टाइमलाइन
मंत्री अश्विनी वैष्णव ने दावोस में सेमिकॉन राउंडटेबल के दौरान वैश्विक उद्योग नेताओं से सकारात्मक फीडबैक मिलने की बात कही। उन्होंने बताया कि भारत अब संदेह से विश्वास की ओर बढ़ चुका है। मुख्य लक्ष्य इस प्रकार हैं:
- 2029 तक: घरेलू जरूरतों के 70-75% चिप्स डिज़ाइन और मैन्युफैक्चर करने की क्षमता हासिल करना।
- 2032 तक: 3 नैनोमीटर (3nm) चिप्स का घरेलू उत्पादन शुरू करना।
- 2035 तक: 2 नैनोमीटर तकनीक पर पहुंचना और दुनिया के टॉप सेमीकंडक्टर देशों में शामिल होना।
यह रोडमैप Semicon 2.0 प्रोग्राम के तहत आएगा, जिसमें DLI 2.0 (Design Linked Incentive) योजना को अपग्रेड किया जा रहा है।
छह कोर डोमेन पर फोकस
भारत चिप डिज़ाइन में अपनी ताकत बढ़ाने के लिए छह मुख्य क्षेत्रों पर जोर दे रहा है:
| क्रमांक | डोमेन | मुख्य उपयोग क्षेत्र | महत्व |
|---|---|---|---|
| 1 | Compute Systems & Microcontrollers | कंप्यूटिंग, AI, IoT डिवाइस | हाई-स्पीड प्रोसेसिंग के लिए आधारभूत |
| 2 | Radio Frequency (RF) Technologies | वायरलेस कम्युनिकेशन, 5G/6G | मोबाइल और नेटवर्किंग में क्रांतिकारी |
| 3 | Cyber-Secure Networking | साइबर सिक्योरिटी, डेटा प्रोटेक्शन | सुरक्षा बढ़ाने में अहम |
| 4 | Power Management Systems | बैटरी लाइफ, EV चार्जिंग | ऊर्जा दक्षता के लिए जरूरी |
| 5 | Sensors | ऑटोमोबाइल, ड्रोन, मेडिकल | रियल-टाइम डेटा कलेक्शन |
| 6 | Memory | स्टोरेज, हाई-स्पीड डेटा हैंडलिंग | AI और क्लाउड कंप्यूटिंग के लिए महत्वपूर्ण |
इन क्षेत्रों में मजबूती से भारत ड्रोन, ऑटोमोबाइल, स्पेस और डिफेंस जैसे सेक्टरों के लिए स्पेशलाइज्ड चिप्स बना सकेगा।
मौजूदा प्रगति और सरकारी पहल
- India Semiconductor Mission (ISM) के तहत ₹76,000 करोड़ का सेमिकॉन इंडिया प्रोग्राम चल रहा है।
- DLI स्कीम के तहत 24 से ज्यादा स्टार्टअप्स को सपोर्ट मिल चुका है, 16 चिप डिज़ाइन टेप-आउट हो चुके हैं और कई पेटेंट फाइल हुए हैं।
- अगले चरण में कम से कम 50 फैबलेस कंपनियों (डिज़ाइन फोकस्ड) को बढ़ावा दिया जाएगा।
- गुजरात के सानंद में Micron की ₹2.75 बिलियन फैसिलिटी फरवरी 2026 तक कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू कर सकती है।
- असम, गुजरात जैसे राज्यों में नई यूनिट्स आ रही हैं, और SCL मोहाली का आधुनिकीकरण हो रहा है।
- 2026 में Deep Tech Awards शुरू होंगे, जो सेमीकंडक्टर, AI, बायोटेक जैसे क्षेत्रों में इनोवेशन को सम्मानित करेंगे।
भविष्य की संभावनाएं
यह रोडमैप सिर्फ चिप्स बनाने तक सीमित नहीं है। भारत का लक्ष्य ग्लोबल चिप डिज़ाइन का बड़ा हिस्सा (कुछ अनुमानों में आधा तक) अपने यहां करना है। इससे AI सेवाओं में भारत पहले से ही लीडर बन सकता है। वैश्विक कंपनियां अब भारत पर भरोसा कर रही हैं, और यह आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने वाला कदम है।
कुल मिलाकर, यह नया रोडमैप भारत को टेक्नोलॉजी की दौड़ में आगे लाने का मजबूत आधार तैयार कर रहा है। आने वाले सालों में हम देखेंगे कि कैसे भारतीय चिप्स दुनिया भर के डिवाइसेज में लगेंगे!
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