भारतीय शेयर बाजार में पिछले कुछ समय से उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है, लेकिन ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म मॉर्गन स्टैनली ने अब भारतीय इक्विटी मार्केट पर काफी उत्साहजनक पूर्वानुमान जारी किया है। उनकी लेटेस्ट रिपोर्ट के अनुसार, बुल केस (सबसे अनुकूल परिस्थिति) में बीएसई सेंसेक्स दिसंबर 2026 तक 1,07,000 पॉइंट्स तक पहुंच सकता है। यह वर्तमान स्तरों से लगभग 25-27% की ऊपरी संभावना दर्शाता है।
मॉर्गन स्टैनली के तीन परिदृश्य क्या कहते हैं?
मॉर्गन स्टैनली ने भारतीय बाजार के लिए तीन अलग-अलग केस पेश किए हैं:
- बुल केस (Bull Case) — 30% संभावना: सेंसेक्स 1,07,000 तक। यह तब संभव होगा जब तेल की कीमतें लगातार 60 डॉलर प्रति बैरल से नीचे रहें, रिफ्लेशन से ग्रोथ बढ़े, और ग्लोबल ट्रेड वॉर कम हो। इसमें कमाई सालाना 19% की दर से बढ़ सकती है।
- बेस केस (Base Case) — 50% संभावना: सेंसेक्स 95,000 तक। यहां मैक्रो स्थिरता, फिस्कल कंसॉलिडेशन, प्राइवेट इन्वेस्टमेंट में बढ़ोतरी और रियल ग्रोथ बनाम रियल रेट्स में पॉजिटिव गैप जैसे फैक्टर काम करेंगे। ट्रेलिंग P/E 23.5 गुना रह सकता है।
- बेयर केस (Bear Case) — 20% संभावना: सेंसेक्स 76,000 तक गिर सकता है, अगर तेल 90 डॉलर से ऊपर जाए, आरबीआई टाइटनिंग करे, ग्लोबल ग्रोथ धीमी हो या अमेरिका में मंदी आए।
बाजार में तेजी के प्रमुख कारण क्या हैं?
मॉर्गन स्टैनली के एनालिस्ट्स रिद्धम देसाई और नयंत पारेख ने रिपोर्ट में कई मजबूत वजहें बताई हैं, जो बाजार को री-रेटिंग की ओर ले जा सकती हैं:
- कंपनियों की अर्निंग्स ग्रोथ में सुधार आने की उम्मीद।
- वैल्यूएशंस का आकर्षक स्तर और पिछले प्रदर्शन की कमजोरी, जो रिवर्सल का संकेत देती है।
- आरबीआई की ग्रोथ-ओरिएंटेड पॉलिसी — ब्याज दरों में कटौती, लिक्विडिटी बढ़ाना और बैंकिंग सिस्टम को मजबूत बनाना।
- सरकार का कैपिटल एक्सपेंडिचर पर फोकस, जीएसटी रेट्स में कटौती और प्राइवेटाइजेशन जैसे रिफॉर्म्स।
- रुपये की कमजोरी का पॉजिटिव प्रभाव।
- अमेरिका-भारत ट्रेड डील और बेहतर संबंधों से फायदा, खासकर चीन के मुकाबले।
- विदेशी निवेशकों (FII) की वापसी और नई बायबैक साइकिल की शुरुआत।
पिछले 12 महीनों में भारतीय बाजार ने इमर्जिंग मार्केट्स के मुकाबले सबसे खराब प्रदर्शन किया था, लेकिन अब मल्टी-ईयर रिबाउंड की शुरुआत हो सकती है।
निवेशकों के लिए क्या मतलब?
यह रिपोर्ट भारतीय इक्विटी में लंबी अवधि की मजबूती का संकेत देती है। अगर बेस या बुल केस सही साबित होता है, तो 2026 में अच्छे रिटर्न की उम्मीद है। हालांकि, मार्केट में जोखिम हमेशा रहते हैं — ग्लोबल फैक्टर्स, तेल की कीमतें और पॉलिसी चेंजेस पर नजर रखें।
क्या आप भी मानते हैं कि भारतीय बाजार 2026 में नया रिकॉर्ड बना सकता है? अपनी राय कमेंट्स में जरूर बताएं। निवेश से पहले अपनी रिसर्च और फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह लें।
(नोट: यह लेख मॉर्गन स्टैनली की रिपोर्ट और विभिन्न विश्वसनीय स्रोतों पर आधारित है। बाजार पूर्वानुमान अनुमान मात्र हैं, गारंटी नहीं।)
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