चांदी की कीमतों में भारी गिरावट: MCX पर 15% लोअर सर्किट लगने से बाजार में हड़कंप

30 जनवरी 2026 को कीमती धातुओं के बाजार में भारी उथल-पुथल मची हुई है। MCX (मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज) पर चांदी के वायदा भाव में अचानक तेज गिरावट आई और यह 15% के लोअर सर्किट पर पहुंच गई। वैश्विक स्तर पर भारी मुनाफावसूली (प्रॉफिट बुकिंग) और अमेरिकी डॉलर की मजबूती ने इस गिरावट को ट्रिगर किया। पिछले सत्र में चांदी ने रिकॉर्ड ऊंचाई छुई थी, लेकिन आज भारी बिकवाली से निवेशकों में घबराहट देखने को मिली।

चांदी के भाव में क्या हुआ?

  • 29 जनवरी 2026 को MCX पर चांदी का इंट्राडे हाई 4.20 लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंचा था, जो अब तक का सर्वकालिक उच्च स्तर था। सत्र अंत में यह 3.99 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुआ।
  • 30 जनवरी 2026 को गिरावट इतनी तेज रही कि चांदी के भाव 15% लोअर सर्किट पर ट्रेडिंग रोक दी गई। विभिन्न रिपोर्ट्स के अनुसार, MCX सिल्वर मार्च 2026 कॉन्ट्रैक्ट 3.32 लाख से 3.38 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास ट्रेड कर रहा है, जो पिछले क्लोज से 17% तक की गिरावट दर्शाता है।
  • स्पॉट मार्केट में भी चांदी के दाम 3.50 लाख से 3.65 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के बीच देखे जा रहे हैं (विभिन्न शहरों में थोड़ा अंतर संभव)। उदाहरण के लिए, कुछ रिपोर्ट्स में दिल्ली/मुंबई में 1 किलो चांदी 3.57 लाख से 4.03 लाख के बीच बताई गई है, लेकिन MCX फ्यूचर्स में भारी सुधार हुआ है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्थिति

ग्लोबल स्तर पर भी चांदी में भारी गिरावट आई है। COMEX सिल्वर (अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क) पिछले सत्र में 121.78 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड हाई से गिरकर 97-100 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर पहुंच गया, जो 13-15% की गिरावट है। अमेरिकी डॉलर इंडेक्स में आई रिकवरी ने कीमती धातुओं पर दबाव बढ़ाया, क्योंकि मजबूत डॉलर में ये धातुएं महंगी हो जाती हैं।

गिरावट के प्रमुख कारण

  1. भारी प्रॉफिट बुकिंग — पिछले कुछ महीनों में चांदी ने जबरदस्त रैली दिखाई। जनवरी 2025 में चांदी 1.5-1.6 लाख रुपये प्रति किलो के आसपास थी, जो 2026 में 4 लाख से ऊपर पहुंच गई — यानी 12 महीनों में 165-170% की बढ़त। महीने में ही 50% से अधिक उछाल आया था। रिकॉर्ड हाई पर पहुंचने के बाद निवेशक मुनाफा वसूल रहे हैं।
  2. अमेरिकी डॉलर की मजबूती — डॉलर में रिकवरी से सोना-चांदी जैसे एसेट्स पर नकारात्मक असर पड़ता है।
  3. वैश्विक कमोडिटी सेल-ऑफ — अन्य कमोडिटीज में भी बिकवाली देखी जा रही है, जिससे चांदी पर अतिरिक्त दबाव।
  4. इंडस्ट्रियल डिमांड और सप्लाई — चांदी की इंडस्ट्रियल मांग (सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स, EV आदि) मजबूत है, लेकिन शॉर्ट-टर्म में स्पेकुलेटिव ट्रेडिंग हावी रही।

विशेषज्ञों की राय और भविष्य का अनुमान

  • इंडसइंड सिक्योरिटीज के जिगर त्रिवेदी: प्रॉफिट बुकिंग और डॉलर रिकवरी मुख्य वजह। महीने में 50%+ बढ़त के बावजूद गिरावट आई।
  • मोतीलाल ओसवाल के मानव मोदी: घरेलू बाजार अंतरराष्ट्रीय से तेज गिरा, जिससे प्राइस पैरिटी की चिंता बढ़ी।
  • पीएल वेल्थ के राजकुमार सुब्रमण्यम: लंबे समय में आउटलुक सकारात्मक। सेफ-हेवन डिमांड, सप्लाई कमी और इंडस्ट्रियल यूज (सोलर, AI, ग्रीन एनर्जी) से चांदी मजबूत रहेगी। लेकिन वोलेटाइल है, इसलिए SIP (किस्तों में निवेश) की सलाह। आर्थिक अनिश्चितता और भू-राजनीतिक तनाव से फायदा मिल सकता है।

निवेशकों के लिए सलाह

चांदी अभी भी उच्च वोलेटिलिटी वाली एसेट है। हाल की गिरावट के बावजूद, पिछले 1 साल में इसने शानदार रिटर्न दिए हैं। अगर आप लॉन्ग-टर्म निवेशक हैं, तो यह गिरावट खरीदारी का मौका हो सकती है, लेकिन शॉर्ट-टर्म में रिस्क ज्यादा है। हमेशा अपडेटेड MCX/कॉमेक्स डेटा चेक करें और फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह लें।

(नोट: कीमतें रीयल-टाइम बदलती रहती हैं। लेटेस्ट अपडेट के लिए MCX या विश्वसनीय फाइनेंशियल प्लेटफॉर्म देखें।)

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