भारत के प्रमुख इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माता डिक्सन टेक्नोलॉजीज और सिर्मा एसजीएस टेक्नोलॉजी अब सेमीकंडक्टर और चिप कंपोनेंट्स के क्षेत्र में कदम रखने की तैयारी कर रहे हैं। यह कदम केंद्र सरकार द्वारा 2026-27 के यूनियन बजट में इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) 2.0 की घोषणा के बाद आया है। ISM 2.0 सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को मजबूत बनाने के लिए एक नया इंसेंटिव प्रोग्राम है, जो पहले के ₹76,000 करोड़ के चिप इंसेंटिव स्कीम का आगे का संस्करण है।
ISM 2.0 क्या लाता है?
पहले ISM में मुख्य फोकस असेंबली और टेस्टिंग पर था, लेकिन ISM 2.0 अब ऊपरी स्तर (upstream) क्षमताओं पर जोर देगा। इसमें शामिल हैं:
- उपकरण (equipment)
- सामग्री (materials)
- फुल-स्टैक डिजाइन
- इंडस्ट्री-लेड R&D
- स्किलिंग
- भारतीय आईपी (Intellectual Property) का निर्माण
यह नीति इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज (EMS) कंपनियों को कम मार्जिन वाली असेंबली से हटकर हाई-वैल्यू चेन में जाने का मौका दे रही है। इससे कंपनियां वर्टिकल इंटीग्रेशन के जरिए मार्जिन बढ़ा सकेंगी और इलेक्ट्रॉनिक्स वैल्यू चेन पर बेहतर कंट्रोल रख सकेंगी।
सिर्मा एसजीएस की योजना
सिर्मा एसजीएस टेक्नोलॉजी के मैनेजिंग डायरेक्टर जसबीर सिंह गुजराल ने कहा, “जिन कंपनियों ने ISM 1.0 में हिस्सा नहीं लिया, उनके लिए अब एक नया मौका है। हम नीति दिशानिर्देशों का अध्ययन करेंगे और सेमीकंडक्टर स्पेस में गंभीरता से प्रवेश करने का प्रयास करेंगे।”
कंपनी पहले से ही लैपटॉप, आईटी, टेलीकॉम हार्डवेयर और इंडस्ट्रियल इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे विविध क्षेत्रों में काम कर रही है, जिससे उसकी ग्रोथ मजबूत बनी हुई है।
डिक्सन टेक्नोलॉजीज का रुख
डिक्सन टेक्नोलॉजीज के डायरेक्टर-फाइनेंस और ग्रुप सीएफओ सौरभ गुप्ता ने बताया, “डिटेल्ड गाइडलाइंस जारी होने के बाद हम ISM 2.0 का मूल्यांकन करेंगे।”
कंपनी ने पहले भी सेमीकंडक्टर महत्वाकांक्षाओं को जाहिर किया था, जैसे विदेशी पार्टनर के साथ $3 बिलियन की डिस्प्ले फैब्रिकेशन प्लांट की योजना, हालांकि वह अभी तक पूरी नहीं हुई है। ग्लोबल मोबाइल फोन मार्केट में सुस्ती के कारण डिक्सन की रेवेन्यू में हालिया तिमाही में 28% की गिरावट आई, लेकिन लंबे समय में सेमीकंडक्टर में प्रवेश से फायदा होगा।
सेमीकंडक्टर क्षेत्र में अन्य कंपनियां
भारत में पहले से ही कई कंपनियां सेमीकंडक्टर में सक्रिय हैं:
- टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स: धोलेरा, गुजरात में चिप फैब प्लांट, मिड-2027 तक ऑपरेशनल होने की उम्मीद।
- फॉक्सकॉन (HCL ग्रुप के साथ): सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन में पार्टनरशिप।
- कायनेस टेक्नोलॉजी: आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर असेंबली और टेस्ट (OSAT) फैसिलिटी।
ये सभी ISM के पहले दौर के इंसेंटिव से लाभान्वित हैं। इंडिया इलेक्ट्रॉनिक्स एंड सेमीकंडक्टर एसोसिएशन (IESA) के प्रेसिडेंट अशोक चंदक का कहना है कि EMS कंपनियां हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग में विशेषज्ञता रखती हैं, जो मेमोरी, स्टोरेज चिप असेंबली और इंडस्ट्रियल इलेक्ट्रॉनिक्स के कंपाउंड चिप्स के लिए उपयुक्त है। इससे बिजनेस वैल्यू बढ़ेगी।
भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर के लिए महत्व
ISM 2.0 भारत को सेमीकंडक्टर हब बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। यह असेंबली-आधारित ग्रोथ से आगे बढ़कर गहन इकोसिस्टम विकसित करेगा। एनालिस्ट्स का मानना है कि सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट्स मोबाइल और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स जितने बड़े स्केल नहीं ला सकते, लेकिन लंबे समय में वर्टिकल इंटीग्रेशन से मार्जिन और कंट्रोल बढ़ेगा।
सरकार की यह पहल भारत को ग्लोबल सप्लाई चेन में मजबूत बनाएगी, आयात निर्भरता कम करेगी और हाई-वैल्यू जॉब्स पैदा करेगी। डिक्सन और सिर्मा जैसे प्रमुख खिलाड़ियों का सेमीकंडक्टर में प्रवेश भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।
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