भारतीय आईटी सेक्टर में आज भारी गिरावट देखी गई है, जहां प्रमुख कंपनियों के शेयरों में 7 प्रतिशत से अधिक की कमी आई। यह गिरावट वैश्विक टेक मार्केट में मंदी के विस्तार से जुड़ी है, जिसकी वजह से निवेशकों में चिंता फैल गई है। इंफोसिस के शेयर सबसे ज्यादा प्रभावित हुए, जो 7.5% तक लुढ़क गए, जबकि टीसीएस के शेयरों में 6% की गिरावट दर्ज की गई। एचसीएल टेक्नोलॉजीज के शेयर 5.5% नीचे आए, और विप्रो तथा टेक महिंद्रा में करीब 4.5% की कमी देखी गई। निफ्टी आईटी इंडेक्स भी 4-7% तक गिरा, जिससे सेक्टर की कुल मार्केट कैप में 1.9 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
गिरावट के पीछे प्रमुख कारण: एआई का बढ़ता खतरा और वैश्विक मंदी
यह गिरावट मुख्य रूप से अमेरिकी स्टार्टअप एन्थ्रोपिक द्वारा नए एआई टूल के लॉन्च से शुरू हुई। इस टूल ने निवेशकों में यह डर पैदा कर दिया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पारंपरिक आईटी सेवाओं को बाधित कर सकता है, जिससे कंपनियों की कमाई और मार्जिन पर दबाव बढ़ेगा। वैश्विक स्तर पर, नैस्डैक और मैग्निफिसेंट सेवन स्टॉक्स में गिरावट ने भारतीय बाजार को भी प्रभावित किया। इसके अलावा, अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों के कमजोर पड़ने और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने स्थिति को और बिगाड़ा। पिछले 16 महीनों में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय इक्विटी से करीब 34 अरब डॉलर निकाले हैं, जिसका आईटी सेक्टर पर सबसे ज्यादा असर पड़ा।
एन्थ्रोपिक के इस कदम ने सॉफ्टवेयर स्टॉक्स पर सतर्कता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि एआई की तेजी से अपनाई जा रही तकनीकें कंपनियों की प्राइसिंग पावर को कमजोर कर सकती हैं, जिससे लाभप्रदता पर खतरा मंडरा रहा है। जेफरीज ब्रोकरेज ने अपनी इंडिया पोर्टफोलियो में आईटी सेक्टर का वेट घटाकर 5.6% कर दिया, जो एमएससीआई इंडिया इंडेक्स में 9.7% से काफी कम है।
प्रमुख कंपनियों का प्रदर्शन: कितना नुकसान हुआ?
- इंफोसिस: शेयरों में 7.37% की गिरावट, जो तीन महीने के निचले स्तर पर पहुंच गए।
- टीसीएस: 6.99% नीचे, मार्केट कैप 10 लाख करोड़ रुपये से नीचे गिरा।
- एचसीएल टेक: 4.58-6.15% की कमी।
- विप्रो: 3.79-5.11% डाउन।
- टेक महिंद्रा: करीब 6% की गिरावट।
यह गिरावट लगातार तीसरे दिन जारी रही, और सेक्टर की कुल वैल्यू 30 लाख करोड़ रुपये से नीचे आ गई।
विशेषज्ञों की राय: क्या यह खरीदने का मौका है या और दर्द बाकी?
विश्लेषकों का कहना है कि घबराहट में बिकवाली से बचें, क्योंकि लंबे समय में एआई आईटी कंपनियों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है, अगर वे इसे अपनाएं। हालांकि, डॉ. वीके विजयकुमार जैसे विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि एन्थ्रोपिक के प्रभाव से रिकवरी जल्दी नहीं होगी। कुछ ब्रोकरेज हाउस इसे “बाय द डिप” का अवसर मानते हैं, लेकिन विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और वैश्विक मांग में कमजोरी से और गिरावट की आशंका है।
पिछले दो वर्षों में, टीसीएस 32% तक गिरा है, जबकि इंफोसिस 17% और विप्रो 13% नीचे आया। टेक महिंद्रा ने हालांकि ट्रेंड को तोड़ा है।
आगे की राह: निवेशकों के लिए सलाह
आईटी सेक्टर में अस्थिरता बनी रह सकती है, खासकर एआई से जुड़े विकासों के कारण। निवेशकों को लंबी अवधि के नजरिए से देखना चाहिए और विविधीकरण पर ध्यान दें। अगर आप आईटी स्टॉक्स में निवेश कर रहे हैं, तो कंपनी की एआई अनुकूलन क्षमता को जांचें। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, यह संकट आईटी कंपनियों को नवाचार के लिए प्रेरित कर सकता है, लेकिन निकट भविष्य में और दबाव संभव है।
यह स्थिति भारतीय शेयर बाजार को कैसे प्रभावित करेगी, इस पर नजर रखें। अधिक अपडेट के लिए फॉलो करें!
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