बैंक खाते में तय सीमा से कम पैसा रखने पर लगने वाला जुर्माना यानी “मिनिमम एवरेज बैलेंस” (MAB) पेनल्टी, आम भारतीय ग्राहकों के लिए एक बड़ी और लगातार बढ़ती समस्या बनती जा रही है। हाल ही में सरकार ने संसद में इस बारे में चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए हैं, जिनसे पता चलता है कि निजी और सरकारी दोनों तरह के बैंकों ने पिछले कुछ वर्षों में ग्राहकों से भारी-भरकम रकम जुर्माने के रूप में वसूली है। इस लेख में हम पूरी जानकारी विस्तार से समझेंगे — किस बैंक ने कितना पैसा वसूला, यह जुर्माना क्यों लगता है, और ग्राहक इससे कैसे बच सकते हैं।
संसद में पेश हुए चौंकाने वाले आंकड़े
राज्यसभा में एक सांसद के सवाल के जवाब में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बताया कि पिछले पांच वित्त वर्षों के दौरान देशभर के बैंकों ने मिनिमम एवरेज बैलेंस न रखने पर ग्राहकों से करीब 27,973 करोड़ रुपये की वसूली की है। यह आंकड़ा भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और सरकारी बैंकों से मिली जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है।
इस कुल राशि में से:
- सरकारी बैंकों (PSBs) ने पांच साल में करीब 12,033 करोड़ रुपये वसूले।
- निजी बैंकों (Private Banks) ने चार साल (वित्त वर्ष 2022-23 से 2025-26 तक, अस्थायी आंकड़े) में करीब 15,940 करोड़ रुपये वसूले।
यानी कम अवधि में भी निजी बैंकों ने सरकारी बैंकों से कहीं ज्यादा जुर्माना अपने ग्राहकों से वसूला है।
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निजी बैंकों में HDFC Bank सबसे आगे
निजी क्षेत्र के बैंकों की बात करें तो इस मामले में HDFC Bank सबसे ऊपर है। वित्त वर्ष 2022-23 से 2025-26 (अस्थायी) के बीच बैंक ने ग्राहकों से करीब 5,670 करोड़ रुपये जुर्माने के तौर पर वसूले हैं। यह किसी भी अन्य निजी बैंक के मुकाबले सबसे अधिक राशि है।
इसके बाद नंबर आता है:
| बैंक | वसूला गया जुर्माना (करोड़ रुपये में, चार वर्ष) |
|---|---|
| HDFC Bank | लगभग 5,670 |
| Axis Bank | लगभग 3,787 |
| ICICI Bank | लगभग 1,578 |
| Kotak Mahindra Bank | लगभग 998 |
गौर करने वाली बात यह है कि RBI के अनुसार निजी बैंकों का वित्त वर्ष 2022-23 से पहले का पूरा डेटा उपलब्ध नहीं है, इसलिए यह आंकड़े केवल चार वर्षों के लिए ही दर्शाए गए हैं।
सरकारी बैंकों में बैंक ऑफ बड़ौदा सबसे आगे
सरकारी बैंकों की सूची में बैंक ऑफ बड़ौदा (Bank of Baroda) ने सबसे ज्यादा जुर्माना वसूला है। पांच वर्षों में बैंक ने अपने ग्राहकों से करीब 2,029 करोड़ रुपये वसूले।
सरकारी बैंकों की पूरी सूची इस प्रकार है:
| बैंक | वसूला गया जुर्माना (करोड़ रुपये में, पांच वर्ष) |
|---|---|
| Bank of Baroda | लगभग 2,029 |
| Punjab National Bank | लगभग 1,896 |
| Indian Bank | लगभग 1,777 |
| State Bank of India | लगभग 1,601 |
| Canara Bank | लगभग 1,524 |
SBI को लेकर एक जरूरी बात
आंकड़ों में एक महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण भी दिया गया है। भारत के सबसे बड़े बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने मार्च 2020 से ही बचत खातों (Savings Accounts) पर मिनिमम बैलेंस न रखने पर लगने वाला जुर्माना पूरी तरह समाप्त कर दिया है। इसलिए SBI के आंकड़े केवल चालू खातों (Current Accounts) से जुड़े जुर्माने को दर्शाते हैं, बचत खातों को नहीं।
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दस सरकारी बैंकों ने बंद किया बचत खातों पर जुर्माना
सरकार ने संसद में यह भी जानकारी दी कि देश के कुल 12 सरकारी बैंकों में से 10 बैंकों ने बचत खातों पर मिनिमम बैलेंस न रखने पर लगने वाला जुर्माना पूरी तरह बंद कर दिया है। यह कदम ग्राहक-केंद्रित और समावेशी बैंकिंग (Customer-Centric and Inclusive Banking) को बढ़ावा देने के मकसद से उठाया गया बताया जा रहा है। हालांकि, बाकी बचे दो सरकारी बैंकों ने अपनी स्वीकृत नीतियों के अनुसार यह चार्ज तर्कसंगत तरीके से जारी रखा है।
वहीं दूसरी ओर, निजी क्षेत्र के अधिकांश बड़े बैंक अब भी अपने खाता संबंधी नियमों और शर्तों के तहत यह जुर्माना वसूल रहे हैं।
मिनिमम एवरेज बैलेंस (MAB) आखिर होता क्या है?
मिनिमम एवरेज बैलेंस या MAB वह न्यूनतम औसत राशि है, जिसे ग्राहक को एक निश्चित अवधि — आमतौर पर एक महीने — के दौरान अपने बैंक खाते में बनाए रखना जरूरी होता है। अगर इस अवधि में खाते का औसत बैलेंस तय सीमा से कम हो जाता है, तो बैंक ग्राहक पर पेनल्टी लगा सकता है।
यह न्यूनतम बैलेंस राशि हर बैंक और हर शहर (मेट्रो, शहरी, अर्ध-शहरी, ग्रामीण) के हिसाब से अलग-अलग होती है। बड़े शहरों की शाखाओं में यह राशि आमतौर पर अधिक और ग्रामीण इलाकों में कम रखी जाती है।
ग्राहकों के लिए इसका क्या मतलब है?
इन आंकड़ों से यह साफ है कि करोड़ों बचत और चालू खाताधारकों को, खासकर निजी बैंकों में, हर साल इस पेनल्टी के चलते अच्छी-खासी रकम गंवानी पड़ रही है। ऐसे में ग्राहकों के लिए कुछ जरूरी बातें समझना फायदेमंद हो सकता है:
- अपने बैंक की न्यूनतम बैलेंस सीमा जरूर जानें — यह हर बैंक और खाता प्रकार में अलग हो सकती है।
- जीरो बैलेंस खातों का विकल्प देखें — जैसे बेसिक सेविंग्स बैंक डिपॉजिट अकाउंट (BSBDA) या प्रधानमंत्री जन धन योजना खाते, जिन पर कोई न्यूनतम बैलेंस शर्त नहीं होती।
- खाते की नियमित निगरानी करें — नेट बैंकिंग या मोबाइल ऐप के जरिए बैलेंस पर नजर रखने से जुर्माने से बचा जा सकता है।
- जरूरत न होने पर सुस्त पड़े खातों को बंद करें — जिन खातों का इस्तेमाल नहीं हो रहा, उन पर अनावश्यक जुर्माना लगने की आशंका रहती है।
- सैलरी अकाउंट का लाभ उठाएं — अधिकतर सैलरी खातों में न्यूनतम बैलेंस की शर्त नहीं होती।
निष्कर्ष
सरकार द्वारा संसद में साझा किए गए इन आंकड़ों ने एक बार फिर मिनिमम एवरेज बैलेंस से जुड़े नियमों पर बहस को हवा दे दी है। जहां अधिकतर सरकारी बैंकों ने बचत खातों पर यह जुर्माना खत्म कर आम ग्राहकों को राहत दी है, वहीं HDFC Bank और Axis Bank जैसे बड़े निजी बैंक अब भी इससे बड़ी कमाई कर रहे हैं। ऐसे में ग्राहकों को अपने खाते की शर्तों को ध्यान से समझना और समय-समय पर बैलेंस पर नजर रखना बेहद जरूरी हो गया है, ताकि अनावश्यक जुर्माने से बचा जा सके।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. मिनिमम एवरेज बैलेंस (MAB) पेनल्टी क्या है?
Ans: यह वह जुर्माना है जो बैंक तब लगाता है जब ग्राहक अपने खाते में एक तय अवधि के दौरान न्यूनतम औसत राशि बनाए रखने में असफल रहता है।
2. किस निजी बैंक ने सबसे ज्यादा मिनिमम बैलेंस जुर्माना वसूला है?
Ans: सरकारी आंकड़ों के अनुसार, निजी बैंकों में HDFC Bank ने सबसे ज्यादा जुर्माना वसूला है, उसके बाद Axis Bank का स्थान है।
3. सरकारी बैंकों में सबसे ज्यादा जुर्माना किसने वसूला?
Ans: सरकारी बैंकों में Bank of Baroda ने सबसे अधिक मिनिमम बैलेंस जुर्माना वसूला है।
4. क्या SBI बचत खातों पर मिनिमम बैलेंस जुर्माना लेता है?
Ans: नहीं, SBI ने मार्च 2020 से बचत खातों पर यह जुर्माना पूरी तरह बंद कर दिया है। अब यह जुर्माना केवल चालू खातों पर लागू होता है।
5. मिनिमम बैलेंस जुर्माने से कैसे बचा जा सकता है?
Ans: नियमित रूप से बैलेंस चेक करके, जीरो बैलेंस खाता खुलवाकर या सैलरी अकाउंट का उपयोग करके इस जुर्माने से बचा जा सकता है।
यह लेख संसद में साझा किए गए सरकारी आंकड़ों और सार्वजनिक समाचार रिपोर्टों पर आधारित है। सटीक और अद्यतन जानकारी के लिए संबंधित बैंक की आधिकारिक वेबसाइट देखें।
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