SIP ने बनाया नया रिकॉर्ड! Equity Mutual Fund AUM में हिस्सेदारी 29% के पार, जानिए निवेशकों के लिए क्या है मतलब

मई 2026 में SIP का Equity Mutual Fund AUM में हिस्सा 29% के पार पहुंच गया। जानिए SIP निवेश, DII, FPI, Passive Funds और छोटे शहरों से बढ़ते निवेश का पूरा विश्लेषण।

भारतीय म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिए निवेश लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है। फ्रैंकलिन टेम्पलटन इंडिया म्यूचुअल फंड की मई 2026 की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, इक्विटी म्यूचुअल फंड AUM (Assets Under Management) में SIP की हिस्सेदारी बढ़कर 29% से अधिक हो गई है। यह पिछले कई वर्षों का सबसे ऊंचा स्तर है और यह दर्शाता है कि भारतीय निवेशकों का भरोसा नियमित निवेश पर लगातार मजबूत हो रहा है।

इक्विटी AUM में 12.7% की शानदार बढ़ोतरी

रिपोर्ट के मुताबिक, मई 2025 में इक्विटी म्यूचुअल फंड का कुल AUM 32.10 लाख करोड़ रुपये था, जो मई 2026 तक बढ़कर 36.18 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। यानी एक साल में करीब 12.7% की वृद्धि दर्ज की गई।

वहीं, SIP के जरिए जमा होने वाला कुल AUM भी 14.61 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 17.12 लाख करोड़ रुपये हो गया, जो लगभग 17% की सालाना वृद्धि को दर्शाता है।

हर महीने SIP में रिकॉर्ड निवेश

मई 2026 में निवेशकों ने SIP के माध्यम से 30,954 करोड़ रुपये का निवेश किया। पिछले वर्ष मई 2025 में यह आंकड़ा 26,688 करोड़ रुपये था। यानी सिर्फ एक साल में मासिक SIP निवेश में करीब 16% की बढ़ोतरी हुई है।

सबसे दिलचस्प बात यह है कि पिछले तीन वर्षों से भी कम समय में मासिक SIP निवेश लगभग दोगुना हो चुका है।

इसके अलावा—

  • सक्रिय SIP खातों की संख्या: 10.47 करोड़
  • सालाना वृद्धि: 15.6%
  • औसत मासिक SIP राशि: ₹2,957

ये आंकड़े बताते हैं कि अधिक से अधिक निवेशक नियमित निवेश को अपनी वित्तीय योजना का हिस्सा बना रहे हैं।

बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद निवेशकों का भरोसा कायम

हाल के महीनों में शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिला, लेकिन इसका असर SIP निवेश पर बहुत कम पड़ा। रिपोर्ट के अनुसार, निवेशकों ने बाजार की अस्थिरता के बावजूद SIP जारी रखा, जो उनके अनुशासित और दीर्घकालिक निवेश दृष्टिकोण को दर्शाता है।

वित्त वर्ष 2017 से वित्त वर्ष 2026 के बीच वार्षिक SIP निवेश में लगभग 26% की CAGR से वृद्धि हुई है। इस दौरान SIP निवेश करीब 7 गुना बढ़कर 3.50 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया।

FY27 की शुरुआत भी शानदार रही है। वित्त वर्ष के पहले दो महीनों में ही SIP के जरिए 60,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश दर्ज किया गया।

विदेशी निवेशकों से आगे निकले घरेलू निवेशक

रिपोर्ट का एक महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह भी है कि अब भारतीय शेयर बाजार में घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है।

पिछले 12 महीनों (मई 2026 तक) में—

  • DIIs का शुद्ध निवेश: 8.9 लाख करोड़ रुपये
  • FPIs की शुद्ध निकासी: 4.7 लाख करोड़ रुपये

यह स्पष्ट संकेत है कि भारतीय शेयर बाजार अब विदेशी निवेशकों की तुलना में घरेलू निवेशकों और SIP के जरिए आने वाले रिटेल निवेश पर अधिक निर्भर होता जा रहा है।

पैसिव फंड्स की लोकप्रियता भी बढ़ी

सिर्फ एक्टिव फंड ही नहीं, बल्कि पैसिव फंड्स में भी निवेश तेजी से बढ़ रहा है।

  • मई 2025 में पैसिव AUM: 11.97 लाख करोड़ रुपये
  • मई 2026 में पैसिव AUM: 14.77 लाख करोड़ रुपये
  • वार्षिक वृद्धि: करीब 23%

इसके साथ ही कुल म्यूचुअल फंड AUM में पैसिव फंड्स की हिस्सेदारी मई 2022 के 14% से बढ़कर 18% हो गई है।

किन कैटेगरी में सबसे ज्यादा निवेश आया?

पिछले 12 महीनों में निवेशकों की सबसे अधिक पसंद फ्लेक्सी कैप फंड रहे।

  • Flexi Cap Funds: ₹95,154 करोड़ का शुद्ध निवेश
  • मई 2026 में अकेले: ₹5,176 करोड़

हाइब्रिड फंड्स में Multi Asset Allocation Funds ने भी शानदार प्रदर्शन किया।

  • पिछले 12 महीनों में निवेश: ₹69,219 करोड़
  • मई 2026 में निवेश: ₹3,929 करोड़

छोटे शहरों से भी बढ़ रहा है निवेश

म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री अब सिर्फ महानगरों तक सीमित नहीं है। छोटे शहरों से भी निवेशकों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है।

  • B15 शहरों की हिस्सेदारी मार्च 2021 के 29.6% से बढ़कर मार्च 2026 में 29.8% हो गई।
  • B30 शहरों में AUM वृद्धि 23% रही।
  • वहीं Top-30 (T30) शहरों में यह वृद्धि 19% दर्ज की गई।

यह ट्रेंड दर्शाता है कि वित्तीय जागरूकता अब देश के छोटे शहरों तक तेजी से पहुंच रही है।

निवेशकों के लिए इसका क्या मतलब है?

इन आंकड़ों से साफ संकेत मिलता है कि भारतीय निवेशक अब लंबी अवधि के अनुशासित निवेश को प्राथमिकता दे रहे हैं। बाजार में अस्थिरता के बावजूद SIP के जरिए नियमित निवेश जारी रखना भविष्य में बेहतर वेल्थ क्रिएशन की मजबूत रणनीति बनता जा रहा है।

यदि आप भी लंबी अवधि के लिए निवेश करना चाहते हैं, तो SIP एक ऐसा माध्यम है जो बाजार के उतार-चढ़ाव के बीच भी निवेश की आदत बनाए रखने में मदद करता है।

निष्कर्ष

फ्रैंकलिन टेम्पलटन इंडिया की यह रिपोर्ट बताती है कि भारत में SIP निवेश केवल बढ़ ही नहीं रहा, बल्कि निवेशकों की पहली पसंद बनता जा रहा है। बढ़ता SIP AUM, रिकॉर्ड मासिक निवेश, छोटे शहरों से बढ़ती भागीदारी और घरेलू निवेशकों की मजबूत मौजूदगी यह संकेत देती है कि भारतीय म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री आने वाले वर्षों में और अधिक मजबूत हो सकती है।

अस्वीकरण (Disclaimer): यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। इसे निवेश सलाह न समझें। किसी भी निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य करें।

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