देश के सबसे बड़े FMCG समूहों में से एक ITC Limited ने एक ऐसा कदम उठाया है जिसने पूरी बेवरेज इंडस्ट्री में हलचल मचा दी है। कंपनी ने अपने जाने-माने ब्रांड B Natural के तहत Coconut Cola नाम की एक प्रीमियम कार्बोनेटेड ड्रिंक लॉन्च की है — और इसे बनाया गया है असली टेंडर कोकोनट वाटर यानी नारियल पानी से।
यह कदम इसलिए और भी खास हो जाता है क्योंकि ITC ने इस प्रोडक्ट को शुरुआत में Quick Commerce प्लेटफॉर्म्स पर लॉन्च किया है, जिसके बाद इसे धीरे-धीरे व्यापक बाजार में उतारा जाएगा।
कीमत और पोजिशनिंग — प्रीमियम, मगर समझदारी से
ITC ने Coconut Cola को 250ml के कैन में ₹60 की कीमत पर पेश किया है, जबकि Diet Coke और Pepsi Black जैसे प्रतिस्पर्धी उत्पाद 300ml के लिए करीब ₹40 में उपलब्ध हैं। यानी ITC ने जानबूझकर प्रीमियम सेगमेंट को निशाना बनाया है — वो ग्राहक जो स्वास्थ्य के प्रति सजग हैं और कुछ नया, कुछ अलग आजमाने के लिए थोड़ा अधिक खर्च करने को तैयार हैं।
यह रणनीति उन लोगों को ध्यान में रखकर बनाई गई है जो पारंपरिक कोला से दूर जाकर हेल्दी विकल्प खोज रहे हैं, लेकिन फिज और रिफ्रेशमेंट का मज़ा भी नहीं छोड़ना चाहते।
एक नई जंग का आगाज़
ITC का यह कदम भारत के कार्बोनेटेड बेवरेज बाजार में प्रतिस्पर्धा को और तीव्र कर देता है, जहां पहले से Coca-Cola और PepsiCo जैसी दिग्गज कंपनियां राज करती हैं। इसके साथ ही यह Dabur के Real Activ जैसे हेल्थ ड्रिंक ब्रांड्स को भी टक्कर देगा, जो लगभग इसी मूल्य दायरे में उपलब्ध हैं।
मज़ेदार बात यह है कि ITC पहले से B Natural ब्रांड के ज़रिए जूस सेगमेंट में सक्रिय था। अब नारियल पानी आधारित कोला के साथ वह पहली बार सीधे कार्बोनेटेड ड्रिंक के मैदान में उतरा है — और वह भी एक ऐसी प्रोडक्ट के साथ जो परंपरागत Cola से बिल्कुल अलग पहचान रखती है।
Zero-Sugar लहर पर सवार ITC
भारत में Zero और Low Sugar बेवरेज की हिस्सेदारी CY2020 में महज 5% थी, जो CY2025 तक बढ़कर करीब 30% तक पहुंच गई है। इस तेज़ी से बढ़ते सेगमेंट में जगह बनाना ITC की सोची-समझी बिज़नेस चाल है। Coconut Cola को शुगर-फ्री कैटेगरी में रखा गया है, जो आज की Health-Conscious पीढ़ी की पहली पसंद बन रही है।
ITC का FMCG में बड़ा दांव
ITC ने पिछले पांच वर्षों में अपने FMCG कारोबार में करीब ₹3,400 करोड़ का निवेश किया है। FMCG पर खर्च होने वाले कैपेक्स का अनुपात FY21 में 4% से बढ़कर FY26 में 5.3% हो गया है। यह आंकड़ा बताता है कि कंपनी अपने सिगरेट और होटल व्यवसाय से आगे बढ़कर FMCG को भविष्य की असली ताकत मानती है।
आगे क्या?
ITC की योजना है कि Coconut Cola की सफलता के बाद वह अपने कार्बोनेटेड बेवरेज पोर्टफोलियो को और नए फ्लेवर, वेरिएंट्स और पैक साइज़ के साथ विस्तार दे। यानी यह सिर्फ एक प्रोडक्ट लॉन्च नहीं, बल्कि एक पूरी नई श्रेणी में ITC का दीर्घकालिक इरादा है।
निष्कर्ष — असली फ़िज़ तो अभी शुरू हुई है
भारतीय उपभोक्ता आज सिर्फ ‘ठंडा मतलब Coca-Cola’ वाली सोच से बाहर निकल रहा है। वह चाहता है — स्वाद भी, सेहत भी। ITC ने Coconut Cola के ज़रिए ठीक इसी खाई को भरने की कोशिश की है। अब देखना यह है कि क्या यह ड्रिंक सिर्फ Quick Commerce की स्क्रीन तक सीमित रहती है, या फिर गली-मोहल्ले की दुकानों पर भी अपनी जगह बनाती है।
एक बात तय है — भारत का कोला बाजार अब पहले जैसा नहीं रहेगा।
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