PPFAS म्यूचुअल फंड (Parag Parikh Financial Advisory Services) के चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर (इक्विटी) और डायरेक्टर राजीव ठक्कर अपनी सीधी, बिना लाग-लपेट वाली “लेटर टू यूनिटहोल्डर्स” के लिए जाने जाते हैं। अगस्त 2026 में लिखे गए अपने ताजा नोट में उन्होंने निवेशकों की उन चिंताओं का सीधा जवाब दिया है, जो Parag Parikh Flexi Cap Fund के हाल के कमजोर रिलेटिव रिटर्न को लेकर उठ रही थीं। साथ ही, एक अलग नोट में उन्होंने यह भी समझाया कि PPFAS ने OpenAI या Anthropic जैसी कंपनियों में सीधा निवेश क्यों नहीं किया है। इस लेख में हम राजीव ठक्कर की इस लेटेस्ट चिट्ठी के मुख्य बिंदुओं को विस्तार से समझेंगे।
कमजोर रिटर्न पर राजीव ठक्कर की सफाई: “यह घबराने की बात नहीं”
अपने 4 अगस्त 2026 के नोट में राजीव ठक्कर ने साफ कहा कि हाल के कमजोर रिलेटिव रिटर्न का मतलब यह नहीं है कि PPFAS की लॉन्ग-टर्म निवेश प्रक्रिया फेल हो गई है। उनका कहना था कि पिछले करीब दो वर्षों से भारतीय शेयर बाजार बड़े पैमाने पर रेंज-बाउंड (सीमित दायरे में) बना हुआ है।
PPFAS की रणनीति और बेंचमार्क से फासला क्यों बनता है?
ठक्कर ने समझाया कि PPFAS अक्सर उन कंपनियों या सेक्टर्स में निवेश करता है जो फिलहाल “आउट ऑफ फेवर” यानी बाजार की नजर में कम लोकप्रिय होते हैं। जब लोकप्रिय (popular) स्टॉक्स लगातार ऊपर जाते रहते हैं और अंडरवैल्यूड होल्डिंग्स को नजरअंदाज किया जाता रहता है, तब फंड और तेजी से भागते बेंचमार्क के बीच एक असहज सा फासला बन जाता है।
उनके शब्दों में इसका सार यही था कि ऐसे दौर में रिलेटिव रिटर्न देखने में अच्छे नहीं लगते, और ऐसे फेज तीन महीने, एक साल, या उससे भी ज्यादा लंबे समय तक चल सकते हैं — यह इस बात पर निर्भर करता है कि बाजार कब उस वैल्यू को पहचानता है जो फंड को दिखाई दे रही है।
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क्या बड़ा AUM ही कमजोर परफॉर्मेंस की वजह है?
एक बड़ा तर्क जो अक्सर दिया जाता है, वह यह है कि फंड का बड़ा एसेट साइज (AUM) उसकी परफॉर्मेंस को धीमा कर देता है। राजीव ठक्कर ने इस दावे को खारिज किया। उन्होंने 2007 का उदाहरण याद दिलाया, जब उनकी पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विस (PMS) महज ₹100 करोड़ से थोड़ा ज्यादा की थी, और उस समय भी उन्हें इससे भी गहरे अंडरपरफॉर्मेंस का सामना करना पड़ा था। उनका तर्क था कि मौजूदा दौर स्केल के लिहाज से कोई असाधारण बात नहीं है।
कैश एलोकेशन: 25% से घटकर 14-15% पर क्यों आया?
राजीव ठक्कर के नोट का सबसे दिलचस्प हिस्सा Parag Parikh Flexi Cap Fund के कैश लेवल से जुड़ा है।
| मापदंड | आंकड़ा |
|---|---|
| रेंज-बाउंड मार्केट अवधि | लगभग 2 साल |
| 2007 में PMS एसेट्स | ₹100 करोड़ से थोड़ा ज्यादा |
| पीक कैश एलोकेशन | करीब 25% |
| मौजूदा कैश एलोकेशन | करीब 14%-15% |
| भविष्य में संभावित कैश लेवल | सिंगल डिजिट (10% से कम) |
फंड का कैश एलोकेशन करीब 25% से घटकर 14-15% पर आ गया है। इसका मतलब है कि फंड मैनेजमेंट को अब बाजार में पहले से ज्यादा ऐसे स्टॉक्स दिख रहे हैं, जो खरीदने लायक (attractive) कीमत पर उपलब्ध हैं। ठक्कर के अनुसार, यह किसी तुरंत आने वाली रैली की भविष्यवाणी नहीं है, बल्कि यह दिखाता है कि समय और कीमत में करेक्शन के बाद वैल्यूएशन धीरे-धीरे ज्यादा व्यावहारिक (workable) होते जा रहे हैं।
निवेश के अवसर क्यों बढ़ रहे हैं?
ठक्कर ने कहा कि पिछले करीब दो वर्षों में पूरे बाजार में हुए “टाइम करेक्शन” और कुछ हिस्सों में हुए “प्राइस करेक्शन” के संयोजन से उपलब्ध निवेश अवसरों का दायरा (opportunity set) बढ़ रहा है। उनका कहना था कि उपलब्ध अवसर बढ़ रहे हैं, और आगे के रिटर्न को लेकर नजरिया बेहतर होता दिख रहा है — यह उस सावधानी और ऊंचे कैश लेवल से बिल्कुल उलट है, जो PPFAS ने 2024 के मार्केट उत्साह (exuberance) के दौरान अपनाया था।
इक्विटी बनाम फिक्स्ड डिपॉजिट: वोलैटिलिटी को सही तरीके से समझें
राजीव ठक्कर ने यह भी समझाया कि इक्विटी में उतार-चढ़ाव (volatility) ही वह वजह है, जिसके कारण लंबी अवधि में शेयर, फिक्स्ड डिपॉजिट से बेहतर रिटर्न दे पाते हैं। उन्होंने निवेशकों को आगाह किया कि शॉर्ट टर्म होल्डिंग पीरियड में बदलते हुए मार्केट रिटर्न की तुलना बैंक डिपॉजिट की पूर्वानुमेय (predictable) इनकम से सीधे नहीं करनी चाहिए।
PPFAS को फिलहाल कहां वैल्यू दिख रही है?
राजीव ठक्कर ने साफ किया कि फंड हाउस सिर्फ एक “फैशनेबल” थीम पर निर्भर नहीं है। उनके मौजूदा विचारों में शामिल हैं:
- IT-सर्विसेज की कमजोरी को अवसर के रूप में देखना, न कि किसी अस्तित्व संबंधी संकट के रूप में।
- AI से कुछ काम खत्म होने की उम्मीद, लेकिन साथ ही साइबर सिक्योरिटी जैसे दूसरे क्षेत्रों में नई मांग पैदा होने का भरोसा।
- HDFC बैंक को लेकर चिंताओं के बावजूद चार प्राइवेट सेक्टर बैंकों में होल्डिंग बरकरार रखना।
- सिर्फ मौजूदा फैशनेबल मार्केट थीम्स के आधार पर निवेश करने से बचना।
HDFC बैंक को लेकर ठक्कर ने कहा कि PPFAS की रणनीति में कोई बदलाव नहीं हुआ है। अब तक सामने आई जानकारी के आधार पर, उनका मानना है कि HDFC बैंक की मौजूदा दिक्कतें उसकी फ्रेंचाइज़ी या ग्राहक आधार के लिए किसी बड़े खतरे का संकेत नहीं देतीं।
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राजीव ठक्कर ने OpenAI और Anthropic में निवेश क्यों नहीं किया?
अपने एक अलग नोट में राजीव ठक्कर ने यूनिटहोल्डर्स को यह भी समझाया कि PPFAS ने OpenAI या Anthropic जैसी शुद्ध रूप से AI मॉडल बनाने वाली कंपनियों में सीधा निवेश क्यों नहीं किया है।
AI की दौड़ अब दो-खिलाड़ियों वाला खेल नहीं रही
ठक्कर के अनुसार, पिछले एक साल में इस सेगमेंट का प्रतिस्पर्धी परिदृश्य काफी बदल गया है। शुरुआत में ऐसा लगता था कि OpenAI और ChatGPT ही इस रेस में सबसे आगे रहेंगे, लेकिन अब OpenAI/ChatGPT, Anthropic/Claude, Gemini, Grok, Llama, DeepSeek, Kimi, GLM, Qwen जैसे कई नाम इस क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं।
उनका मानना है कि अब यह जरूरी नहीं कि सबसे नया और सबसे बेहतरीन मॉडल ही एकमात्र विजेता बने — बल्कि सोवरेनिटी (डेटा नियंत्रण), एक्सेस, प्रति-टोकन और प्रति-टास्क लागत, स्पीड, डेटा प्राइवेसी जैसे कई और पहलू भी अहम भूमिका निभाएंगे। उन्होंने साफ कहा कि PPFAS की खुशकिस्मती है कि उसका OpenAI या Anthropic जैसी शुद्ध AI मॉडल कंपनियों में कोई सीधा एक्सपोजर नहीं है।
हाइपरस्केलर्स को प्राथमिकता क्यों?
किसी एक AI मॉडल के भाग्य पर निर्भर कंपनियों में निवेश करने के बजाय, PPFAS ने हाइपरस्केलर्स को चुना है — यानी वे कंपनियां जो बड़े डेटा सेंटर चलाती हैं और एंटरप्राइज ग्राहकों को क्लाउड कंप्यूटिंग व AI कंप्यूटिंग सेवाएं देती हैं।
ठक्कर ने बताया कि इन कंपनियों की कमाई सिर्फ AI तक सीमित नहीं है:
- Microsoft के पास अभी भी मजबूत एंटरप्राइज सॉफ्टवेयर बिजनेस है।
- Amazon के पास ई-कॉमर्स और पारंपरिक क्लाउड बिजनेस दोनों हैं।
- Google के पास डिजिटल विज्ञापन और सब्सक्रिप्शन बिजनेस मौजूद है।
AI से जुड़े भारी कैपिटल एक्सपेंडिचर (capex) को लेकर उठाई जा रही चिंताओं पर ठक्कर ने कहा कि यह खर्च सट्टे पर नहीं, बल्कि ग्राहकों की बढ़ती मांग पर आधारित है। उन्होंने माना कि ओवर-इन्वेस्टमेंट का कुछ जोखिम जरूर मौजूद है, लेकिन उनका मानना है कि ओवर-कैपेसिटी स्थायी नहीं रहेगी — समय के साथ वर्कलोड बढ़ने पर यह क्षमता इस्तेमाल में आ जाएगी, भले ही इसमें कुछ समय के लिए कैपेक्स में सुस्ती आ सकती है।
AI चिप निर्माताओं से दूरी क्यों?
राजीव ठक्कर ने यह भी बताया कि PPFAS ने AI चिप और मेमोरी बनाने वाली कंपनियों में भी निवेश नहीं किया, जो AI बूम के सबसे बड़े लाभार्थियों में से एक रही हैं। उनके अनुसार, इस सेगमेंट में मांग और मार्जिन दोनों काफी ऊपर पहुंच गए हैं, और यह लगभग सर्वसम्मत राय है कि मौजूदा तेजी चक्रीय (cyclical) प्रकृति की है, यानी आगे चलकर प्रॉफिट मार्जिन सामान्य स्तर पर वापस आ सकते हैं (mean revert)। उन्होंने स्वीकार किया कि PPFAS को इस सेगमेंट की तेजी का फायदा नहीं मिला, लेकिन अगर यहां चक्रीय गिरावट आती है, तो फंड को उतना नुकसान झेलने की संभावना भी कम है।
निवेश दर्शन नहीं बदलेगा
राजीव ठक्कर ने अपने नोट के अंत में दोहराया कि PPFAS हमेशा वैल्यूएशन और रिस्क-रिवॉर्ड के आधार पर निवेश करता रहेगा, न कि बाजार की कहानियों या फैशनेबल थीम्स को देखकर। उन्होंने कहा कि फंड हाउस डिफेंस, एनर्जी ट्रांजिशन, AI, फिनटेक जैसे ट्रेंड्स से अनजान नहीं है, लेकिन निवेश सिर्फ वहीं किया जाएगा जहां आकर्षक और एक्शनेबल आइडिया मिलेंगे, न कि केवल इसलिए कि कोई थीम फिलहाल चर्चा में है।
निवेशकों के लिए इस लेटर से क्या सीख मिलती है?
राजीव ठक्कर की यह लेटेस्ट चिट्ठी किसी तुरंत रिकवरी का वादा नहीं करती, बल्कि यह समझाती है कि एक वैल्यू-ओरिएंटेड पोर्टफोलियो कई बार बेंचमार्क से पीछे क्यों रह सकता है, खासकर जब अलोकप्रिय होल्डिंग्स को पहचान मिलने में समय लगता है।
इस लेटर से मिलने वाले मुख्य सबक इस प्रकार हैं:
- सिर्फ एसेट साइज कमजोर परफॉर्मेंस की पूरी वजह नहीं होता — यह कई अन्य कारकों पर भी निर्भर करता है।
- कैश तभी घटता है जब फंड मैनेजर को उचित कीमत पर निवेश के अवसर दिखते हैं — मौजूदा गिरता हुआ कैश लेवल इसी का संकेत है।
- रिलेटिव रिटर्न कमजोर बने रह सकते हैं, इससे पहले कि कॉन्ट्रेरियन (विपरीत सोच वाली) पोजीशंस काम करें।
- थीम आधारित निवेश से बचना जरूरी है — चाहे वह AI हो या कोई और चर्चित सेक्टर, निवेश का आधार वैल्यूएशन और रिस्क-रिवॉर्ड ही होना चाहिए।
आगे क्या देखना चाहिए?
Parag Parikh Flexi Cap Fund का कैश लेवल आने वाले समय में सबसे स्पष्ट संकेतक साबित होगा। अगर यह सिंगल डिजिट पर पहुंचता है, तो इसका मतलब होगा कि फंड ने ज्यादा पूंजी तैनात कर दी है। पोर्टफोलियो डिस्क्लोजर से यह भी पता चलेगा कि फंड IT सर्विसेज, प्राइवेट लेंडर्स या किसी और क्षेत्र में अपनी होल्डिंग बढ़ा रहा है या नहीं।
PPFAS की निवेश रणनीति जानबूझकर चयनात्मक (selective) बनी हुई है, इसलिए पूंजी की तैनाती तेज नहीं बल्कि धीरे-धीरे और असमान गति से हो सकती है। राजीव ठक्कर की टिप्पणियां ज्यादा आशावाद जरूर दिखाती हैं, लेकिन बाजार उम्मीद से ज्यादा लंबे समय तक रेंज-बाउंड भी रह सकता है।
निष्कर्ष
राजीव ठक्कर की लेटेस्ट लेटर टू इन्वेस्टर्स एक बार फिर उनकी निवेश दर्शन की स्पष्टता को दिखाती है — धैर्य, अनुशासन और वैल्यूएशन-केंद्रित सोच। चाहे वह हाल के कमजोर रिलेटिव रिटर्न को लेकर स्पष्टीकरण हो, या AI जैसे चर्चित सेक्टर में सोच-समझकर निवेश न करने का फैसला, ठक्कर का संदेश साफ है: शॉर्ट-टर्म शोर को नजरअंदाज करें और लॉन्ग-टर्म वैल्यू पर फोकस बनाए रखें। हालांकि, निवेशकों को यह भी समझना चाहिए कि किसी भी फंड मैनेजर की राय अंतिम सत्य नहीं होती, इसलिए अपने पोर्टफोलियो से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपनी जोखिम क्षमता, निवेश अवधि और वित्तीय लक्ष्यों का आकलन जरूर करें।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी और शिक्षा के उद्देश्य से है, यह निवेश सलाह नहीं है। इसमें उल्लेखित विचार राजीव ठक्कर और PPFAS म्यूचुअल फंड के हैं, जो सार्वजनिक रूप से उपलब्ध रिपोर्ट्स पर आधारित हैं। म्यूचुअल फंड निवेश बाजार जोखिमों के अधीन हैं, स्कीम से संबंधित सभी दस्तावेज ध्यान से पढ़ें। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य करें।
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