भारत का $20 बिलियन सेमीकंडक्टर प्लान: एशियाई देशों को देगा टक्कर! 2026-27 में गेम चेंजर

भारत अब सेमीकंडक्टर (चिप) उद्योग में तेजी से आगे बढ़ रहा है। सरकार $20 बिलियन (लगभग ₹1.65 लाख करोड़) के बड़े पैकेज पर काम कर रही है, जिससे भारत दक्षिण कोरिया, जापान, मलेशिया, वियतनाम और सिंगापुर जैसे देशों को सीधी टक्कर दे सकेगा। यह भारत सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) 2.0 का हिस्सा है।

यह खबर भारत को आत्मनिर्भर बनाने और वैश्विक सप्लाई चेन में मजबूत जगह बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। आइए विस्तार से समझते हैं।

भारत सेमीकंडक्टर मिशन 2.0: $10 बिलियन से दोगुना हो जाएगा फंड

पहले चरण में $10 बिलियन का India Semiconductor Mission (ISM) लगभग खत्म हो चुका है। अब सरकार इसे लगभग दोगुना करके $20 बिलियन करने जा रही है।

पहले चरण की उपलब्धियां:

  • 14 प्रोजेक्ट्स को मंजूरी मिल चुकी है।
  • टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स का फैब प्लांट, कई OSAT और ATMP यूनिट्स।
  • माइक्रोन जैसी कंपनियां भारत आई हैं।
  • कंपाउंड सेमीकंडक्टर फैब और मिनी/माइक्रो LED प्लांट।

ISM 2.0 में नया फोकस:

  • सप्लाई चेन इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करना (कच्चा माल आयात पर निर्भरता कम करना)।
  • सेमीकंडक्टर इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स को आकर्षित करना।
  • चिप डिजाइन क्षमता बढ़ाना।

एशियाई देशों से तुलना: भारत कहां खड़ा है?

देशइंसेंटिव पैकेज (अनुमानित)फोकस एरिया
चीन$94.9 बिलियनविशाल स्केल
अमेरिका (CHIPS Act)$52 बिलियनएडवांस्ड चिप्स
यूरोपीय संघ$47 बिलियनलोकल प्रोडक्शन
जापान$27 बिलियनTSMC, Rapidus
दक्षिण कोरिया$23 बिलियनइकोसिस्टम सपोर्ट
भारत (प्रस्तावित)$20 बिलियनOSAT + फैब + डिजाइन
मलेशिया$3.4 बिलियनOSAT/ATMP
सिंगापुर$3-6 बिलियनहाई-टेक

$20 बिलियन के साथ भारत कई एशियाई साथियों से आगे निकल सकता है।

राज्य सरकारों का जोरदार सपोर्ट

केंद्र के अलावा राज्य भी आक्रामक होकर निवेश आकर्षित कर रहे हैं:

  • गुजरात: 200 एकड़ तक 75% लैंड सब्सिडी + सस्ती बिजली।
  • असम: लैंड और इंफ्रास्ट्रक्चर सपोर्ट।
  • कुल मिलाकर केंद्र + राज्य: प्रोजेक्ट कॉस्ट का 70-85% तक सब्सिडी।

भारत के लिए क्यों जरूरी है यह प्लान?

  • हर साल भारत $100 बिलियन से ज्यादा इलेक्ट्रॉनिक्स और चिप्स आयात करता है।
  • मोबाइल, ऑटो, डिफेंस, AI और 5G में चिप्स की भारी मांग।
  • चीन +1 स्ट्रैटजी के तहत कंपनियां भारत आ रही हैं।
  • 2026 में कई प्लांट्स कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू करेंगे।

2026-27 टारगेट:

  • 4-5 बड़े प्लांट्स का कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू।
  • चिप डिजाइन में ग्लोबल प्लेयर बनना।
  • नौकरियों का बड़ा सृजन।

चुनौतियां भी हैं

  • अभी भी एडवांस्ड नैनोमीटर चिप्स (2nm-5nm) में पिछड़ना।
  • कच्चे माल और इक्विपमेंट पर निर्भरता।
  • स्किल्ड वर्कफोर्स की जरूरत (Chips to Startup प्रोग्राम चल रहा है)।

फिर भी, ISM 2.0 इन चुनौतियों को दूर करने की दिशा में काम कर रहा है।

निष्कर्ष: भारत बन रहा है ग्लोबल सेमीकंडक्टर हब

$20 बिलियन का यह पुश भारत को सिर्फ चिप मैन्युफैक्चरिंग नहीं, बल्कि टेक्नोलॉजी आत्मनिर्भरता की ओर ले जा रहा है। 2030 तक भारत विश्व के टॉप-4 सेमीकंडक्टर देशों में शामिल हो सकता है।

आपकी राय क्या है? क्या भारत सेमीकंडक्टर में चीन और ताइवान जैसी सफलता हासिल कर पाएगा? कमेंट में जरूर बताएं।

नोट: यह लेख सूचनात्मक उद्देश्य से लिखा गया है। निवेश संबंधी फैसले से पहले विशेषज्ञ सलाह लें।

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