नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) भारत का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज है और दुनिया में डेरिवेटिव्स कॉन्ट्रैक्ट्स के मामले में सबसे ज्यादा ट्रेडिंग वाला एक्सचेंज। पिछले कुछ दिनों से NSE अनलिस्टेड शेयरों में भारी खरीदारी देखने को मिल रही है। SEBI चेयरमैन के हालिया बयान से लग रहा है कि लंबे समय से अटके NSE IPO को इस महीने नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) मिल सकता है।
इस खबर ने अनलिस्टेड मार्केट में आग लगा दी है। कई प्लेटफॉर्म्स पर NSE अनलिस्टेड शेयर की कीमत ₹2,000 से ₹2,100 के आसपास ट्रेड हो रही है (जनवरी 2026 तक के लेटेस्ट अपडेट्स के अनुसार), और पिछले कुछ दिनों में ही 10-15% तक की तेजी देखी गई है।
NSE Unlisted Shares क्यों इतने हॉट हैं? मुख्य वजहें
- IPO की मजबूत उम्मीद – रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक NSE मार्च 2026 के अंत तक ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) फाइल कर सकता है। अगर सब कुछ प्लान के अनुसार हुआ तो यह भारत के इतिहास का सबसे बड़ा IPO बन सकता है।
- SEBI से पॉजिटिव सिग्नल – चेयरमैन ने कहा कि NOC जल्द जारी हो सकता है। साथ ही अनफेयर मार्केट एक्सेस केस में सेटलमेंट को इन-प्रिंसिपल अप्रूवल मिल चुका है।
- कंपनी की मजबूत पोजीशन – NSE भारत के कैपिटल मार्केट का दिल है। डेरिवेटिव्स में इसकी दबदबा है और लंबे समय तक ग्रोथ की उम्मीद बनी हुई है।
हालिया प्राइस मूवमेंट (जनवरी 2026 अपडेट)
अनलिस्टेड मार्केट में NSE शेयर की कीमत हाल ही में काफी उछली है:
- कुछ प्लेटफॉर्म पर ~₹2,080 प्रति शेयर
- कुछ जगहों पर ₹1,900-₹2,100 के बीच ट्रेडिंग
- 52-वीक हाई ~₹2,470 तक पहुंच चुका था
एक्सपर्ट्स का कहना है कि SEBI के बयान के बाद डिमांड में अचानक तेजी आई है।
एक्सपर्ट्स क्या कह रहे हैं?
- कुछ एक्सपर्ट्स मानते हैं कि लॉन्ग-टर्म के लिए NSE अनलिस्टेड शेयर खरीदना अच्छा मौका है, क्योंकि कंपनी का बिजनेस मॉडल बहुत मजबूत है और भारत में इक्विटी पार्टिसिपेशन बढ़ रहा है।
- दूसरे एक्सपर्ट्स चेतावनी दे रहे हैं कि अभी वैल्यूएशन थोड़ा स्ट्रेच्ड लग रहा है। IPO में बेहतर प्राइसिंग और ज्यादा ट्रांसपेरेंसी मिल सकती है।
जोखिम क्या हैं?
अनलिस्टेड शेयर खरीदने में ये रिस्क जरूर ध्यान रखें:
- लिक्विडिटी बहुत कम होती है (जल्दी बेचना मुश्किल)
- प्राइस में पारदर्शिता की कमी
- रेगुलेटरी चेंजेस से असर (जैसे हाल में डेरिवेटिव्स पर नियम सख्त होने से रेवेन्यू प्रभावित हुआ)
- IPO में लॉक-इन पीरियड या शेयरहोल्डर्स के लिए फेयर एग्जिट मैकेनिज्म की वजह से तुरंत फायदा न मिले
निवेशकों के लिए सलाह: अभी खरीदें या IPO का इंतजार करें?
- अगर आप लॉन्ग-टर्म निवेशक हैं और रिस्क ले सकते हैं, तो स्टैगर्ड तरीके से (थोड़ा-थोड़ा करके) खरीद सकते हैं।
- कंजर्वेटिव निवेशक के लिए सबसे सुरक्षित रास्ता है – IPO का इंतजार करें। IPO में क्लियर फाइनेंशियल डिस्क्लोजर, रेगुलेटेड प्राइसिंग और आसान एग्जिट मिलेगा।
- NSE एक क्वालिटी एसेट है, लेकिन सही समय और वैल्यूएशन पर एंट्री सबसे महत्वपूर्ण है।
NSE IPO भारत के कैपिटल मार्केट के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है। लेकिन जल्दबाजी में फैसला न लें। लेटेस्ट अपडेट्स के लिए SEBI और विश्वसनीय प्लेटफॉर्म्स पर नजर रखें।
(नोट: यह जानकारी जनवरी 2026 तक उपलब्ध न्यूज और मार्केट डेटा पर आधारित है। निवेश से पहले फाइनेंशियल एडवाइजर से जरूर सलाह लें। मार्केट में उतार-चढ़ाव सामान्य है।)
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