डॉलर की मजबूती और बढ़ती बॉन्ड यील्ड ने बुलियन मार्केट का मूड बिगाड़ा, ING ने 2026 की दूसरी छमाही के लिए सोने-चांदी के टारगेट प्राइस में बड़ी कटौती की
जनवरी 2026 में रिकॉर्ड ऊंचाई बनाने के बाद सोना और चांदी अब बेयर मार्केट करेक्शन की गिरफ्त में हैं। डच बैंकिंग समूह ING की कमोडिटी एनालिस्ट एवा मैन्थे की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक, यह गिरावट किसी एक झटके का नतीजा नहीं, बल्कि बाजार की सोच में आए एक बड़े बदलाव का परिणाम है — निवेशकों का ध्यान अब भू-राजनीतिक जोखिम से हटकर ब्याज दरों और मॉनेटरी पॉलिसी की सख्ती पर केंद्रित हो गया है।
गिरावट के पीछे की असली वजह
सोना अभी $4,000 प्रति औंस के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे फिसल चुका है और साल के निचले स्तर पर पहुंच गया है। चांदी की हालत भी कुछ अलग नहीं — यह $60 प्रति औंस के स्तर से नीचे जा चुकी है।
इसकी जड़ में दो ताकतें हैं:
- अमेरिकी डॉलर की मजबूती — डॉलर इंडेक्स फिर से 100 के पार चला गया है और फिलहाल 101.69 पर है, जो मई 2025 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है।
- बॉन्ड यील्ड में उछाल — ऊंची यील्ड सोने जैसी बिना-ब्याज वाली संपत्ति को कम आकर्षक बना देती है, क्योंकि निवेशकों के पास बेहतर रिटर्न वाले विकल्प मौजूद हो जाते हैं।
दिलचस्प बात यह है कि भू-राजनीतिक तनाव — जो आमतौर पर सोने को सेफ-हेवन डिमांड के तौर पर सहारा देते हैं — इस बार वह असर नहीं दिखा पाए। मैन्थे के मुताबिक, बाजार इन घटनाओं को अब सुरक्षा के नजरिए से नहीं, बल्कि महंगाई पर उनके असर और उसके आगे फेड की पॉलिसी पर क्या प्रभाव पड़ेगा, इस नजरिए से देख रहा है।
फेड की पॉलिसी बैठक ने बदला माहौल
हाल की मॉनेटरी पॉलिसी बैठक में फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरें तो स्थिर रखीं, लेकिन साफ संकेत दिए कि इस साल दर बढ़ोतरी संभव है। फेड चेयरमैन केविन वार्श ने भी दोहराया कि कीमतों में स्थिरता बनाए रखना उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
इसका नतीजा यह हुआ कि बाजार अब सितंबर तक पहली दर वृद्धि और दिसंबर तक एक और बढ़ोतरी की उम्मीद लगाने लगा है। यही आक्रामक रुख डॉलर और यील्ड दोनों को ऊपर धकेल रहा है — और सोने-चांदी को नीचे खींच रहा है।
ING के नए टारगेट: कितना घटा अनुमान?
| धातु | तिमाही | नया अनुमान | पुराना अनुमान |
|---|---|---|---|
| सोना | Q3 2026 | $4,300/औंस | $4,850/औंस |
| सोना | Q4 2026 | $4,600/औंस | $5,000/औंस |
| चांदी | Q3 2026 | $68/औंस | $79/औंस |
| चांदी | Q4 2026 | $74/औंस | $84/औंस |
यानी सोने के अनुमान में करीब $400-550 प्रति औंस और चांदी में $10-11 प्रति औंस की कटौती की गई है — जो दर्शाता है कि ING ने निकट भविष्य के नजरिए को कितनी गंभीरता से बदला है।
खास बात यह है कि ING को इस साल फेड की दर बढ़ोतरी की उम्मीद नहीं है, फिर भी उसने अपने अनुमान घटाए हैं। मैन्थे इसकी वजह समझाते हुए कहती हैं कि निवेशकों को बाजार के मौजूदा रुख के खिलाफ दांव नहीं लगाना चाहिए — भले असली ब्याज दर बढ़े या नहीं, बाजार की उम्मीदें ही कीमतों को दिशा देती हैं।
चांदी पर अलग दबाव: सोलर डिमांड की रफ्तार धीमी
चांदी के मामले में एक अतिरिक्त चुनौती है। यह धातु सोलर पैनल बनाने में अहम भूमिका निभाती है, लेकिन ING के मुताबिक:
- सोलर सेक्टर में डिमांड ग्रोथ की रफ्तार धीमी पड़ रही है
- फोटोवोल्टिक मैन्युफैक्चरिंग में “थ्रिफ्टिंग” (यानी कम चांदी इस्तेमाल करने की तकनीक) और सब्स्टिट्यूशन बढ़ रहा है
- नतीजतन हर सोलर पैनल में लगने वाली चांदी की मात्रा घट रही है
इसके बावजूद ING का मानना है कि चांदी बाजार में मांग और सप्लाई का अंतर (डेफिसिट) बना रहेगा।
क्या लंबी अवधि की कहानी अब भी सही है?
यहां सबसे जरूरी बात आती है — ING ने अपने टारगेट प्राइस घटाए हैं, लेकिन सोने-चांदी की बुनियादी कहानी पर भरोसा नहीं खोया। मैन्थे के मुताबिक तीन फैक्टर अब भी मजबूत बने हुए हैं:
- केंद्रीय बैंकों की खरीदारी लगातार मजबूत बनी हुई है
- रिजर्व डाइवर्सिफिकेशन का ट्रेंड जारी है — यानी देश अपने विदेशी रिजर्व में सोने का हिस्सा बढ़ा रहे हैं
- भू-राजनीतिक जोखिम अभी भी ऊंचे स्तर पर हैं, भले ही उनका तुरंत असर दिख नहीं रहा
उनके शब्दों में मतलब साफ है: यह करेक्शन रणनीति बदलने का इशारा नहीं, बल्कि रास्ता बदलने का इशारा है। सोना ऊपर जरूर जाएगा, लेकिन वह सफर पहले की उम्मीद से धीमा और ज्यादा उतार-चढ़ाव भरा होगा।
ING को अब भी उम्मीद है कि चांदी, बाजार में बने डेफिसिट और बढ़ते इलेक्ट्रिफिकेशन ट्रेंड के सहारे, सोने से थोड़ा बेहतर प्रदर्शन करेगी।
निवेशकों के लिए इसका मतलब क्या?
- अगर आप छोटी अवधि के निवेशक हैं, तो डॉलर और यील्ड की चाल पर नजर रखना जरूरी होगा — यही दो फैक्टर अभी कीमतों की दिशा तय कर रहे हैं
- सितंबर की फेड बैठक एक बड़ा ट्रिगर पॉइंट हो सकती है, जहां दर बढ़ोतरी पर फैसला आने की उम्मीद है
- लंबी अवधि के निवेशकों के लिए संरचनात्मक कहानी (केंद्रीय बैंक डिमांड, डाइवर्सिफिकेशन) अब भी बरकरार है, यानी यह करेक्शन घबराने की बजाय रणनीति समझने का मौका है
यह सामग्री केवल सामान्य सूचना के लिए है, निवेश सलाह नहीं। किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह जरूर लें।
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