क्या Small Cap में पैसा लगाना अब पहले जितना फायदेमंद नहीं रहा?

क्या Small Cap और Mid Cap शेयरों का सुनहरा दौर खत्म हो रहा है? जानिए क्यों दिग्गज निवेशक प्रशांत जैन Large Cap कंपनियों को बेहतर अवसर मान रहे हैं और निवेशकों को क्या रणनीति अपनानी चाहिए।

पिछले कुछ वर्षों में Small Cap और Mid Cap शेयरों ने निवेशकों को शानदार रिटर्न दिए हैं। कई निवेशकों ने इन कंपनियों में निवेश करके अपने पैसे को कई गुना बढ़ते हुए देखा। यही वजह है कि आज भी लाखों निवेशक अगले Multibagger Stock की तलाश में Small Cap कंपनियों की ओर आकर्षित होते हैं।

लेकिन बाजार के दिग्गज निवेशक प्रशांत जैन (Prashant Jain) का मानना है कि अब निवेशकों को केवल सपनों के आधार पर निवेश करने के बजाय वास्तविक आंकड़ों और कंपनियों की कमाई पर ध्यान देना चाहिए।

उनके अनुसार Small Cap शेयरों को लेकर बाजार में कई गलत धारणाएं बनी हुई हैं, जिनकी वजह से निवेशक बड़े जोखिम उठा रहे हैं।

क्या Small Cap कंपनियां वास्तव में तेजी से बढ़ती हैं?

अधिकांश निवेशकों का मानना है कि Small Cap कंपनियों में Growth की संभावना Large Cap कंपनियों की तुलना में अधिक होती है। यही सोच लोगों को इन शेयरों में निवेश करने के लिए प्रेरित करती है।

हालांकि प्रशांत जैन इस धारणा को पूरी तरह सही नहीं मानते।

उनका कहना है कि पूरे Small Cap Segment को देखें तो ऐसा कोई ठोस प्रमाण नहीं मिलता कि यह श्रेणी लगातार Large Cap कंपनियों से अधिक तेजी से बढ़ती है।

निवेशक अक्सर कुछ सफल कंपनियों को देखकर पूरी Category के बारे में निष्कर्ष निकाल लेते हैं। लेकिन वास्तविकता यह है कि कुछ चुनिंदा Multibagger Stocks पूरी Category की तस्वीर नहीं दिखाते।

कई बार निवेशक केवल उन कंपनियों को याद रखते हैं जिन्होंने शानदार प्रदर्शन किया, जबकि बड़ी संख्या में ऐसी कंपनियां भी होती हैं जो उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पातीं।

कमाई केवल 25%, लेकिन Market Value उससे कहीं ज्यादा

प्रशांत जैन की सबसे बड़ी चिंता Small Cap और Mid Cap कंपनियों की Valuation को लेकर है।

वर्तमान समय में Small Cap और Mid Cap कंपनियां Corporate India के कुल मुनाफे का लगभग 25% योगदान देती हैं। लेकिन शेयर बाजार में उनका Market Capitalization इससे काफी अधिक हो चुका है।

यह स्थिति इस बात का संकेत है कि निवेशकों ने इन कंपनियों के भविष्य को लेकर बहुत अधिक उम्मीदें लगा रखी हैं।

जब किसी कंपनी या पूरे सेक्टर की Valuation उसकी वास्तविक Earnings Growth से काफी आगे निकल जाती है, तो जोखिम भी तेजी से बढ़ जाता है।

सरल शब्दों में कहें तो निवेशक आज भविष्य के कई वर्षों की संभावित कमाई का मूल्य पहले ही चुका रहे हैं।

ऐसी स्थिति में अगर कंपनियां उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पातीं, तो शेयरों में बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है।

एक तिहाई Small Cap शेयर 50% से ज्यादा टूट चुके हैं

Small Cap Segment में Valuation का दबाव अब दिखाई भी देने लगा है।

प्रशांत जैन के अनुसार Small Cap और Mid Cap श्रेणी के लगभग हर तीन शेयरों में से एक शेयर अपने उच्चतम स्तर से 50% या उससे अधिक गिर चुका है।

यह केवल एक सामान्य Correction नहीं बल्कि निवेशकों के लिए चेतावनी का संकेत माना जा सकता है।

कई निवेशक ऐसी गिरावट को Buy the Dip का अवसर मानते हैं। लेकिन केवल इसलिए कि कोई शेयर 50% गिर गया है, इसका मतलब यह नहीं कि वह सस्ता हो गया है।

यदि किसी शेयर की Valuation पहले ही बहुत अधिक थी, तो गिरावट के बाद भी वह महंगा हो सकता है।

यही कारण है कि विशेषज्ञ निवेशकों को केवल Price Correction देखकर निवेश करने से बचने की सलाह दे रहे हैं।

क्या Large Cap शेयर अब बेहतर विकल्प बन सकते हैं?

जब Small Cap और Mid Cap शेयरों की Valuation बहुत अधिक हो जाती है, तब निवेशकों का ध्यान अक्सर Large Cap कंपनियों की ओर जाता है।

Large Cap कंपनियां आमतौर पर मजबूत Balance Sheet, स्थिर Cash Flow, अनुभवी Management और बेहतर Corporate Governance के लिए जानी जाती हैं।

इसके अलावा इन कंपनियों की Earnings Visibility भी अपेक्षाकृत बेहतर होती है।

प्रशांत जैन का मानना है कि वर्तमान समय में Large Cap कंपनियां Risk और Return के बीच बेहतर संतुलन प्रदान कर सकती हैं।

क्योंकि इनमें Small Cap जैसी अत्यधिक Valuation Expansion देखने को नहीं मिली है, इसलिए भविष्य में Outperformance की संभावना भी अधिक हो सकती है।

निवेशकों को अब क्या करना चाहिए?

यदि आपका Portfolio पूरी तरह Small Cap और Mid Cap शेयरों पर आधारित है, तो यह समय अपने निवेश की समीक्षा करने का हो सकता है।

निवेश करते समय केवल पिछले रिटर्न नहीं बल्कि निम्नलिखित बातों पर भी ध्यान देना जरूरी है:

  • कंपनी की वास्तविक Earnings Growth
  • Profitability और Cash Flow
  • Debt Level
  • Management Quality
  • Valuation
  • Competitive Advantage

लंबी अवधि में वही कंपनियां निवेशकों को बेहतर रिटर्न देती हैं जिनका बिजनेस मजबूत होता है और जो लगातार मुनाफा बढ़ाने में सक्षम होती हैं।

निष्कर्ष

Small Cap शेयरों ने पिछले कुछ वर्षों में निवेशकों को शानदार रिटर्न दिए हैं, लेकिन अब स्थिति पहले जैसी नहीं दिखाई देती। Valuation काफी ऊंचे स्तर पर पहुंच चुकी है और कई शेयरों में बड़ी गिरावट भी देखने को मिली है।

ऐसे समय में केवल Multibagger के सपने देखने के बजाय निवेशकों को Fundamentals पर ध्यान देना चाहिए।

याद रखिए, शेयर बाजार में लंबे समय तक सफलता केवल उन निवेशकों को मिलती है जो भावनाओं के बजाय डेटा, Earnings और Business Quality के आधार पर फैसले लेते हैं।

यदि बाजार वास्तव में Fundamentals की ओर लौट रहा है, तो आने वाले वर्षों में मजबूत Large Cap कंपनियां कई Small Cap शेयरों से बेहतर प्रदर्शन कर सकती हैं।

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