Groww ने शुरू की ‘Groww Prime’ सर्विस: अब रेगुलर म्यूचुअल फंड भी बेचेगी कंपनी!

देश के सबसे बड़े म्यूचुअल फंड इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म्स में से एक Groww ने अपनी नई सर्विस ‘Groww Prime’ लॉन्च की है, जिसके तहत कंपनी अब रेगुलर (कमीशन आधारित) म्यूचुअल फंड प्लान भी ऑफर करेगी। अब तक Groww सिर्फ डायरेक्ट प्लान पर फोकस करती थी, लेकिन इस नए कदम से वह पहली बार एक म्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूटर के रूप में भी काम करेगी। हालांकि कंपनी ने साफ किया है कि डायरेक्ट प्लान उसकी मुख्य पहचान बने रहेंगे और यह कोई रणनीतिक बदलाव नहीं, बल्कि एक अतिरिक्त विकल्प है।

क्या है Groww Prime?

Groww Prime एक ऐसी सेवा है जो निवेशकों को उनकी रिस्क प्रोफाइल, निवेश अवधि और वित्तीय लक्ष्यों के आधार पर म्यूचुअल फंड की सिफारिशें देती है। यह सुझाव कंपनी की इन-हाउस रिसर्च टीम और एक AI-आधारित मूल्यांकन इंजन द्वारा तैयार किए जाते हैं। यह सेवा सिर्फ यह नहीं बताती कि क्या खरीदें, बल्कि यह भी गाइड करती है कि कब होल्ड करें, कब बेचें और पोर्टफोलियो को कब रीबैलेंस करें।

अगर कोई ग्राहक Groww Prime को एक्टिवेट करता है, तो उसके भविष्य के सभी म्यूचुअल फंड निवेश डायरेक्ट प्लान की बजाय रेगुलर प्लान के जरिए किए जाएंगे। रेगुलर म्यूचुअल फंड में डिस्ट्रीब्यूटर्स (जैसे वेल्थ मैनेजमेंट फर्म्स, पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज़ और स्टॉकब्रोकिंग प्लेटफॉर्म) को कमीशन मिलता है, जबकि डायरेक्ट प्लान में ऐसा कोई कमीशन नहीं होता और इसलिए उनका रिटर्न आमतौर पर थोड़ा बेहतर होता है।

खास बात यह है कि यह सुविधा वापस भी ली जा सकती है — जो ग्राहक Groww Prime अपनाते हैं, वे चाहें तो दोबारा क्लासिक डायरेक्ट म्यूचुअल फंड अनुभव पर लौट सकते हैं। हालांकि, बार-बार अदला-बदली रोकने के लिए कंपनी ने एक शर्त रखी है कि कोई भी ग्राहक छह महीने में दो बार यह स्विच नहीं कर सकता।

Groww ने जनवरी 2026 में सीमित यूज़र बेस के साथ Groww Prime का पायलट टेस्ट शुरू किया था, और अब इसे व्यापक स्तर पर रोलआउट किया जा रहा है।

Groww की पुरानी नीति से यह कैसे अलग है?

यह कदम Groww के लंबे समय से चले आ रहे रुख से बड़ा बदलाव माना जा रहा है। कंपनी की स्थापना 2017 में हुई थी, और शुरुआत में उसने भी रेगुलर प्लान ही ऑफर किए थे। लेकिन 2019 में, यानी स्थापना के दो साल बाद, कंपनी ने ज़ीरो-कमीशन डायरेक्ट प्लान की तरफ रुख किया और इसे प्लेटफॉर्म पर डिफॉल्ट विकल्प बना दिया।

उस समय एक ब्लॉग पोस्ट में कंपनी ने समझाया था कि उसने शुरुआत में रेगुलर प्लान इसलिए रखे थे क्योंकि उसे लगता था कि छोटे निवेश पर कमीशन का असर नगण्य होगा। लेकिन जैसे-जैसे ग्राहकों का पोर्टफोलियो बड़ा होता गया, कमीशन का असर भी साफ दिखने लगा। कंपनी ने तब कहा था, “कमीशन लंबी अवधि में रिटर्न को प्रभावित करना शुरू कर देता है। यह उचित नहीं है और भारत की सबसे ग्राहक-केंद्रित कंपनी बनने के हमारे सिद्धांत के अनुरूप भी नहीं है।” इसके बाद से प्लेटफॉर्म पर खोजे, विश्लेषण किए या खरीदे जाने वाले सभी म्यूचुअल फंड डिफॉल्ट रूप से डायरेक्ट प्लान के तौर पर ही ऑफर किए जाते रहे।

Zerodha, Upstox, Paytm Money और Dhan जैसे नए जमाने के वेल्थ-टेक प्लेटफॉर्म्स ने भी खुद को पारंपरिक निवेश प्लेटफॉर्म्स से अलग दिखाने के लिए यही दलील दी थी कि डिस्ट्रीब्यूटर कमीशन प्लेटफॉर्म की निष्पक्षता (neutrality) से समझौता करता है।

कंपनी ने क्यों उठाया यह कदम?

Groww ने मनीकंट्रोल के सवालों के जवाब में कहा कि यह उसके दर्शन में कोई बदलाव नहीं है, बल्कि उन निवेशकों के लिए एक अतिरिक्त विकल्प है जिनकी ज़रूरतें समय के साथ बदल रही हैं। कंपनी के शब्दों में, “DIY (खुद से निवेश करना) हमारे कई ग्राहकों के लिए अच्छी तरह काम करता है, और हम DIY-फर्स्ट बने रहेंगे।”

कंपनी ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में ग्राहकों की सबसे आम मांग यही रही है कि उन्हें यह चुनने में मदद चाहिए कि किस म्यूचुअल फंड में निवेश करें। “उन्हें सिर्फ यह नहीं जानना था कि कैसे चुनें, बल्कि यह भी कि कैसे मैनेज करें — क्या खरीदें, क्या होल्ड करें, कब बाहर निकलें, और कब रीबैलेंस करें। हमें लगता है कि कुछ ग्राहक पूरी तरह DIY रहेंगे, और कुछ को मदद की ज़रूरत होगी,” कंपनी ने कहा।

X (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट में कंपनी ने भ्रम दूर करते हुए कहा, “हमने Groww के म्यूचुअल फंड ऑफरिंग को लेकर कुछ भ्रम और गलत जानकारी देखी है। तो साफ कर देते हैं — डायरेक्ट म्यूचुअल फंड Groww के केंद्र में हैं और हमेशा रहेंगे। हमारे प्लेटफॉर्म पर 1 करोड़ से ज़्यादा निवेशकों ने ₹1.9 लाख करोड़ से अधिक का म्यूचुअल फंड निवेश किया है, जिससे Groww देश का सबसे बड़ा म्यूचुअल फंड प्लेटफॉर्म बना है। हर DIY निवेशक के लिए Groww वैसा ही रहेगा जैसा हमेशा से था — डायरेक्ट, ज़ीरो-कमीशन और हमेशा के लिए मुफ्त।”

बिज़नेस टुडे को दिए बयान में कंपनी ने यह भी दोहराया कि मौजूदा DIY ग्राहकों के लिए “कुछ भी नहीं बदलता — न प्लान, न प्राइसिंग, न अनुभव।”

बाजार का बड़ा संदर्भ

मई 2026 में आई PwC-FICCI की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पांच साल से ज़्यादा समय तक होल्ड किए गए म्यूचुअल फंड एसेट्स (AUM) का हिस्सा मार्च 2020 के 6.3% से बढ़कर मार्च 2024 में 15.7% हो गया है। हालांकि लॉन्ग टर्म होल्डिंग अभी भी कुल एसेट्स का एक छोटा हिस्सा ही है। दिलचस्प बात यह है कि SIP निवेशकों में, रेगुलर प्लान में 23% एसेट्स पांच साल से ज़्यादा समय तक होल्ड किए जाते हैं, जबकि डायरेक्ट प्लान में यह आंकड़ा सिर्फ 12% है — जो यह संकेत देता है कि सलाह और मार्गदर्शन के साथ आने वाले निवेश ज़्यादा टिकाऊ हो सकते हैं।

इससे यह भी पता चलता है कि सिर्फ खोज (discovery) और लेनदेन (transaction) को आसान बनाना काफी नहीं है — लंबी अवधि में अच्छे नतीजों के लिए निवेशकों के व्यवहार को सही दिशा देना भी ज़रूरी है, जैसे बाज़ार में गिरावट के दौरान SIP जारी रखना।

निष्कर्ष

Groww का यह कदम भारत के वेल्थ-टेक उद्योग में एक बड़े बदलाव का संकेत हो सकता है, जहां प्लेटफॉर्म्स अब सिर्फ “डू-इट-योरसेल्फ” मॉडल तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि सलाह और मार्गदर्शन चाहने वाले निवेशकों के लिए भी विकल्प खोल रहे हैं। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि यह डायरेक्ट प्लान के अंत की शुरुआत नहीं, बल्कि दोनों विकल्पों को साथ देने की रणनीति है। इससे म्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूटर्स (MFDs) के लिए Groww अब रेगुलर प्लान सेगमेंट में भी एक नया प्रतिस्पर्धी बनकर उभरेगा।

अस्वीकरण: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। म्यूचुअल फंड में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। कोई भी वित्तीय फैसला लेने से पहले योजना से जुड़े दस्तावेज़ ध्यान से पढ़ें और अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह लें।

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