भारतीय शेयर बाजार के निवेशकों के लिए एक बड़ा बदलाव आया है। अब आप Apple, Microsoft, Amazon, Tesla जैसी विश्व की टॉप कंपनियों के शेयरों में सीधे निवेश कर सकते हैं, वो भी बिना किसी विदेशी ब्रोकर के झंझट के। NSE इंटरनेशनल एक्सचेंज (NSE IX) ने अपना ‘ग्लोबल एक्सेस’ प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है, जिससे भारतीय रिटेल निवेशकों को अमेरिकी शेयर बाजार में आसान पहुंच मिल गई है।
NSE IX क्या है और कैसे काम करता है?
NSE IX, गिफ्ट सिटी (गुजरात) में स्थित NSE का इंटरनेशनल एक्सचेंज है। यह प्लेटफॉर्म भारतीय निवेशकों को विदेशी शेयर बाजारों में ट्रेडिंग की सुविधा देता है। शुरुआत अमेरिकी बाजार से हुई है, जहां आप डॉलर में ट्रेडिंग कर सकते हैं।
प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल है:
- प्लेटफॉर्म पर अकाउंट बनाएं।
- आधार, पैन या डिजिलॉकर से डिजिटल KYC पूरा करें (मात्र 30-45 सेकंड में)।
- रुपये को गिफ्ट सिटी के बैंक खाते में ट्रांसफर करें, जो डॉलर में कन्वर्ट हो जाएगा।
- ट्रेडिंग लिमिट दिखने के बाद आप ऑर्डर प्लेस कर सकते हैं।
यह पूरी व्यवस्था RBI की लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) के तहत काम करती है। एक वित्त वर्ष में अधिकतम 2.5 लाख अमेरिकी डॉलर (लगभग 2 करोड़ रुपये) तक विदेश भेज सकते हैं।
फ्रैक्शनल ट्रेडिंग की खासियत
NSE IX की सबसे आकर्षक सुविधा फ्रैक्शनल इन्वेस्टिंग है। मतलब, महंगे शेयरों का पूरा शेयर खरीदने की जरूरत नहीं। उदाहरण के लिए:
- Apple का एक शेयर अगर 272 डॉलर का है, तो आप सिर्फ 5 डॉलर या 31 डॉलर का छोटा हिस्सा खरीद सकते हैं।
- इससे छोटे निवेशक भी टेक जायंट्स में हिस्सेदारी ले सकते हैं।
यह सुविधा उन लोगों के लिए गेम-चेंजर है जो कम पूंजी से ग्लोबल पोर्टफोलियो बनाना चाहते हैं।
कौन-कौन सी कंपनियां उपलब्ध हैं?
शुरुआती चरण में अमेरिकी बाजार से:
- Apple
- Microsoft
- Amazon
- Tesla
- NVIDIA
- और अन्य कई बड़ी कंपनियां
प्लेटफॉर्म पर शेयरों के अलावा ETF भी उपलब्ध हैं। लेकिन डेरिवेटिव्स, क्रिप्टो या डिजिटल एसेट्स की अनुमति नहीं है।
फायदे भारतीय निवेशकों के लिए
- विविधीकरण: अब पोर्टफोलियो सिर्फ भारतीय बाजार तक सीमित नहीं रहेगा।
- आसान पहुंच: विदेशी ब्रोकर अकाउंट या जटिल प्रक्रिया की जरूरत नहीं।
- कम लागत: जीरो स्टांप ड्यूटी, जीरो STT जैसी सुविधाएं (कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार)।
- भविष्य में विस्तार: NSE IX के MD और CEO वी बालासुब्रमण्यम के अनुसार, अगले 3-6 महीनों में 30 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय बाजार (UK, Japan, Europe आदि) जुड़ेंगे। अमेरिकी बाजार सबसे बड़ा और आकर्षक होने के कारण पहले लॉन्च हुआ है।
उन्होंने कहा, “यह सिर्फ एक नई सुविधा नहीं, बल्कि भारतीय निवेशकों के लिए स्ट्रक्चरल बदलाव है। अब निवेशक केवल भारतीय शेयर बाजार तक सीमित नहीं रहेंगे।”
ध्यान रखने योग्य बातें
- निवेश डॉलर में होता है, इसलिए मुद्रा विनिमय जोखिम (currency risk) रहता है।
- LRS की सीमा का पालन जरूरी है।
- टैक्स नियम लागू होंगे (जैसे TCS, कैपिटल गेन टैक्स आदि)।
- प्लेटफॉर्म वेब और मोबाइल ऐप दोनों पर उपलब्ध है।
यह कदम भारतीय रिटेल निवेशकों को ग्लोबल मार्केट में मजबूत हिस्सेदारी देगा। अगर आप भी अमेरिकी टेक जायंट्स में निवेश करना चाहते हैं, तो NSE IX ग्लोबल एक्सेस प्लेटफॉर्म चेक करें। लेकिन निवेश से पहले अपनी रिसर्च और रिस्क समझना जरूरी है।
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